Samastipur. समस्तीपुर। बिहार के समस्तीपुर में ट्रेन के पैसेंजर कोच से एक महीने का मासूम बच्चा लावारिस हालत में मिलने का मामला सामने आया है। ट्रेन की सीट पर बच्चे को अकेले रोता देखकर यात्रियों ने रेलवे अधिकारियों को इसकी सूचना दी। इसके बाद रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की टीम ने मासूम को सुरक्षित रेस्क्यू किया और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद बाल कल्याण समिति की देखरेख में सौंप दिया। जानकारी के मुताबिक, ट्रेन में यात्रा कर रहे यात्रियों की नजर सीट पर अकेले पड़े मासूम पर पड़ी। आसपास बच्चे के साथ कोई अभिभावक दिखाई नहीं दिया। कुछ देर इंतजार करने और दूसरे यात्रियों से पूछताछ करने के बावजूद जब बच्चे के माता-पिता या परिजनों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली तो यात्रियों ने रेलवे को सूचना दी।
सीट पर अकेला रो रहा था मासूम
बताया जा रहा है कि करीब एक महीने का बच्चा ट्रेन की सीट पर अकेला था और लगातार रो रहा था। यात्रियों ने पहले आसपास मौजूद लोगों से बच्चे के परिजनों के बारे में जानकारी लेने की कोशिश की। किसी ने बच्चे की जिम्मेदारी नहीं ली तो मामला संदिग्ध लगा। इसके बाद रेलवे हेल्पलाइन और संबंधित अधिकारियों को घटना की जानकारी दी गई। सूचना मिलते ही RPF को अलर्ट किया गया। ट्रेन के स्टेशन पहुंचने पर रेलवे सुरक्षा बल की टीम संबंधित कोच में पहुंची और बच्चे को अपनी सुरक्षा में लिया। रेलवे की ओर से बच्चे के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए उसका मेडिकल परीक्षण कराया गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मेडिकल प्रक्रिया पूरी करने के बाद मासूम को बाल कल्याण से जुड़ी संस्था के सुपुर्द किया गया, जहां उसकी देखभाल की जा रही है।
माता-पिता की तलाश की जा रही
मासूम ट्रेन की सीट तक कैसे पहुंचा और उसके माता-पिता या अभिभावक कौन हैं, इसे लेकर जांच की जरूरत है। यात्रियों के स्तर पर बच्चे को छोड़कर चले जाने की आशंका जताई गई है, लेकिन बच्चे को उसके माता-पिता ने जानबूझकर छोड़ा या वह किसी अन्य परिस्थिति में उनसे अलग हुआ, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। रेलवे स्टेशन और ट्रेन में लगे CCTV कैमरों की फुटेज इस मामले में अहम साबित हो सकती है। इसके अलावा ट्रेन में यात्रा करने वाले यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों से मिली जानकारी के आधार पर भी बच्चे के परिजनों की पहचान करने की कोशिश की जा सकती है।
बाल कल्याण समिति की निगरानी में बच्चा
रेस्क्यू के बाद बच्चे को बाल कल्याण समिति (CWC) की देखरेख में सौंप दिया गया है। बाल संरक्षण से जुड़े नियमों के तहत ऐसे मामलों में बच्चे की सुरक्षा, स्वास्थ्य और देखभाल को प्राथमिकता दी जाती है। इसके साथ ही संबंधित एजेंसियां बच्चे के माता-पिता या कानूनी अभिभावकों की पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया करती हैं। अगर बच्चे के परिजनों का पता चलता है तो आवश्यक जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही आगे का फैसला लिया जाता है। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मासूम सुरक्षित है और उसकी देखभाल की जा रही है। घटना की जानकारी सामने आने के बाद ट्रेन में मौजूद यात्रियों की सतर्कता की भी चर्चा हो रही है। बच्चे को अकेला देखकर यात्रियों ने तत्काल रेलवे को जानकारी दी, जिससे समय रहते उसे सुरक्षित संरक्षण में लिया जा सका। अब रेलवे और संबंधित एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल बच्चे के माता-पिता या अभिभावकों का पता लगाना है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि मासूम ट्रेन में लावारिस हालत में कैसे पहुंचा।
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