एथेंस: एक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा करके और आतंकवाद से निपटने में सीमा पार आतंकवादियों की आवाजाही, टेरर फंडिंग, सुरक्षित पनाहगाहों और दोहरे मापदंडों के खिलाफ सख्त रुख अपनाकर, ब्रिक्स (BRICS) ने उस तर्क को और मजबूत किया है जिसे भारत दशकों से दुनिया के सामने रखता रहा है।
एथेंस स्थित 'डायरेक्टस' (Directus) ने कहा कि भारत की मेजबानी में हाल ही में हुए 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान अपनाए गए 'नई दिल्ली
घोषणापत्र
' में इस बात पर जोर दिया गया कि आतंकवाद को राजनीतिक तर्कों से जायज नहीं ठहराया जा सकता, और न ही देश रणनीतिक सुविधा के आधार पर आतंकवादियों के बीच कोई भेदभाव कर सकते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया, "पाकिस्तान का स्पष्ट रूप से नाम नहीं लिया गया है। इस तथ्य को न तो छिपाया जाना चाहिए और न ही इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाना चाहिए। फिर भी, इस घोषणापत्र का राजनीतिक महत्व उन शब्दों में निहित है जिन्हें कई महत्वपूर्ण देशों के विविध समूह ने स्वीकार किया है। भारत के लिए, यह घटनाक्रम एक महत्वपूर्ण राजनयिक उपलब्धि है।"
यह बताते हुए कि यह घटनाक्रम पाकिस्तान के लिए एक असहज सवाल खड़ा करता है, रिपोर्ट ने पूछा कि सीमा पार आतंकवाद पर अंतरराष्ट्रीय विमर्श (नैरेटिव) कब तक उन बुनियादी ढांचे, संगठनों और वैचारिक नेटवर्क से अलग रह सकता है, जिनके बारे में भारत ने बार-बार आरोप लगाया है कि वे पाकिस्तानी धरती से संचालित हो रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया कि 22 अप्रैल, 2025 को पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूह द्वारा किए गए पहलगाम के बर्बर आतंकी हमले - जिसमें 26 निर्दोष नागरिक मारे गए थे - को भारत द्वारा झेले गए अनगिनत आतंकी हमलों की भीड़ में खो जाने नहीं दिया गया।
'डायरेक्टस' ने कहा, "भारत ने इसे एक अंतरराष्ट्रीय राजनयिक मुद्दा बनाया। ब्रिक्स घोषणापत्र में हमले की कड़ी निंदा करने से इस त्रासदी को एक महत्वपूर्ण बहुपक्षीय आयाम मिला है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह निंदा सीमा पार आतंकवाद, फंडिंग और सुरक्षित पनाहगाहों से निपटने वाली भाषा के साथ आई है। यह संयोजन मायने रखता है। भारत लगातार यह कहता रहा है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को केवल राजनीतिक विवाद के नजरिए से नहीं देखा जा सकता है।"
इसमें आगे कहा गया, "आतंकवादियों को हथियार, प्रशिक्षण, धन, संचार, भर्ती नेटवर्क और काम करने के लिए जगहों की आवश्यकता होती है। इसलिए आतंकवाद से लड़ने के लिए न केवल उस व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता है जो ट्रिगर दबाता है, बल्कि उस पूरे इकोसिस्टम (तंत्र) के खिलाफ भी कार्रवाई जरूरी है जो उसे ऐसा करने में सक्षम बनाता है। इस सिद्धांत को अब ब्रिक्स के भीतर महत्वपूर्ण समर्थन मिला है।"
रिपोर्ट में कहा गया कि यह घोषणापत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहुआयामी विदेश नीति की ताकत को भी दर्शाता है, जिसमें भारत उन देशों के साथ भी जुड़ रहा है जो अक्सर एक-दूसरे से असहमत रहते हैं। “यह क्वाड (Quad) में शामिल है और साथ ही ब्रिक्स (BRICS) के मुख्य सदस्यों में से एक बना हुआ है। यह रूस के साथ अपने पुराने रिश्ते बनाए हुए है और साथ ही अमेरिका के साथ एक बहुत अहम साझेदारी भी बना रहा है। इसने खाड़ी देशों के साथ अपने जुड़ाव को काफी बढ़ाया है और इज़राइल के साथ भी करीबी रिश्ते बनाए रखे हैं। साथ ही, चीन के साथ बड़े मतभेदों के बावजूद, भारत बीजिंग के साथ तब भी बातचीत करता रहता है जब राष्ट्रीय हितों के लिए ऐसा करना ज़रूरी होता है,” डायरेक्टस (Directus) की रिपोर्ट में इस बात पर ज़ोर दिया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि कभी-कभी भारत की रणनीतिक स्वायत्तता (strategic autonomy) में संतुलन बनाने को लेकर आलोचना होती रही है, लेकिन ब्रिक्स ने अपनी उपयोगिता साबित की है।
रिपोर्ट में कहा गया, “भारत ऐसे देशों के समूह के सामने अपनी मुख्य सुरक्षा चिंताओं को रखने और एक सार्थक सहमति बनाने में कामयाब रहा है, जिनके भू-राजनीतिक हित (geopolitical interests) एक-दूसरे से बहुत अलग हैं। इससे किसी भू-राजनीतिक गुट का हिस्सा बनने के बजाय एक स्वतंत्र वैश्विक शक्ति के तौर पर भारत की विश्वसनीयता मज़बूत होती है।”
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