कर्नाटक में सीएम की नहीं सुन रहे अधिकारी, एच.के. पाटिल के आरोपों को लेकर जेडीएस का हमला
बेंगलुरु: जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) ने सोमवार को आरोप लगाया कि गडग से कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक एच.के. पाटिल द्वारा राज्य में गंभीर सूखे की स्थिति को लेकर उठाई गई चिंताओं ने कांग्रेस सरकार की निष्क्रियता को उजागर कर दिया है। जेडीएस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि एच.के. पाटिल के पत्र से स्पष्ट होता है कि सरकारी मशीनरी किसानों की समस्याओं के प्रति पर्याप्त रूप से संवेदनशील नहीं है।
पार्टी ने आरोप लगाया कि पाटिल ने शिकायत की है कि अधिकारी मुख्यमंत्री के निर्देशों की अनदेखी कर रहे हैं। जेडीएस ने सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार सरकार चला रहे हैं या फिर वातानुकूलित दफ्तरों में बैठे अधिकारी फैसले ले रहे हैं।
जेडीएस ने सूखे के आकलन पर भी सवाल उठाए। पार्टी का आरोप है कि 40 से 60 प्रतिशत तक वर्षा की कमी झेल रहे कई तालुकों को अब तक सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया गया है। पर्याप्त बारिश नहीं हुई है और वर्षा की कमी 40 से 60 प्रतिशत के बीच है, फिर भी अधिकारी मानो यह सपना देख रहे हैं कि 27 तालुकों के किसान समृद्ध हैं।"
जेडीएस ने सरकार पर बेंगलुरु-केंद्रित प्रशासन चलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि उत्तर कर्नाटक के किसानों का भविष्य एयर कंडीशनर वाले कमरों में बैठे अधिकारी तय कर रहे हैं। पार्टी ने डिजिटल युग में प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। जेडीएस का दावा है कि सरकारी पत्राचार को अपने गंतव्य तक पहुंचने में कई दिन लग रहे हैं। पार्टी ने तंज कसते हुए पूछा, "क्या यह आईटी-बीटी राज्य है या फिर पाषाण युग का प्रशासन?"
जेडीएस ने कहा कि स्वयं एच.के. पाटिल ने अपने पत्र में लिखा है कि अधिकारी सरकार की छवि खराब कर रहे हैं। पार्टी ने पूछा कि जब सत्तारूढ़ कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक ही ऐसी बात कह रहे हैं तो प्रशासन की स्थिति पर और क्या कहा जा सकता है।
पार्टी ने सरकार से मांग की कि पाटिल द्वारा उठाए गए मुद्दों को गंभीरता से लेते हुए सूखा प्रभावित क्षेत्रों के किसानों की समस्याओं का समाधान किया जाए। पूर्व मंत्री एच.के. पाटिल ने चेतावनी दी है कि सरकार सूखाग्रस्त क्षेत्रों की सही पहचान और वर्गीकरण करने में विफल रही है। यदि उनके निर्वाचन क्षेत्र गडग के तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया गया, तो वे विधायक पद से इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने सरकार से सूखा घोषित करने के दिशा-निर्देशों पर पुनर्विचार करने की भी अपील की है।
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को लिखे पत्र में पाटिल ने यह भी कहा कि सांख्यिकी विभाग के अधिकारी फसल बीमा से जुड़े मामलों में उनके निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। उन्होंने लिखा, "सच का सम्मान नहीं किया जा रहा है। अधिकारी अपनी सुविधा के अनुसार तथ्यों को तोड़ मरोड़ रहे हैं। उन्होंने दिशा-निर्देशों और मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिए गए फैसलों के विपरीत निर्णय किए हैं।"
पाटिल ने कहा, "किसान विरोधी यह रवैया सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कित्तूर कर्नाटक क्षेत्र के 73 तालुकों में से 27 को अब तक सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया गया है।"