Baloda Bazar. बलौदाबाजार। जिले में वन विभाग वन संरक्षण के साथ-साथ वन्यजीवों और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए लगातार सक्रिय है। बलौदाबाजार वन परिक्षेत्र की टीम ने वर्ष 2026 के दौरान अब तक करीब 250 सर्पों का सफल रेस्क्यू कर उन्हें सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़ा है। वन विभाग की टीम को जब भी घर, स्कूल, खेत या आबादी वाले क्षेत्रों में सर्प या अन्य वन्यजीव दिखाई देने की सूचना मिलती है, टीम तत्काल मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू अभियान चलाती है।
जहरीले सर्पों का भी किया गया रेस्क्यू
वन विभाग के अनुसार, रेस्क्यू किए गए सर्पों में विषैले और गैर-विषैले दोनों प्रकार के सर्प शामिल हैं। इनमें कॉमन करैत, रसेल वाइपर, कोबरा सहित अन्य प्रजातियों के सर्प शामिल हैं। रेस्क्यू के बाद सभी सर्पों को सुरक्षित तरीके से उनके प्राकृतिक आवास वाले वन क्षेत्रों में छोड़ा गया, जिससे मानव और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकी।
घायल वन्यजीवों को भी बचाया
वन विभाग ने केवल सर्प रेस्क्यू तक ही अभियान सीमित नहीं रखा, बल्कि संकट में फंसे अन्य वन्यजीवों की भी मदद की। विभिन्न क्षेत्रों से मिली सूचना के आधार पर घायल बंदरों का भी रेस्क्यू किया गया। घायल वन्यजीवों को सुरक्षित निकालकर उनका उपचार और देखभाल की व्यवस्था की गई। इसके बाद उनकी स्थिति के अनुसार उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
देर रात भी पहुंची टीम
वन विभाग की टीम ने कई चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी तत्परता दिखाई। जीएडी कॉलोनी, कृष्णायन कॉलोनी, लक्ष्मण विहार कॉलोनी, श्री कृष्णा सिटी सहित बलौदाबाजार नगर के कई वार्डों और ग्रामीण क्षेत्रों से मिली सूचनाओं पर टीम तत्काल पहुंची। कई बार देर रात सर्प दिखाई देने की सूचना मिलने पर भी वन विभाग के कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर सुरक्षित रेस्क्यू किया। एसडीओ बलौदाबाजार के मार्गदर्शन में परिक्षेत्र अधिकारी और वन अमले ने सीमित संसाधनों के बावजूद प्रभावी तरीके से रेस्क्यू अभियान संचालित किया।
सर्प रेस्क्यू प्रशिक्षण से बढ़ी क्षमता
रेस्क्यू अभियान को और सुरक्षित एवं प्रभावी बनाने के लिए बलौदाबाजार वनमंडल कार्यालय में विशेष सर्प रेस्क्यू प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण में वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों और स्थानीय स्वयंसेवकों सहित करीब 70 से 80 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण के दौरान विषैले और गैर-विषैले सर्पों की पहचान, सुरक्षित पकड़ने की तकनीक, सुरक्षा उपकरणों का उपयोग, प्राथमिक सावधानियां और रेस्क्यू के बाद सर्पों को प्राकृतिक आवास में छोड़ने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई।
लोगों में बढ़ा वन विभाग पर भरोसा
वन विभाग की सक्रियता से क्षेत्र के लोगों में जागरूकता बढ़ी है। अब नागरिक सर्प या अन्य वन्यजीव दिखाई देने पर खुद जोखिम उठाने के बजाय वन विभाग को सूचना देना ज्यादा सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं। वन विभाग का कहना है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और जैव विविधता संरक्षण के लिए ऐसे अभियान लगातार जारी रहेंगे।