पिथौरागढ़।भारत और मंगोलिया के बीच हर साल आयोजित होने वाला संयुक्त सैन्य अभ्यास **‘नोमैडिक एलिफेंट’ (NOMADIC ELEPHANT)** का 18वां संस्करण सोमवार को उत्तराखंड के पिथौरागढ़ स्थित फॉरेन ट्रेनिंग नोड में शुरू हुआ। यह सैन्य अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग, तालमेल और संयुक्त अभियान क्षमता को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह अभ्यास **21 सितंबर से 3 अक्टूबर 2026** तक चलेगा। भारत और मंगोलिया के बीच यह संयुक्त सैन्य अभ्यास बारी-बारी से दोनों देशों में आयोजित किया जाता है। इसका पिछला संस्करण मई-जून 2025 में मंगोलिया की राजधानी उलानबटार में आयोजित किया गया था।
दोनों देशों के 45-45 जवान ले रहे हिस्सा
इस सैन्य अभ्यास में भारतीय सेना और मंगोलियाई सशस्त्र बलों के 45-45 जवान हिस्सा ले रहे हैं। दोनों देशों के सैनिक मिलकर विभिन्न सैन्य गतिविधियों और प्रशिक्षण सत्रों में भाग लेंगे।अभ्यास के दौरान जवान एक-दूसरे की कार्यप्रणाली, रणनीति और ऑपरेशनल अनुभवों को समझेंगे। इससे दोनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद मिलेगी।
संयुक्त राष्ट्र मिशन के अनुरूप तैयार किया गया अभ्यास
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र के आदेश के तहत अर्ध-शहरी और पहाड़ी क्षेत्रों में उग्रवाद विरोधी अभियानों को संचालित करने के लिए दोनों सेनाओं की संयुक्त क्षमता को बढ़ाना है।भारत और मंगोलिया की सेनाएं इस अभ्यास के जरिए वास्तविक परिस्थितियों जैसे माहौल में प्रशिक्षण लेंगी, ताकि किसी भी संयुक्त अभियान के दौरान बेहतर तालमेल के साथ काम किया जा सके।
टैक्टिकल ऑपरेशन और बेहतर रणनीति पर जोर
‘नोमैडिक एलिफेंट’ अभ्यास के दौरान कई महत्वपूर्ण सैन्य गतिविधियों को शामिल किया गया है। इनमें टैक्टिकल स्तर के ऑपरेशन, सैन्य रणनीतियों का आदान-प्रदान और ऑपरेशनल ड्रिल को बेहतर बनाना शामिल है।दोनों देशों के सैनिक एक-दूसरे के अनुभवों और आधुनिक तकनीकों को साझा करेंगे। इससे भविष्य में संयुक्त अभियानों के दौरान प्रभावी प्रतिक्रिया देने की क्षमता बढ़ेगी।
कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन की होगी ट्रेनिंग
अभ्यास के प्रशिक्षण कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण गतिविधियां शामिल की गई हैं। इनमें **घेराबंदी और तलाशी अभियान (Cordon and Search Operation)**, रूम इंटरवेंशन ड्रिल और विशेष हेलिबोर्न ऑपरेशन जैसी गतिविधियां प्रमुख हैं।इन अभ्यासों के जरिए जवानों को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करने, इलाके की पहचान करने और अभियान को सफलतापूर्वक पूरा करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
साइबर सुरक्षा और ड्रोन तकनीक पर भी फोकस
आधुनिक युद्ध और सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए इस सैन्य अभ्यास में साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण को भी शामिल किया गया है।इसके अलावा ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम के इस्तेमाल पर भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। वर्तमान समय में ड्रोन तकनीक सुरक्षा अभियानों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है, इसलिए सैनिकों को इससे जुड़ी क्षमताओं से परिचित कराया जाएगा।
दोनों सेनाओं के बीच बढ़ेगा आपसी तालमेल
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इस अभ्यास का एक प्रमुख उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच **इंटरऑपरेबिलिटी यानी आपसी तालमेल** को मजबूत करना है।संयुक्त प्रशिक्षण से सैनिकों को एक-दूसरे की रणनीति, संचार प्रणाली और ऑपरेशनल प्रक्रियाओं को समझने का अवसर मिलेगा।
भारत-मंगोलिया रक्षा संबंधों में महत्वपूर्ण कदम
भारत और मंगोलिया के बीच लंबे समय से मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। रक्षा क्षेत्र में दोनों देश नियमित रूप से सहयोग करते रहे हैं।‘नोमैडिक एलिफेंट’ जैसे सैन्य अभ्यास दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे दोनों सेनाओं को संयुक्त रूप से काम करने का अनुभव मिलता है।
वास्तविक परिस्थितियों में प्रशिक्षण का अवसर
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह अभ्यास दोनों देशों के सैनिकों को वास्तविक ऑपरेशन जैसी परिस्थितियों में प्रशिक्षण लेने का अवसर देगा।इस दौरान सैनिक अपनी क्षमताओं को बेहतर बनाएंगे और संयुक्त रूप से किसी चुनौतीपूर्ण स्थिति से निपटने की तैयारी करेंगे।भारत और मंगोलिया के बीच शुरू हुआ 18वां ‘नोमैडिक एलिफेंट’ सैन्य अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग को दर्शाता है। 3 अक्टूबर तक चलने वाले इस अभ्यास में आधुनिक सैन्य तकनीक, रणनीति और संयुक्त अभियान क्षमता को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।