NEET अभ्यर्थी ने वीडियो भेजकर की आत्महत्या, मां से मांगी माफी

घटना से मचा हड़कंप

Update: 2026-06-25 10:44 GMT
Hingoli. हिंगोली। महाराष्ट्र के हिंगोली जिले से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है, जहां 18 वर्षीय नीट (NEET-UG) अभ्यर्थी ने कथित रूप से आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान सुशील धागे के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि छात्र ने आत्महत्या से पहले अपने मोबाइल फोन से एक वीडियो रिकॉर्ड किया और उसे परिवार के सदस्यों को भेज दिया। इसके बाद उसने एक कुएं में छलांग लगा दी। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है और पूरे इलाके में शोक का माहौल है।

जानकारी के अनुसार, सुशील मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी की तैयारी कर रहा था और डॉक्टर बनने का सपना देख रहा था। वह इस वर्ष आयोजित परीक्षा में शामिल हुआ था। बताया जा रहा है कि आत्महत्या से पहले उसने करीब 33 सेकंड का एक वीडियो रिकॉर्ड किया, जिसमें वह भावुक नजर आ रहा है। वीडियो में उसने अपनी मां से माफी मांगते हुए परिवार का ख्याल रखने की बात कही। परिजनों के अनुसार, वीडियो में सुशील ने हाथ जोड़कर कहा कि वह मानसिक रूप से काफी परेशान है। उसने अपनी मां से माफी मांगते हुए छोटे भाई का ख्याल रखने की अपील की। वीडियो सामने आने के बाद परिवार और परिचितों में शोक की लहर दौड़ गई। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि सुशील ने 21 जून को आयोजित नीट-यूजी की पुनर्परीक्षा में हिस्सा लिया था।

इससे पहले वह 3 मई को हुई परीक्षा में भी शामिल हुआ था। हालांकि परीक्षा से जुड़े विवादों और पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई थी, जिसके चलते दोबारा परीक्षा आयोजित कराई गई। परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि परीक्षा से जुड़ी परिस्थितियों और भविष्य को लेकर छात्र तनाव में था, हालांकि पुलिस अभी आत्महत्या के पीछे के कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है। छात्र के मोबाइल फोन, वीडियो संदेश और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। साथ ही परिवार के सदस्यों और परिचितों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं ताकि घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। इस घटना ने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव और तनाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को भावनात्मक और मानसिक सहयोग की आवश्यकता होती है।

परिवार, शिक्षक और मित्रों की सकारात्मक भूमिका ऐसे कठिन समय में बेहद महत्वपूर्ण होती है। शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि किसी भी परीक्षा का परिणाम जीवन का अंतिम सत्य नहीं होता। असफलता या कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए छात्रों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने और उन्हें उचित परामर्श उपलब्ध कराने की जरूरत है। कई मनोवैज्ञानिक भी लगातार यह सलाह देते रहे हैं कि परीक्षा संबंधी तनाव महसूस होने पर विद्यार्थियों को अपने परिवार, दोस्तों या विशेषज्ञों से खुलकर बातचीत करनी चाहिए। घटना के बाद हिंगोली जिले में शोक का माहौल है। स्थानीय लोगों ने भी छात्र की मौत पर दुख जताया है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की विस्तृत जांच जारी है। सुशील की मौत ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि प्रतिस्पर्धा और सफलता की दौड़ में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। परिवार और समाज की जिम्मेदारी है कि वे युवाओं को भावनात्मक सहारा दें और उन्हें यह भरोसा दिलाएं कि किसी भी चुनौती का सामना मिलकर किया जा सकता है।
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