Alwar अलवर। ऑल इंडिया एंटी-टेररिस्ट फ्रंट के चेयरमैन मनिंदरजीत सिंह बिट्टा ने राजस्थान के अलवर में राष्ट्रवाद, तिरंगे और ‘वंदे मातरम’ को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि उनके लिए राष्ट्र सर्वोपरि है और देश की जनता भी उन लोगों को अवसर देती है, जो राष्ट्र को सबसे पहले रखते हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना, तिरंगे और ‘वंदे मातरम’ से दूर जाएंगे, जनता उन्हें स्वीकार नहीं करेगी। अलवर में बातचीत के दौरान बिट्टा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह एक बार फिर दोहराना चाहते हैं कि राष्ट्र सबसे पहले है। उनका कहना था कि कोई व्यक्ति कहीं से भी हो, यदि वह राष्ट्र को प्राथमिकता देता है तो देश की जनता उसे अवसर देने के लिए तैयार रहती है।
मनिंदरजीत सिंह बिट्टा ने तिरंगे और ‘वंदे मातरम’ का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्र के प्रति सम्मान की भावना से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो लोग इस सिद्धांत से भटकते हैं, उन्हें जनता खुद किनारे कर देती है। अपने बयान के दौरान बिट्टा ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS का भी जिक्र किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका RSS के साथ कोई औपचारिक जुड़ाव नहीं है। हालांकि उन्होंने कहा कि उन्होंने संघ द्वारा किए गए कार्यों को देखा है। उनके बयान में राष्ट्रहित को राजनीतिक या संगठनात्मक पहचान से ऊपर रखने पर जोर दिखाई दिया।
बिट्टा लंबे समय से आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर मुखर रहे हैं। अलवर में दिए गए उनके ताजा बयान में भी ‘Nation First’ की अवधारणा प्रमुख रही। उन्होंने लोगों से राष्ट्र और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही। उनका यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब देश 80वें स्वतंत्रता दिवस का उत्सव मना रहा है और ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। देश के विभिन्न हिस्सों में तिरंगा यात्राओं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और देशभक्ति से जुड़े आयोजनों के माध्यम से स्वतंत्रता दिवस मनाया गया।
मनिंदरजीत सिंह बिट्टा के मुताबिक राजनीतिक और वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन राष्ट्रहित के मुद्दे पर प्राथमिकता स्पष्ट होनी चाहिए। उन्होंने अपने वक्तव्य में बार-बार राष्ट्र को सर्वोपरि रखने पर जोर दिया। RSS को लेकर बिट्टा की टिप्पणी भी चर्चा का विषय बनी। उन्होंने संगठन से औपचारिक रूप से जुड़े नहीं होने की बात कहते हुए उसके काम का उल्लेख किया। हालांकि उपलब्ध बयान का यह हिस्सा अधूरा है, इसलिए RSS के काम को लेकर उनकी आगे की टिप्पणी का पूरा विवरण सामने नहीं है। कुल मिलाकर अलवर में बिट्टा का संदेश राष्ट्र प्रथम, तिरंगे के सम्मान और ‘वंदे मातरम’ के प्रति प्रतिबद्धता पर केंद्रित रहा।