New Delhi. नई दिल्ली। साल 2025 का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण आज रात लग चुका है, जो खास तौर पर खगोलीय और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह चंद्र ग्रहण कुंभ राशि और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में घटित हुआ है। भारतीय समयानुसार, चंद्र ग्रहण रात 09 बजकर 58 मिनट से प्रारंभ होकर देर रात 01 बजकर 26 मिनट तक रहेगा। यह ग्रहण इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसके साथ 122 वर्षों बाद पितृपक्ष का महासंयोग बना है। वैज्ञानिकों और ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इस दौरान विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है, खासतौर पर बच्चों, वृद्धजनों और गर्भवती महिलाओं को।
🔭 ‘ब्लड मून’ का अद्भुत दृश्य
देश के विभिन्न हिस्सों में चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा लाल रंग में दिखाई दिया, जिसे ‘ब्लड मून’ कहा जाता है। केरल के तिरुवनंतपुरम में रात के समय आसमान में लाल चंद्रमा का दृश्य बिल्कुल साफ दिखाई दिया। वहीं पश्चिम बंगाल के कोलकाता में भी यह नजारा देखने को मिला। खगोलविदों के अनुसार, जब पृथ्वी सूर्य की रोशनी को रोक देती है, तो वातावरण में मौजूद धूल, गैस और अन्य कण केवल लाल किरणों को चंद्रमा तक पहुंचने देते हैं। इसी वजह से चंद्रमा लाल रंग का दिखाई देता है।
यह घटना न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से अद्भुत है, बल्कि इसे धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से भी विशेष माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि चंद्र ग्रहण को नग्न आंखों से देखा जा सकता है और इसके लिए किसी खास प्रोटेक्टिव ग्लास या फिल्टर की जरूरत नहीं होती। हालांकि, तेज चमकदार रोशनी से आंखों को बचाकर रखें क्योंकि सूर्य ग्रहण के दौरान तेज रेडिएशन से आंखों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है।
📿 धार्मिक मान्यताएं और उपाय
धार्मिक मान्यता के अनुसार चंद्र ग्रहण के समय जागकर भजन, कीर्तन और मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है। गुरु मंत्र का जाप करने के अलावा भगवान विष्णु के मंत्र ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ और भगवान शिव के मंत्र ‘ओम नम: शिवाय’ का उच्चारण विशेष लाभकारी माना जाता है। ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि इस दौरान मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है, जिससे ग्रह दोषों से राहत मिलती है।
चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद ‘मोक्ष काल’ में दान करने की परंपरा है। इस बार ग्रहण का मोक्ष काल रात 2 बजकर 24 मिनट पर होगा। इस समय गरीबों को चावल, दूध, चीनी, घी, वस्त्र या सामर्थ्य के अनुसार धन का दान करना शुभ माना गया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, दान करने से ग्रह दोष कम होते हैं और पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।
🚸 सावधानियां
धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों ही दृष्टि से चंद्र ग्रहण के दौरान सावधानी बरतना आवश्यक बताया गया है। बच्चों, वृद्धजनों और गर्भवती महिलाओं को विशेष सतर्क रहने की सलाह दी गई है। कहा गया है कि ग्रहण के समय बाहर निकलने से बचें और अनावश्यक जोखिम न लें। इसके अलावा मानसिक शांति बनाए रखने के लिए परिवार के साथ समय बिताएं और धार्मिक गतिविधियों में शामिल हों।
📡 विज्ञान और अध्यात्म का संगम
इस चंद्र ग्रहण ने एक बार फिर विज्ञान और अध्यात्म के मेल को उजागर किया है। वैज्ञानिक दृष्टि से यह घटना पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा की विशेष स्थिति के कारण घटित होती है। वहीं धार्मिक दृष्टि से इसे पितृ पक्ष के महासंयोग और ग्रह दोषों से मुक्ति का अवसर माना जाता है। ऐसे में दोनों दृष्टियों को संतुलित रखते हुए ग्रहण का लाभ उठाना चाहिए।