पेड़ों से समय से पहले झड़ रहे पत्ते, पांच हजार करोड़ की आर्थिकी पर प्रभाव
शिमला। हिमाचल प्रदेश के सेब बागीचों पर इस बार एक और संकट गहराने लगा है। पहले मौसम की मार और कम उत्पादन से जूझ रहे बागबान अब अल्टरनेरिया और मार्सोनिना जैसे फफूंद जनित रोगों के बढ़ते प्रकोप से परेशान हैं। शिमला जिला के रोहड़ू, जुब्बल और कोटखाई क्षेत्रों में यह बीमारी तेजी से फैल रही है, जबकि किन्नौर और कुल्लू के कुछ इलाकों से भी इसके लक्षण सामने आने लगे हैं। रोग के कारण सेब के पेड़ों की पत्तियां समय से पहले पीली होकर झड़ रही हैं, जिससे फलों का विकास प्रभावित हो रहा है और उत्पादन घटने की आशंका बढ़ गई है। बागबानों का कहना है कि इस बार पहले ही सेब की फसल अपेक्षा से कम है। ऐसे में पत्तियों के झडऩे से पेड़ों की प्रकाश संश्लेषण क्षमता घट रही है और फलों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पा रहा। इसका सीधा असर सेब के आकार, रंग और गुणवत्ता पर पड़ रहा है।
भारतीय किसान संघ के प्रदेशाध्यक्ष एवं प्रगतिशील बागबान सुरेश ठाकुर ने सरकार से इस बीमारी को गंभीरता से लेने की मांग की है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सेब करीब पांच हजार करोड़ रुपए का योगदान देता है और लाखों लोगों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है। सुरेश ठाकुर ने बताया कि रोहड़ू और आसपास के जंगलों में उगने वाले फेकड़े (जंगली पौधे) पर भी इस रोग का व्यापक प्रकोप दिखाई दे रहा है। बागबानों ने बागबानी विभाग, डॉ. वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी तथा कृषि विज्ञान केंद्रों से प्रभावित क्षेत्रों का तत्काल दौरा कर वैज्ञानिक सलाह, प्रभावी दवा और रोग प्रबंधन की विस्तृत एडवाइजरी जारी करने की मांग की है। अल्टरनेरिया लीफ स्पॉट में शुरुआत में पत्तियों पर छोटे-छोटे काले या गहरे भूरे धब्बे बनते हैं। बाद में ये धब्बे गोलाकार होकर बुल्स-आई जैसे दिखाई देने लगते हैं।