नगरोटा बगवां में कानून-व्यवस्था चरमराई, विकास कार्यों में अनियमितताओं

Update: 2026-08-01 11:23 GMT
नगरोटा बगवां। नगरोटा बगवां के पूर्व विधायक अरुण मेहरा ‘कूका’ ने आज आयोजित प्रेस वार्ता में प्रदेश सरकार, स्थानीय प्रशासन एवं स्थानीय विधायक की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठाते हुए कहा कि नगरोटा बगवां विधानसभा क्षेत्र में कानून-व्यवस्था, रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल तथा विकास कार्यों की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं के समाधान के बजाय सरकार केवल घोषणाओं और प्रचार तक सीमित रह गई है। इस अवसर पर भाजपा मंडल नगरोटा बगवां के अध्यक्ष सोनू चौधरी तथा भाजपा मंडल बड़ोह के अध्यक्ष अजीत राणा भी उपस्थित रहे।
अरुण मेहरा ने कहा कि पिछले लगभग दो महीनों से नगरोटा बगवां क्षेत्र में लगातार चोरी की घटनाएं हो रही हैं। आए दिन चोरी, चोरों के भागने अथवा पकड़े जाने की खबरें समाचार पत्रों और सोशल मीडिया की सुर्खियां बन रही हैं, लेकिन पुलिस अब तक ऐसा सुरक्षा वातावरण बनाने में सफल नहीं हुई है जिससे आम लोगों में विश्वास पैदा हो सके। हालात इतने चिंताजनक हैं कि गांव-गांव में लोग स्वयं रात के समय ठीकरी पहरे देने को विवश हैं। उन्होंने कहा कि जब जनता को अपनी सुरक्षा स्वयं करनी पड़े तो यह सरकार और प्रशासन की विफलता का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार की पहली जिम्मेदारी नागरिकों के जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करना होती है, लेकिन नगरोटा बगवां में लोग स्वयं अपने घरों और परिवारों की सुरक्षा करने को मजबूर हैं। सरकार को इस विषय को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।
पूर्व विधायक ने कांग्रेस सरकार की चुनावी गारंटियों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक पात्र महिला को प्रतिमाह ₹1500 देने का वादा प्रदेश की सबसे प्रमुख गारंटियों में शामिल था। नगरोटा बगवां विधानसभा क्षेत्र में लगभग 30 हजार महिलाओं से आवेदन पत्र भरवाए गए, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिल पाया। उन्होंने कहा कि माताओं, बहनों और बेटियों से किए गए वादे पूरे न होना सरकार की कथनी और करनी के अंतर को उजागर करता है।
अरुण मेहरा ने आरोप लगाया कि वर्तमान में क्षेत्र में चल रहे अधिकांश बड़े विकास कार्य पर्यटन परियोजनाओं से जुड़े हुए हैं, जिनकी टेंडर प्रक्रिया संदेह के घेरे में है। उन्होंने इन परियोजनाओं में करोड़ों रुपये की कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि यदि सब कुछ पारदर्शी है तो सरकार को जांच कराने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों से निकलने वाला प्रदूषित कचरा और गंदा पानी सीधे बनेर खड्ड में डाला जा रहा है, जिससे पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है तथा विशेष रूप से डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज टांडा और आसपास की पंचायतों के हजारों लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। उन्होंने इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप और जिम्मेदार एजेंसियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।
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