शिमला। एमसी हाउस में वाटर सप्लाई और पेयजल कंपनी की मनमानी को लेकर खासा हंगमा हुआ। इसको लेकर पार्षदों ने पानी की नियमित सप्लाई न देने के आरोप लगाए। इस मुददे पर हंगामे के बाद महापौर ने वाटर सप्लाई को लेकर पेयजल कंपनी को सभी 34 वार्डो का तीन महीने को एडवांस वाटर सप्लाई शेडयूल 15 दिन में जारी करने के आदेश दिए। इसके अलावा 15 दिनों में अंदर वाटर सप्लाई से जुडी तमाम वाटर बिल जारी करने, व्यवस्थाओं व योजनाओं की विस्तृत जानकारी व चर्चा के लिए स्पेशन हाउस बुलाने की बात कही। शिमला में अवैध भवनों के नियमितीकरण के लिए वन टाइम स्टेलमेंट की मांग के बाद अब एमसी पांच बिस्वा से कम भूमि पर बनें भवनों के लिए राहत लाने के प्रयास में है। हाउस में महापौर सुरेंद्र चौहान ने यह प्रस्ताव पेश किया। महापौर ने कहा कि यदि यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है तो एमसी की आय तो बढेगी साथ ही हजारो छोटे भवन मालिको को बड़ी राहत मिलेगी। इस प्रस्ताव पर सभी पार्षदों ने अपने सहमति दी। नगर निगम हाउस में 103 टनल के पास शौचालय बनाने को लेकर मंजूरी मिल गई है।
यहां पर नगर निगम शिमला 15.5 लाख से शौचायल बनाएगा। हाउस में भ_ाकुफर वार्ड के पार्षद नरेंद्र ठाकुर ने समाधान शिविर पूछा कि समाधान शिविर में कितनी शिकायतों का समाधान हो गया है और कितनी शिकायतें नगर निगम को मिली हैं। सदन के माध्यम से बताया शिविर के माध्यम से सभी वार्डों से 411 शिकायतें आई है, जिसमें से 66 शिकायतों का निपटारा कर दिया है। हाउस में कंगनाधार वार्ड के पार्षद राम रतन वर्मा ने सवाल उठाया कि ग्रीन फीस को लेकर हाउस में कई बार चर्चा हो गई है। लेकिन अभी तक इस ग्रीन फीस को लागू क्यों नहीं किया गया। इस पर मेयर सुरेंद्र चौहान ने बताया कि इसको लेकर पहले भी प्रदेश सरकार को प्रस्ताव भेजा था। लेकिन इस पर कोई आदेश नहीं हुए हैं। नगर निगम आयुक्त भूपेंद्र अत्री ने कहा कि ग्रीन फीस को लेकर पहले तो एनएचएआई ने जमीन देने से मना कर दिया। उसके बाद हमने ऑनलाइन सॉफ्टवेयर तैयार किया है। इसके तहत जो भी बाहरी राज्यों से वाहन आएंगे उन्हें वह सॉफ्टवेयर स्वयं ट्रैक करेगा और ऑनलाइन ही फीस काटेगा। इस सॉफ्टवेयर की हमने जांच कर ली है। ऐसे में इसकी जो खामियां थी वह भी पूरी कर दी हैं। सरकार की मंजूरी मिलने के बाद हम शहर में ग्रीन फीस लागू कर देंगे।