Holi स्पेशल | होलियों की धूम भारत के हर कोने में देखने को मिलती है, लेकिन नवाबों की होली का अंदाज सबसे अलग और शाही हुआ करता था। लखनऊ, अवध और भोपाल जैसे नवाबी राज्यों में होली केवल रंगों का नहीं, बल्कि नज़ाकत और नफासत का त्योहार हुआ करता था। मुजरों की महफिलें सजती थीं, शेर-ओ-शायरी होती थी, और गुलाब जल की फुहारों के साथ फूलों की बौछार की जाती थी।

कैसे मनाते थे नवाब होली?

  • मुजरों की महफिलें: होली के मौके पर नवाबों के दरबार में खास मुशायरों और मुजरों का आयोजन होता था। मशहूर तवायफें अपनी अदाओं और सुरों से रंग जमाती थीं।
  • गुलाब जल और केवड़े की खुशबू: रंगों की जगह इत्र, केवड़ा और गुलाब जल का छिड़काव किया जाता था, जिससे माहौल महक उठता था।
  • फूलों की होली: अबीर-गुलाल की जगह नवाबी होली में गुलाब, मोगरा और चमेली के फूलों की बौछार की जाती थी।
  • शाही दावतें: खास पकवान जैसे शाही टुकड़ा, फिरनी, कबाब और मिठाइयों का इंतजाम किया जाता था। ठंडाई और केसरिया दूध से मेहमानों का स्वागत होता था।
  • रंगीन किस्से-कहानियां: नवाब अपनी शायरी और किस्सों के जरिए होली को और भी दिलचस्प बना देते थे।

आज भले ही नवाबों का दौर खत्म हो गया हो, लेकिन उनकी होली की ये शाही रवायतें और कहानियां आज भी इतिहास के पन्नों में सुनहरी यादों की तरह दर्ज हैं।


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