इस्तीफे के बाद IAS दिव्या मित्तल ने तोड़ी चुप्पी, IAS नौकरी जिंदगी का सिर्फ एक चैप्टर’
IAS दिव्या मित्तल ने खोला इस्तीफे का राज
Delhi दिल्ली। उत्तर प्रदेश कैडर की चर्चित आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के प्रशासनिक सेवा से इस्तीफे ने एक बार फिर उन्हें चर्चा के केंद्र में ला दिया है। इस्तीफे के बाद अब दिव्या मित्तल ने इस फैसले को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका निर्णय किसी दबाव, विवाद या अचानक पैदा हुई परिस्थिति का नतीजा नहीं है, बल्कि लंबे समय तक सोच-विचार के बाद लिया गया फैसला है। दिव्या मित्तल ने अपने इस्तीफे को लेकर कहा कि आईएएस की नौकरी उनके जीवन का सिर्फ एक अध्याय है, पूरी जिंदगी नहीं। उन्होंने संकेत दिया कि अब वह परिवार के साथ समय बिताने के अलावा लेखन, शिक्षण और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में अपनी रुचियों को आगे बढ़ाना चाहती हैं।
परिवार और पुराने पैशन को प्राथमिकता
दिव्या मित्तल ने बताया कि उनके परिवार और दो बेटियों की जिम्मेदारियां भी उनके फैसले में महत्वपूर्ण भूमिका रखती हैं। उनका कहना है कि जीवन में कई ऐसे काम और रुचियां हैं, जिन्हें वह प्रशासनिक सेवा के दौरान पर्याप्त समय नहीं दे पा रही थीं। अब वह अपनी प्राथमिकताओं के अनुरूप आगे की दिशा तय करना चाहती हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस्तीफे के बाद उनकी अगली भूमिका को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। लेखन, शिक्षण और सामाजिक कार्य उनके संभावित क्षेत्रों में शामिल हैं।
पति भी छोड़ चुके हैं सरकारी सेवा
दिव्या मित्तल के इस्तीफे के साथ उनके पति और पूर्व आईएएस अधिकारी गगनदीप सिंह ढिल्लों भी चर्चा में हैं। गगनदीप ने वर्ष 2022 में वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय में संयुक्त महानिदेशक के पद से इस्तीफा दिया था। दोनों का करियर और भारत लौटकर सिविल सेवा में आने का सफर काफी दिलचस्प रहा है। दिव्या मित्तल और गगनदीप सिंह ढिल्लों दोनों ने विदेश में कॉरपोरेट क्षेत्र में काम किया था। दिव्या जेपी मॉर्गन में, जबकि गगनदीप सिटीग्रुप में कार्यरत रहे। विदेश में अच्छे करियर और आकर्षक पैकेज के बावजूद दोनों ने भारत लौटकर सिविल सेवा को अपना करियर बनाया।
दूसरे प्रयास में बनीं IAS
दिव्या मित्तल ने वर्ष 2012 में अपने दूसरे प्रयास में सिविल सेवा परीक्षा पास की और 68वीं रैंक हासिल की। इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश कैडर में प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालीं। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने मिर्जापुर, संत कबीर नगर और देवरिया जैसे जिलों में जिलाधिकारी के रूप में काम किया। बतौर जिलाधिकारी उनकी कार्यशैली को सख्त लेकिन संवेदनशील अधिकारी के तौर पर देखा गया। प्रशासनिक स्तर पर उनकी सक्रियता और जनता से जुड़ने के तरीके की वजह से वह सोशल मीडिया और आम लोगों के बीच भी काफी चर्चित रहीं।
अब जिंदगी के नए अध्याय की तैयारी
दिव्या मित्तल का कहना है कि सरकारी सेवा में रहना उनके जीवन का महत्वपूर्ण अनुभव रहा, लेकिन इसे वह अपनी पूरी पहचान नहीं मानतीं। इस्तीफे के बाद वह जीवन के नए अध्याय की ओर बढ़ने की तैयारी कर रही हैं। परिवार, लेखन, शिक्षण और समाज सेवा के क्षेत्र में उनकी संभावित सक्रियता पर अब लोगों की नजर रहेगी।