भुवनेश्वर। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के निर्देश पर राज्य सरकार ने दो वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है। मुख्यमंत्री ने दोनों अधिकारियों के निलंबन से संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। निलंबित किए गए दोनों अधिकारी अलग-अलग मामलों में गिरफ्तारी के बाद जेल में हैं। सरकारी सेवा नियमों के तहत निर्धारित अवधि से अधिक समय तक न्यायिक हिरासत में रहने के कारण उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है।

निलंबित अधिकारियों में वाणिज्य एवं परिवहन विभाग के अतिरिक्त सचिव अरुण कुमार बिश्वाल और कटक सर्किल जेल के वरिष्ठ अधीक्षक सुजीत कुमार राउल शामिल हैं। दोनों अधिकारियों की गिरफ्तारी अलग-अलग मामलों में हुई है और गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। इसके बाद राज्य सरकार के स्तर पर उनके खिलाफ विभागीय प्रक्रिया शुरू की गई और निलंबन का प्रस्ताव मुख्यमंत्री के पास मंजूरी के लिए भेजा गया।

मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी सूचना के मुताबिक, अरुण कुमार बिश्वाल की गिरफ्तारी के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया था। वह राज्य के वाणिज्य एवं परिवहन विभाग में अतिरिक्त सचिव के पद पर कार्यरत थे। गिरफ्तारी के बाद उनके लगातार न्यायिक हिरासत में रहने को देखते हुए सरकारी सेवा नियमों के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

इसी तरह कटक सर्किल जेल के वरिष्ठ अधीक्षक सुजीत कुमार राउल भी गिरफ्तारी के बाद न्यायिक हिरासत में हैं। वरिष्ठ पद पर कार्यरत अधिकारी के जेल में रहने के बाद उनके निलंबन से संबंधित प्रस्ताव तैयार किया गया। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने दोनों मामलों से संबंधित प्रस्तावों पर विचार करने के बाद निलंबन को मंजूरी दे दी।

सरकारी सेवा नियमों के अनुसार यदि कोई सरकारी अधिकारी गिरफ्तारी के बाद 48 घंटे से अधिक समय तक जेल या न्यायिक हिरासत में रहता है तो उसके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई का प्रावधान है। इसी नियम के तहत अरुण कुमार बिश्वाल और सुजीत कुमार राउल को निलंबित करने का फैसला लिया गया है। दोनों अधिकारियों के जेल में निर्धारित अवधि से अधिक समय तक रहने के बाद संबंधित विभागों की ओर से आवश्यक प्रक्रिया पूरी की गई।

राज्य सरकार की ओर से की गई कार्रवाई को प्रशासनिक नियमों के पालन से जोड़कर देखा जा रहा है। किसी अधिकारी के गिरफ्तारी के बाद लंबे समय तक न्यायिक हिरासत में रहने की स्थिति में उसके सरकारी पद पर बने रहने को लेकर सेवा नियमों में स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। इन्हीं नियमों के आधार पर संबंधित विभाग की ओर से निलंबन का प्रस्ताव तैयार किया गया और अंतिम स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री के पास भेजा गया।

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की मंजूरी मिलने के बाद दोनों वरिष्ठ अधिकारियों का निलंबन प्रभावी हो गया है। अब निलंबन की अवधि के दौरान दोनों अधिकारी अपने संबंधित पदों पर कार्य नहीं कर सकेंगे। उनके मामलों में आगे की स्थिति न्यायिक और विभागीय प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।

वाणिज्य एवं परिवहन विभाग में अतिरिक्त सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पर तैनात अरुण कुमार बिश्वाल के खिलाफ हुई कार्रवाई प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वहीं कटक सर्किल जेल के वरिष्ठ अधीक्षक सुजीत कुमार राउल के निलंबन के बाद जेल प्रशासन में भी संबंधित जिम्मेदारियों को लेकर आवश्यक प्रशासनिक व्यवस्था की जाएगी।

सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए निर्धारित सेवा नियमों में गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत से संबंधित परिस्थितियों के लिए अलग-अलग प्रावधान मौजूद हैं। इनमें 48 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रहने की स्थिति में निलंबन की कार्रवाई का प्रावधान भी शामिल है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि न्यायिक हिरासत में रहने के दौरान संबंधित अधिकारी अपने पद की जिम्मेदारियों का निर्वहन न करे।

मुख्यमंत्री कार्यालय की सूचना के मुताबिक दोनों अधिकारियों के मामले अलग-अलग हैं, लेकिन उनकी गिरफ्तारी और उसके बाद न्यायिक हिरासत में रहने के कारण निलंबन की कार्रवाई समान सेवा नियम के तहत की गई है। राज्य सरकार ने दोनों मामलों में निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन करते हुए प्रस्ताव मुख्यमंत्री के सामने रखा था।

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी द्वारा प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के बाद अब दोनों अधिकारी निलंबित रहेंगे। हालांकि निलंबन को अंतिम दंड के रूप में नहीं देखा जाता। संबंधित मामलों में न्यायिक प्रक्रिया और अन्य विभागीय कार्रवाई अपने स्तर पर जारी रह सकती है। आगे की कार्रवाई मामलों की स्थिति और सक्षम अधिकारियों के निर्णय के आधार पर होगी।

इस कार्रवाई के साथ राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि सरकारी अधिकारियों के मामले में लागू सेवा नियमों के अनुसार कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल वाणिज्य एवं परिवहन विभाग के अतिरिक्त सचिव अरुण कुमार बिश्वाल और कटक सर्किल जेल के वरिष्ठ अधीक्षक सुजीत कुमार राउल न्यायिक हिरासत में हैं और मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद दोनों को उनके पदों से निलंबित कर दिया गया है।

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