प्राकृतिक खेती से आत्मनिर्भर बने शिमला के डीडी कश्यप

Update: 2025-04-28 12:26 GMT
Shimla. शिमला। जिला शिमला के शिमला ग्रामीण उपमंडल के अंतर्गत पाहल गांव के निवासी दुर्गा दत्त कश्यप ने प्राकृतिक खेती कर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है, जो आज अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा का स्त्रोत बने है। डीडी कश्यप आज प्राकृतिक खेती से लगभग 116 प्रकार की खाद्य फसलें उगा रहे हैं, जिससे वह घर की आवश्यकता वाली अधिकतर चीजें प्राकृतिक खेती से पैदा कर रहे हैं। बाजार से वह बहुत कम चीजें खरीदते हैं। डीडी कश्यप कहते हैं कि वह आज सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर निर्भर नहीं है क्योंकि रोजमर्रा की सारी चीजें उन्हें अपनी जमीन से ही मिल रही हैं। दुर्गा दत्त कश्यप वर्ष 2015 में हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड से उप मंडलीय अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए है। उन्होंने 2015 से लेकर 2024 तक भारत सरकार की नवरत्न कंपनी वाप्कोस में सलाहकार अभियंता के रूप में कार्य किया। दुर्गा दत्त कश्यप ने कहा कि 2015 में हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड से सेवानिवृत होने के पश्चात् उन्होंने अपनी पुश्तैनी जमीन को दोबारा से उपजाऊ बनाने का संकल्प
लिया।


प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए उन्होंने गूगल, यूट्यूब एवं बहुत सी किताबों का सहयोग लिया। प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक खेती से उगाए गई मक्की पर पूरे भारत वर्ष में सबसे अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रदान किया है। इसी के मध्यनजर इस वित्त वर्ष में प्राकृतिक खेती से तैयार की गई मक्की का समर्थन मूल्य 30 रुपए से बढ़ाकर 40 और गेहूं को 40 से बढ़ाकर 60 रपअ प्रति किलो करने की घोषणा की गई है। इसके अतिरिक्त प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए अन्य महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए है, जिससे प्रदेश के किसानों को आवश्यक रूप से लाभ प्राप्त होगा। डीडी कश्यप ने कहा कि प्राकृतिक खेती से जुडऩे का दूसरा कारण आज के समय में फल सब्जियों को उगाने में रसायन व केमिकल का उपयोग है जो हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इस जहर से मुक्ति के लिए उन्होंने प्राकृतिक खेती को अपनाया। जिला स्तरीय किसान मेले में मिला सम्मान इस वर्ष जिला स्तरीय किसान मेले का आयोजन बनूटी में किया गया। जिसमें प्राकृतिक खेती में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए डीडी कश्यप को सम्मानित किया गया था।
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