काले कपड़े पहनकर कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर बोला हमला, अनोखा विरोध प्रदर्शन, VIDEO
CJP के प्रदर्शन को कांग्रेस ने किया हाईजैक?
नई दिल्ली: नीट परीक्षा में धांधली और देश भर में हो रहे पेपर लीक के मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार को घेरने के लिए कांग्रेस ने बड़ा फैसला लिया है. राहुल-प्रियंका गांधी समेत कांग्रेसी सांसद और अन्य विपक्षी दलों के सांसद काले कपड़े पहनकर संसद भवन पहुंच गए हैं, जहां वह सरकार और शिक्षा मंत्री के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं.
बताया ज रहा है कि कांग्रेस के इस बड़े विरोध प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य युवाओं और छात्रों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना और कड़ा संदेश देना है. पार्टी सांसदों ने एक साथ एकजुट होकर विरोध जताने की रणनीति बनाई है.
कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने बताया कि सभी विपक्षी सांसद प्रदर्शनकारी छात्रों और सांसदों पर पुलिस के इस्तेमाल के विरोध में काले कपड़े पहनकर आए हैं.उन्होंने कहा कि विपक्ष चाहता है कि सरकार हठ छोड़कर छात्रों से संवाद करे और पूरी शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करे.
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने 20 जुलाई को छात्रों पर हुए लाठीचार्ज पर कड़ा आक्रोश जताया. उन्होंने आरोप लगाया कि बिना नेम टैग वाले लोग आकर हमला करते हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या विपक्ष और नेता प्रतिपक्ष इस बर्बरता पर चुप बैठे रहें और अपनी आवाज न उठाएं.
CJP के प्रदर्शन को कांग्रेस ने किया हाईजैक
21 जुलाई की दोपहर साढ़े तीन बजे. राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे कुछ कांग्रेसी नेताओं के साथ पैदल ही पीएम मोदी के आवास की तरफ चल दिए. न पुलिस को खबर थी, न मीडिया को. हालांकि 3 घंटे 20 मिनट बाद ही पुलिस ने बलपूर्वक राहुल-प्रियंका को उठाकर धरना खत्म करा दिया है.
कॉकरोच जनता पार्टी ने 20 जून से जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट शुरू किया था. इसमें आम आदमी पार्टी, TMC सहित कई विपक्षी दलों के नेता शामिल होने पहुंचे, लेकिन कांग्रेस ने दूरी बनाए रखी. एक्सपर्ट्स के मुताबिक कांग्रेस को लगता था कि कॉकरोच पार्टी कांग्रेस से पेपर लीक जैसा अहम मुद्दा छीन सकती है.
मानसून सत्र शुरू होने से पहले कांग्रेस संसदीय दल की बैठक के बाद कॉकरोच पार्टी को लेकर कांग्रेस का रुख नरम पड़ा. 17 जुलाई को राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा जंतर-मंतर जाकर सोनम वांगचुक से मिले.
20 जुलाई को मानसून सत्र शुरू होन से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कमरे में बैठक हुई थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसमें भी कांग्रेस ने तय किया कि संसद में राम मंदिर के मुद्दे को उठाना चाहिए, NEET और CJP के आंदोलन को नहीं.
20 जुलाई की दोपहर जैसे ही CJP का प्रोटेस्ट जोर पकड़ने लगा, कांग्रेस के रुख में भी बदलाव आ गया. पीएम मोदी के आवास के बाहर धरने की प्लानिंग कांग्रेस ने बेहद सीक्रेट तरीके से की.रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस नेताओं को मल्लिकार्जुन खड़गे के जन्मदिन की बधाई देने के लिए उनके आवास पर बुलाया गया. खड़गे का घर पीएम मोदी के आवास के करीब है. दोपहर 3:30 बजे पैदल ही पीएम आवास की तरफ निकले और धरने पर बैठ गए. देखते ही देखते केरल सीएम वीडी सतीशन, कर्नाटक सीएम डीके शिवकुमार भी प्रोटेस्ट में पहुंच गए. केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह सरकार की तरफ से राहुल गांधी से बात करने पहुंचे. हालांकि बात नहीं बनी. आखिरकार पुलिस ने बलपूर्वक उन्हें हटा दिया.
जंतर-मंतर पर छात्रों के समर्थन में आम आदमी पार्टी (AAP) का प्रदर्शन चल रहा था, जबकि दूसरी ओर राहुल गांधी प्रधानमंत्री आवास की ओर विरोध-प्रदर्शन के लिए पहुंच गए. इसे लेकर आम आदमी पार्टी ने नाराजगी जताई. AAP का कहना था कि जब छात्रों का प्रदर्शन जंतर-मंतर पर हो रहा है, तो राहुल गांधी को उसी मंच पर पहुंचकर छात्रों का समर्थन करना चाहिए था. पार्टी नेताओं का सवाल था कि छात्रों के मुद्दे पर अलग-अलग प्रदर्शन करने के बजाय विपक्ष को एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए. इसी मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस और राहुल गांधी के रुख पर सवाल खड़े किए.
देश में शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा घोटालों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब दिल्ली से निकलकर पूरे देश में फैल गया है. जंतर-मंतर से शुरू हुआ यह प्रदर्शन अब देश के कई राज्यों में फैल चुका है. छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और सामाजिक संगठनों के साथ अब कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल भी इसमें शामिल हो गए हैं. संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ, जिसमें राहुल गांधी को भी हिरासत में लिया गया. इस घटना के बाद राजनीतिक माहौल और गरम हो गया है.
बता दें कि आंदोलन की शुरुआत जंतर-मंतर से हुई थी, लेकिन बीते कुछ दिनों में इसका दायरा कई राज्यों तक पहुंच गया. सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की. पुलिस ने बैरिकेड लगाकर उन्हें रोक दिया, जिसके बाद कई जगह धक्का-मुक्की और लाठीचार्ज हुआ. पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया. सोशल मीडिया पर घायल छात्रों की तस्वीरें और वीडियो वायरल हुए, जिससे देशभर में बहस छिड़ गई.
इसके बाद कांग्रेस ने सरकार पर विरोध को दबाने का आरोप लगाया. राहुल गांधी समेत पार्टी के कई बड़े नेता प्रदर्शनकारियों के समर्थन में उतरे. दिल्ली में विरोध के दौरान राहुल गांधी को पुलिस ने हिरासत में लिया, जिसके बाद कांग्रेस ने इसे छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश बताया. सरकार ने पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष छात्रों के मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहा है.
संसद के मानसून सत्र में भी यह मुद्दा गूंजा. विपक्ष ने शिक्षा व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार को घेरा, जबकि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने विपक्ष पर छात्रों को मोहरा बनाने का आरोप लगाया. दिल्ली के बाहर भी प्रदर्शन तेज हुए. अहमदाबाद में करीब 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया. जंतर-मंतर पर प्रदर्शन अब भी जारी है और आयोजकों ने मांगें पूरी होने तक आंदोलन न रोकने की बात कही है.