Delhi दिल्ली: ईरान-अमेरिका तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती चिंता के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सवाल फिर उठने लगे हैं। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85-90 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है और इसमें बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। होर्मुज जलडमरूमध्य से भारत के कुल आयातित कच्चे तेल का करीब 30 फीसदी गुजरता है।
सरकारी आंकड़ों और ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के पास फिलहाल रणनीतिक और वाणिज्यिक भंडार मिलाकर लगभग 70 से 75 दिनों की तेल जरूरत पूरी करने लायक स्टॉक मौजूद माना जाता है। इसमें इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियों के पास मौजूद कमर्शियल स्टॉक भी शामिल है। भारत ने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार के लिए Indian Strategic Petroleum Reserves Limited के जरिए विशाखापट्टनम, मंगलुरु और पाडुर में बड़े भूमिगत भंडार बनाए हैं। सरकार लगातार इनके विस्तार पर भी काम कर रही है।
भारत को रोजाना करीब 55 लाख बैरल कच्चे तेल की जरूरत होती है। अगर वैश्विक सप्लाई पूरी तरह प्रभावित होती है, तो शुरुआती दौर में देश के पास पर्याप्त रिजर्व मौजूद हैं, लेकिन लंबे समय तक संकट रहने पर कीमतों और सप्लाई दोनों पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अब रूस, अमेरिका, अफ्रीका और लैटिन अमेरिकी देशों से भी तेल खरीद बढ़ाकर सप्लाई स्रोतों में विविधता ला रहा है, ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो सके।
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