Alwar. अलवर। कॉकरोच की दादागिरी देखिये जो पुलिस वालो को धमकी दे रहा है कि हमने देश के शिक्षा मंत्री को हटवाया है। लेकिन खुद ये नहीं कह रहा है कि वो किस हैसियत से स्कूल में प्रवेश किया है और अब कॉकरोच पार्टी के ये नेता अपनी दादागिरी दिखाने में लगे हुए है। जनता ने विरोध किया तो उनको बाहर निकालने की बात कहते हुए उनका विरोध किया और खुद नहीं बता रहा कि उसे शाला में प्रवेश कैसे किया है। अभिजीत दीपके के बाद कॉकरोच राका की धमकी देखने को मिली है।
शासकीय स्कूल में घुसने की किसने इजाजत दी थी। किसी भी शासकीय स्कूल में किसी राजनीतिक कार्यक्रम का धरना प्रदर्शन करना सही है क्या, अगर शाला प्रवेश की अनुमति नहीं मिली तो बलात प्रवेश करने पर अपराध नहीं बनता है क्या?

कॉकरोच जनता पार्टी के सदस्य और गुर्गे उन राज्यों में नहीं जा रही जहां कांग्रेस-आप और
गठबंधन की सरकार
है। जैसे कि पंजाब, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर, झारखंड जहां सबसे ज्यादा नौकरी बेचीं जा रही है, युवाओ को ठगा जा रहा है पेपर लीक का काण्ड और खुलासे भी इन्ही राज्यों में लगातार होते आ रहा है। छात्र आंदोलित है महीनों से लेकिन वहां कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दीपके और एक नया कॉकरोच राका वहां कदम तक नहीं रख रहे है। क्योंकि उनको पता है कि जहां भाजपा की सरकार है उनको टारगेट किया जाए और देश के बड़े-बड़े नेताओं के लिए अभद्र गालियां निकाली जाए। कानून नाम का कोई चीज नहीं है जो ये कॉकरोच राका वीडियो में पुलिस वालों को गालियां दे रहा है क्या उसके खिलाफ अपराध दर्ज नहीं होना चाहिए। 

वीडियो में संबंधित व्यक्ति कथित तौर पर पुलिसकर्मियों को धमकी भरे अंदाज में कहता नजर आ रहा है कि उसने देश के शिक्षा मंत्री तक को हटवाने का दावा किया है। हालांकि, विवाद का मुख्य मुद्दा यह है कि आखिर वह किस अनुमति या अधिकार के तहत स्कूल परिसर में पहुंचा था। स्थानीय लोगों ने इसी सवाल को लेकर आपत्ति जताई और स्कूल परिसर में बाहरी लोगों के प्रवेश पर सवाल उठाए। बताया जा रहा है कि स्कूल में पहुंचने के बाद जब लोगों ने विरोध किया तो माहौल गर्म हो गया। लोगों ने संबंधित व्यक्ति से स्कूल में आने का कारण और अनुमति के संबंध में जानकारी मांगी। इस दौरान बहस की स्थिति बनी और लोगों ने नियमों का पालन करने की मांग की।


स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूल जैसे शिक्षण संस्थान में प्रवेश के लिए निर्धारित प्रक्रिया और अनुमति का पालन होना चाहिए। बिना अनुमति किसी भी व्यक्ति का स्कूल परिसर में पहुंचना सुरक्षा और अनुशासन के लिहाज से गंभीर विषय हो सकता है। लोगों ने प्रशासन से मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है। वहीं वायरल वीडियो में पुलिसकर्मियों के साथ बातचीत का तरीका भी चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का आरोप है कि कुछ राजनीतिक प्रभाव रखने वाले लोग अपने पद और पहचान का इस्तेमाल कर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं। हालांकि पूरे मामले में संबंधित व्यक्ति का पक्ष और वीडियो की सत्यता की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई लोगों ने स्कूल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और बाहरी लोगों के प्रवेश को लेकर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि शिक्षा संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा और अनुशासन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इस घटना के बाद पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर भी नजर बनी हुई है। यदि स्कूल में प्रवेश नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
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