नई दिल्ली। संसद के मॉनसून सत्र को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर बड़ा राजनीतिक हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोमवार को दावा किया कि संसद की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुए 25 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक सत्र का औपचारिक सत्रावसान नहीं किया गया है। उन्होंने इसे लेकर कहा कि सरकार ने मॉनसून सत्र को पिछले 25 दिनों से 'वेंटिलेटर' पर रखा हुआ है।
जयराम रमेश ने इसके पीछे परिसीमन से जुड़े विधेयकों को लेकर सरकार की कथित रणनीति होने का आरोप लगाया। उनका दावा है कि गृह मंत्री अमित शाह लोकसभा में जरूरी दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि यह कांग्रेस का राजनीतिक आरोप है और इसे सरकार की पुष्टि के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
25 दिन बाद भी सत्रावसान क्यों नहीं?
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि संसद को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए 25 दिन हो चुके हैं, लेकिन अभी तक उसका सत्रावसान नहीं किया गया।
उन्होंने दावा किया कि आम तौर पर संसद की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के तीन से चार दिन के भीतर सत्रावसान हो जाता है। इसी आधार पर उन्होंने मौजूदा स्थिति पर सवाल खड़ा किया।
संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई 2026 को शुरू हुआ था और 13 अगस्त को दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई थी।
क्या होता है सत्रावसान?
संसद की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होना और सत्रावसान दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। जब लोकसभा या राज्यसभा की बैठक को अगली तारीख तय किए बिना स्थगित किया जाता है तो इसे अनिश्चितकाल के लिए स्थगन कहा जाता है।
वहीं सत्रावसान के जरिए संसद के किसी सत्र को औपचारिक रूप से समाप्त किया जाता है। इसी अंतर को आधार बनाकर कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि सदनों की बैठक समाप्त होने के इतने दिनों बाद भी मॉनसून सत्र को औपचारिक रूप से खत्म क्यों नहीं किया गया।
परिसीमन विधेयक से जोड़ा मामला
जयराम रमेश ने दावा किया कि सरकार मॉनसून सत्र का सत्रावसान इसलिए नहीं कर रही क्योंकि गृह मंत्री अमित शाह लोकसभा में परिसीमन से संबंधित विधेयकों को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश में हैं।
उन्होंने इस कथित बहुमत के लिए बेहद तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया। कांग्रेस नेता का आरोप है कि सरकार अपनी संख्या मजबूत करने के लिए राजनीतिक दबाव की रणनीति अपना रही है।
फिलहाल कांग्रेस के इस दावे को लेकर सरकार की ओर से ऐसी पुष्टि सामने नहीं आई है जिससे यह स्थापित हो कि सत्रावसान में देरी का कारण परिसीमन विधेयक ही है।
2015 का उदाहरण भी दिया
जयराम रमेश ने अपने दावे के समर्थन में वर्ष 2015 के मॉनसून सत्र का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने और सत्रावसान के बीच 28 दिन का अंतर रहा था।
कांग्रेस नेता के मुताबिक 2015 का मॉनसून सत्र ललित मोदी से जुड़े विवाद के कारण काफी हद तक बाधित रहा था। उनका दावा है कि तत्कालीन सरकार जीएसटी से संबंधित विधेयकों को पारित कराना चाहती थी और इसके लिए राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत थी।
रमेश के अनुसार सरकार के पास जरूरी संख्या नहीं होने के कारण उसे विपक्ष के साथ बातचीत करनी पड़ी और जीएसटी से संबंधित संवैधानिक बदलाव बाद में आगे बढ़ सके।
अमित शाह से पूछा तीखा सवाल
जयराम रमेश ने गृह मंत्री अमित शाह को सीधे निशाने पर लेते हुए उनकी राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि गृह मंत्री आखिर कब इस वास्तविकता को स्वीकार करेंगे कि कथित रूप से 'धमकी और डराने-धमकाने' वाली उनकी राजनीति अपनी सीमा तक पहुंच चुकी है।
यह टिप्पणी कांग्रेस और भाजपा के बीच बढ़ते राजनीतिक टकराव को दिखाती है। विपक्ष पहले से सरकार पर संसदीय प्रक्रियाओं और विभिन्न राजनीतिक मुद्दों को लेकर हमलावर है।
अब सरकार के जवाब का इंतजार
कांग्रेस के आरोप के बाद मुख्य सवाल यही है कि मॉनसून सत्र का सत्रावसान इतने दिनों बाद भी क्यों नहीं हुआ। हालांकि लंबे अंतराल का उदाहरण पहले भी मौजूद है, जैसा कि खुद जयराम रमेश ने 2015 के मामले का उल्लेख किया है।
फिलहाल परिसीमन विधेयक और दो-तिहाई बहुमत को लेकर कांग्रेस ने जो कारण बताया है, वह पार्टी का दावा है। सरकार की ओर से आधिकारिक जवाब आने पर ही सत्रावसान में देरी के वास्तविक कारण को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी।