गायक Zubeen Garg की याद में, सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने किया रक्तदान

मुख्यमंत्री

Update: 2025-11-18 16:03 GMT
Assam असम: लोकप्रिय और दिवंगत गायक जुबीन गर्ग की याद में सोमवार को पूरे राज्य में विशेष भावुकता देखने को मिली। उनके 53वें जन्मदिन के अवसर पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गुवाहाटी में रक्तदान कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जुबीन गर्ग मात्र एक गायक नहीं, बल्कि असम की संस्कृति, भाषा और युवाओं की आकांक्षाओं की आवाज थे। राज्य सरकार ने उनके जन्मदिन पर अनेक रक्तदान शिविर आयोजित कर ‘जुबीन दा’ के प्रति सम्मान व्यक्त किया। असम की संगीत दुनिया के सबसे चमकते सितारों में शामिल रहे जुबीन गर्ग का निधन पूरे राज्य के लिए एक गहरा झटका था। उनकी जन्मतिथि पर आयोजित कार्यक्रमों में लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। गुवाहाटी के साथ-साथ जोरहाट, तेजपुर, डिब्रूगढ़ और सिलचर सहित राज्यभर के कई जिलों में ब्लड डोनेशन कैंप लगाए गए। सामाजिक संगठनों, युवाओं और प्रशंसकों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लेकर यह संदेश दिया कि जुबीन दा की लोकप्रियता और उनका मानवीय संदेश आज भी उतना ही प्रभावशाली है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने रक्तदान शिविर में कहा कि जुबीन गर्ग का संगीत न केवल असम बल्कि पूरे पूर्वोत्तर और देश भर के लोगों के दिलों में बसता है। उन्होंने कहा, “जुबीन दा असम के भावनात्मक धरोहर थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में समाज, संस्कृति और युवा पीढ़ी को प्रेरित करने का कार्य किया। आज उनके जन्मदिन पर रक्तदान कर मैं उन्हें श्रद्धांजलि देता हूं।” सरमा ने यह भी कहा कि राज्य सरकार असम के सांस्कृतिक जगत में उनकी अमूल्य देन को सम्मानित करने के लिए विभिन्न कदम उठा रही है। इस मौके पर आयोजित रक्तदान शिविर में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने रक्तदान किया। चिकित्सा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सिर्फ गुवाहाटी में ही दिनभर लगे शिविरों में सैकड़ों यूनिट रक्त एकत्र किया गया। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि राज्यभर में आयोजित इन शिविरों से बड़ी मात्रा में रक्त संग्रहित हुआ है, जो आने वाले दिनों में जरूरतमंद मरीजों के जीवन को बचाने में मददगार होगा।
जुबीन गर्ग, जिन्हें लोग प्रेम से ‘जुबीन दा’ कहते थे, असमिया संगीत जगत की एक ऐसी आवाज थे जिन्होंने पारंपरिक धुनों और आधुनिक संगीत को मिलाकर एक नया युग रचा। 1990 के दशक में अपने करियर की शुरुआत के बाद उन्होंने न केवल असमिया संगीत बल्कि हिंदी फिल्मों में भी अपनी आवाज का जादू बिखेरा। उनका गीत ‘या अली’ आज भी देशभर में लोकप्रिय है। उनकी बहुमुखी प्रतिभा और सामाजिक सरोकार ने उन्हें एक महान कलाकार के साथ-साथ जनप्रिय व्यक्तित्व भी बनाया। जुबीन गर्ग के नाम पर आयोजित इस रक्तदान कार्यक्रम में कई कलाकारों, गीतकारों और सामाजिक व्यक्तियों ने भी भाग लिया। उन्होंने कहा कि जुबीन गर्ग की याद में ऐसे कार्यक्रम आयोजित करते रहना चाहिए ताकि समाज सेवा और मानवता के प्रति उनकी सोच को आगे बढ़ाया जा सके। उनकी पत्नी और परिवार ने भी संदेश जारी करते हुए प्रशंसकों को धन्यवाद दिया।
राज्य सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि जुबीन गर्ग की याद में हर वर्ष इसी तरह के सामाजिक कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि सरकार जल्द ही जुबीन गर्ग की स्मृति में एक सांस्कृतिक अनुसंधान केंद्र और संगीत संस्थान स्थापित करने पर विचार कर रही है। इससे युवा कलाकारों को मंच मिलेगा और जुबीन दा के योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जा सकेगा। जुबीन गर्ग की लोकप्रियता आज भी असम और पूर्वोत्तर में उसी तरह कायम है। उनके जन्मदिन पर पूरे राज्य में फैली भावनात्मक लहर ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि सच्चे कलाकार कभी नहीं मरते—वे अपनी कला, अपने गीतों और अपनी सामाजिक सोच के जरिए हमेशा जीवित रहते हैं।
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