दिल्ली में मिनी मकोका का खौफ गैंग्स पर शिकंजा 1232 बदमाश गिरफ्तार
मिनी मकोका से गैंग्स में हड़कंप दिल्ली में ताबड़तोड़ एक्शन
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में संगठित अपराध और आपराधिक गिरोहों पर शिकंजा कसने के लिए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की दो धाराओं का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। इन प्रावधानों को अपराध जगत में 'मिनी-मकोका' के तौर पर भी देखा जा रहा है। दिल्ली पुलिस ने इनके तहत गैंग से जुड़े मामलों में कार्रवाई तेज की है और अब तक 1,232 आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने की बात सामने आई है। दिल्ली में गैंगवार, रंगदारी, लूट, वाहन चोरी और दूसरे संगठित अपराध लंबे समय से चुनौती बने हुए हैं। ऐसे मामलों में गिरोह के केवल एक सदस्य को पकड़ने के बजाय पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई करने के लिए BNS के संगठित अपराध से जुड़े प्रावधानों का सहारा लिया जा रहा है।
BNS की धारा 111 और 112 का इस्तेमाल
भारतीय न्याय संहिता की धारा 111 संगठित अपराध से संबंधित है। इसमें अपराध सिंडिकेट द्वारा किए जाने वाले गंभीर और लगातार आपराधिक कृत्यों के लिए कड़े दंड का प्रावधान है। वहीं धारा 112 छोटे संगठित अपराध से संबंधित है। इसमें समूह या गिरोह बनाकर चोरी, स्नैचिंग, धोखाधड़ी और इसी तरह के कुछ अपराध करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की व्यवस्था है। इन दोनों प्रावधानों के कारण पुलिस को गैंग के पूरे नेटवर्क, उसके सदस्यों और संगठित तरीके से किए जा रहे अपराधों पर कार्रवाई का कानूनी आधार मिलता है। इसी वजह से इन्हें बोलचाल में 'मिनी-मकोका' कहा जा रहा है। हालांकि यह कोई आधिकारिक कानूनी नाम नहीं है।
1232 आरोपियों की गिरफ्तारी
सामने आए आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में इन प्रावधानों के तहत अब तक 1,232 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। कार्रवाई का उद्देश्य बार-बार अपराध करने वाले गिरोहों और उनके नेटवर्क को तोड़ना है। पुलिस ऐसे मामलों में आरोपियों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और आपस में उनके संबंधों की भी पड़ताल करती है। संगठित अपराध के मामलों में गैंग के आर्थिक नेटवर्क को समझना भी महत्वपूर्ण होता है। अपराध से अर्जित रकम कहां इस्तेमाल हुई और गिरोह को संसाधन उपलब्ध कराने में किन लोगों की भूमिका रही, जैसे पहलुओं की जांच आगे की कार्रवाई में अहम हो सकती है।
गैंग्स के नेटवर्क पर फोकस
दिल्ली पुलिस की रणनीति केवल वारदात के बाद आरोपी को पकड़ने तक सीमित नहीं है। कोशिश ऐसे गिरोहों की पूरी संरचना को चिन्हित करने की है जो लगातार अपराध में शामिल रहते हैं। डिजिटल साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी जानकारी ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
BNS के नए प्रावधानों के इस्तेमाल से राजधानी में संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई का दायरा बढ़ा है। हालांकि किसी भी आरोपी का अपराध अदालत में साक्ष्यों के आधार पर ही साबित होता है। फिलहाल 1,232 गिरफ्तारियों का आंकड़ा इस बात का संकेत है कि दिल्ली में संगठित और छोटे संगठित अपराध के खिलाफ इन धाराओं का व्यापक इस्तेमाल किया जा रहा है। आने वाले समय में इन मामलों में दाखिल आरोपपत्र और अदालतों के फैसले इन प्रावधानों के वास्तविक प्रभाव की तस्वीर और स्पष्ट करेंगे।