दिल्ली : आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पार्टी के नेताओं के चयन और उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देने के मामले में अब ज्यादा सतर्कता बरतने की तैयारी कर रहे हैं। पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों के पाला बदलकर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद केजरीवाल ने कहा है कि भविष्य में किसी भी नेता को राज्यसभा भेजने से पहले उसकी पूरी तरह जांच-पड़ताल की जाएगी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि पार्टी अब उम्मीदवार को “सौ बार ठोक-बजाकर” देखने के बाद ही राज्यसभा का टिकट देगी।

केजरीवाल ने यह बयान गोवा में आयोजित एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान दिया। यहां आम आदमी पार्टी और गोवा फॉरवर्ड पार्टी ने वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अपने गठबंधन की घोषणा की। इस गठबंधन को ‘गोवा फर्स्ट’ नाम दिया गया है। कार्यक्रम में दल-बदल से जुड़े सवाल पर केजरीवाल ने राघव चड्ढा और छह अन्य राज्यसभा सांसदों के पार्टी छोड़ने की घटना का उल्लेख किया। उन्होंने इसे आम आदमी पार्टी के लिए बड़ा सबक बताया।

आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने वाले सात राज्यसभा सदस्यों में राघव चड्ढा, हरभजन सिंह, स्वाती मालीवाल, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, राजेंद्र गुप्ता और विक्रमजीत सिंह साहनी शामिल थे। इनमें से ज्यादातर सांसद पंजाब से राज्यसभा पहुंचे थे। सात सांसदों के एक साथ पाला बदलने से संसद के उच्च सदन में आम आदमी पार्टी की ताकत दस से घटकर तीन सदस्यों तक सीमित हो गई। वहीं भाजपा की राज्यसभा में संख्या बढ़ी और सदन का राजनीतिक समीकरण भी उसके पक्ष में मजबूत हुआ।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि राज्यसभा के इन सदस्यों को जनता ने सीधे नहीं चुना था, बल्कि आम आदमी पार्टी ने उन्हें सदन में भेजा था। इसके बावजूद उन्होंने पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। केजरीवाल के मुताबिक, इस घटनाक्रम ने पार्टी को उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर किया है। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में केवल राजनीतिक प्रभाव, लोकप्रियता या पेशेवर उपलब्धियों के आधार पर राज्यसभा का टिकट नहीं दिया जाएगा। पार्टी के प्रति निष्ठा और सार्वजनिक जीवन के पिछले रिकॉर्ड की भी बारीकी से समीक्षा की जाएगी।

केजरीवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने जनता से कभी विश्वासघात नहीं किया। पार्टी के सामने कई बार कठिन परिस्थितियां पैदा हुईं और उसके नेताओं पर दबाव बनाने की कोशिश हुई, लेकिन उसके निर्वाचित विधायक डटे रहे। उन्होंने दावा किया कि विधायकों को तोड़ने के प्रयासों के बावजूद बड़ी संख्या में नेताओं ने पार्टी का साथ नहीं छोड़ा। हालांकि राज्यसभा सांसदों के मामले में पार्टी को बड़ा झटका लगा, जिसे अब संगठनात्मक सुधार के अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

सात सांसदों के भाजपा में जाने के बाद आम आदमी पार्टी में आंतरिक स्तर पर भी कई सवाल उठे थे। सबसे बड़ा सवाल राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन को लेकर था। पार्टी ने अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाली चर्चित हस्तियों, शिक्षाविदों, कारोबारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को संसद के उच्च सदन में भेजा था। लेकिन एक साथ सात सदस्यों के जाने से इस रणनीति की सफलता पर सवाल खड़े हो गए। अब पार्टी नेतृत्व उम्मीदवारों की राजनीतिक प्रतिबद्धता और संगठन से उनके जुड़ाव को अधिक महत्व दे सकता है।

इस घटनाक्रम का सबसे अधिक राजनीतिक असर पंजाब में पड़ने की संभावना है। दिल्ली की सत्ता गंवाने के बाद पंजाब देश का एकमात्र राज्य है जहां आम आदमी पार्टी की सरकार है। राघव चड्ढा और हरभजन सिंह समेत पार्टी छोड़ने वाले कई सांसद पंजाब से ही राज्यसभा पहुंचे थे। ऐसे में अगले विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा इन नेताओं के जरिए प्रदेश में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर सकती है। दूसरी ओर आम आदमी पार्टी को अपने कार्यकर्ताओं का भरोसा बनाए रखने और संगठन में संभावित असंतोष को दूर करने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा।

गोवा के कार्यक्रम में केजरीवाल ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि अलग-अलग राज्यों में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतने वाले कई विधायक बाद में भाजपा में शामिल हो जाते हैं। इसी आधार पर उन्होंने आम आदमी पार्टी और गोवा फॉरवर्ड पार्टी के गठबंधन को भाजपा तथा कांग्रेस से अलग राजनीतिक विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया। उनका कहना था कि मतदाताओं को ऐसे उम्मीदवारों की जरूरत है जो चुनाव जीतने के बाद पार्टी और जनता के फैसले के साथ खड़े रहें।

केजरीवाल का ताजा बयान केवल नाराजगी का इजहार नहीं, बल्कि आम आदमी पार्टी की भविष्य की रणनीति का संकेत भी माना जा रहा है। पार्टी अब टिकट वितरण, बड़ी जिम्मेदारियां देने और राज्यसभा उम्मीदवार चुनने के लिए ज्यादा कड़े मानदंड बना सकती है। संभावित उम्मीदवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि, संगठन के प्रति योगदान, विचारधारा और पिछले सार्वजनिक आचरण को परखा जा सकता है।

हालांकि पार्टी ने अभी तक चयन प्रक्रिया में किसी औपचारिक बदलाव या नई जांच समिति की घोषणा नहीं की है। इसलिए केजरीवाल का बयान फिलहाल राजनीतिक संकल्प के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में जब आम आदमी पार्टी किसी उम्मीदवार को राज्यसभा भेजेगी, तब यह स्पष्ट होगा कि सात सांसदों के दल-बदल से मिले सबक को पार्टी ने अपनी चयन प्रक्रिया में किस तरह लागू किया है।

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