नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी दलों के 'INDIA' गठबंधन की बैठक की अपील ठुकरा दी है। उन्होंने गठबंधन को सलाह दी है कि वे सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक प्रस्तावित मार्च से पहले याचिका के ज़रिए कोर्ट से संपर्क करें।
सूत्रों के मुताबिक, CJI ने कहा कि जिन मुद्दों को विपक्षी नेता उठाना चाहते हैं, वे पहले से ही कोर्ट में विचाराधीन हैं और सुप्रीम कोर्ट उन पर सुनवाई कर रहा है।
कहा जा रहा है कि CJI ने कहा कि कोर्ट इस तरह प्रशासनिक स्तर पर किसी राजनीतिक दल के प्रतिनिधिमंडल से नहीं मिल सकता। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि न्यायपालिका का काम याचिकाएं सुनना और फ़ैसले देना है।
उन्होंने यह भी दोहराया कि देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था के तौर पर सुप्रीम कोर्ट के दरवाज़े "सभी के लिए 24 घंटे खुले हैं" और वह "हर नागरिक के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध" है।
इनकार के बावजूद, 'INDIA' गठबंधन का प्रस्तावित मार्च सोमवार को होने की संभावना है। यह प्रदर्शन विपक्षी दलों के विरोध-प्रदर्शनों की एक कड़ी का हिस्सा है। इन दलों ने कई मुद्दों के साथ-साथ मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) में कथित गड़बड़ियों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग की है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का कहना है कि यह प्रस्तावित मार्च "किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि सभी भारतीयों का है"। कांग्रेस नेता इस अभियान का दायरा बढ़ाना चाहते हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त तथा केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली BJP सरकार पर दबाव बनाना चाहते हैं।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि सरकार को SIR प्रक्रिया से फ़ायदा हुआ है, जो विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच विवाद का एक बड़ा मुद्दा बन गया है।
'INDIA' गठबंधन ने पिछले शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को मांगों का एक चार्टर सौंपा था, जिसमें चुनावी सुधारों और कथित वोट हेरफेर से जुड़ी चार मुख्य मांगें शामिल थीं।
इनमें ज्ञानेश कुमार का इस्तीफ़ा और 2023 का वह कानून रद्द करना शामिल है जो मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को कानूनी सुरक्षा देता है।
विपक्ष ने SIR प्रक्रिया को तुरंत रोकने और मतदाता सूची से कथित तौर पर हटाए गए सभी 13.3 करोड़ मतदाताओं के नाम बहाल करने की भी मांग की है। इससे पहले रविवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 2023 के कानून के तहत भारत के चुनाव आयोग के प्रमुख और उसके सदस्यों को दी गई कानूनी सुरक्षा को लेकर CEC पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने उन्हें कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए यह कानून बनाया है।
उन्होंने कहा, "ऐसा माहौल बनाने के लिए, PM मोदी मुख्य चुनाव आयुक्त और सदस्यों को बचाने के लिए 2023 का कानून लाए। उन्होंने उन्हें यह सुरक्षा दी। ऐसी सुरक्षा तो भारत के राष्ट्रपति या मुख्य न्यायाधीश को भी नहीं मिलती, लेकिन एक चुनाव आयुक्त को दी गई है।"
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