नई दिल्ली। देश में भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी और पेपर लीक से जुड़े मामलों को जल्द निपटाने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। सीबीआई ने ऐसे करीब 158 लंबित मामलों को फास्ट ट्रैक कोर्ट में स्थानांतरित कराने और उनकी त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने का फैसला किया है। इनमें कई मामले ऐसे हैं, जिनमें जांच पूरी हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन अदालतों में अब तक सुनवाई शुरू नहीं हो सकी है।
सीबीआई के अनुसार, भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली, पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं से जुड़े कई मामलों की जांच पूरी हो चुकी है, लेकिन न्यायिक प्रक्रिया शुरू नहीं होने के कारण ये मामले लंबे समय से लंबित हैं। कुछ मामले तो ऐसे भी हैं, जो दो दशक से अधिक पुराने हैं। अब जांच एजेंसी इन मामलों को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए संबंधित हाई कोर्टों से संपर्क करेगी।
सीबीआई ने फैसला किया है कि वह सभी हाई कोर्टों को लंबित मामलों की जानकारी देगी और इनकी सुनवाई के लिए विशेष सरकारी वकील उपलब्ध कराने की पेशकश करेगी। इसके अलावा अदालतों को जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने में भी सहयोग किया जाएगा, ताकि मामलों की सुनवाई में किसी तरह की देरी न हो।
सूत्रों के मुताबिक, नए पेपर लीक रोधी कानून के तहत राज्यों में विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन किया जा रहा है। सीबीआई इन अदालतों में लंबित मामलों को भेजने की प्रक्रिया शुरू करेगी, जिससे पेपर लीक और भर्ती घोटालों से जुड़े मामलों का जल्द फैसला हो सके।
राजधानी दिल्ली में ऐसे करीब 25 मामले हैं, जिनमें सीबीआई की जांच पूरी हो चुकी है, लेकिन अदालत में सुनवाई शुरू नहीं हुई है। इनमें वर्ष 2004 का कॉमन एडमिशन टेस्ट में गड़बड़ी का मामला, 2010-11 का एम्स-पीजी भर्ती परीक्षा मामला, 2011 की दिल्ली विश्वविद्यालय मेडिकल और डेंटल प्रवेश परीक्षा में अनियमितता, 2013 की एसएससी भर्ती परीक्षा और शिक्षक भर्ती से जुड़े मामले शामिल हैं।
बिहार में भी भर्ती परीक्षा गड़बड़ी के पांच मामले लंबित हैं। इनमें से तीन मामले नीट-2024 के कथित पेपर लीक से जुड़े बताए जा रहे हैं। इन मामलों में सीबीआई जांच पूरी कर चुकी है, लेकिन न्यायालय में सुनवाई शुरू होने का इंतजार है।
हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2022 के कांस्टेबल भर्ती घोटाले का मामला भी लंबित मामलों में शामिल है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में तीन मामलों की सुनवाई शुरू होनी बाकी है। सीबीआई इन सभी मामलों को तेजी से निपटाने की कोशिश कर रही है।
अन्य राज्यों की बात करें तो झारखंड में पांच, कर्नाटक में पांच, महाराष्ट्र में तीन, राजस्थान में आठ, तमिलनाडु में 14 तथा पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में 10-10 मामले लंबित हैं। महाराष्ट्र के लंबित मामलों में नीट-2024 से जुड़े दो मामले भी शामिल हैं।
सीबीआई का मानना है कि भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के मामलों में देरी से छात्रों और अभ्यर्थियों का भरोसा प्रभावित होता है। इसलिए एजेंसी चाहती है कि ऐसे मामलों में जल्द न्याय मिले और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो। फास्ट ट्रैक सुनवाई की व्यवस्था से न केवल पुराने मामलों का निपटारा होगा, बल्कि भविष्य में परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
हाल के वर्षों में पेपर लीक के कई मामले सामने आने के बाद सरकार ने परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए कदम उठाए हैं। अब सीबीआई की यह पहल लंबित मामलों को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।