झारखंड युवाओं को बंटे जा रहे काजू-किशमिश और केसर-बादाम दूध
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Jharkhand. झारखंड। झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन जारी है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहे इस आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में समाज के अलग-अलग वर्ग आगे आए हैं। भूख हड़ताल और लगातार धरने के कारण छात्रों की सेहत पर असर न पड़े, इसके लिए स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न धार्मिक स्थलों की ओर से भोजन और पौष्टिक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। इसी क्रम में धरनास्थल पर काजू, किशमिश, छुहारा, बादाम और केसर से युक्त दूध का वितरण किया गया।
बताया जा रहा है कि भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलन के शुरुआती दिनों में प्रदर्शनकारियों के संघर्ष से जुड़ी कई तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए थे। इनमें छात्र सूखे चावल, चूड़ा-गुड़ और बिस्कुट जैसे सीमित खाद्य पदार्थों के सहारे आंदोलन जारी रखते दिखाई दिए। इन तस्वीरों और वीडियो के सामने आने के बाद समाज के विभिन्न वर्गों ने छात्रों की स्थिति पर चिंता जताई। इसके बाद स्थानीय युवाओं, सामाजिक संस्थाओं और धार्मिक समुदायों ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर छात्रों की मदद शुरू की। प्रदर्शनकारियों के लिए पौष्टिक भोजन की व्यवस्था की जा रही है, ताकि लंबे समय तक चलने वाले आंदोलन के दौरान उनकी सेहत पर ज्यादा प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। खासकर भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों के स्वास्थ्य को लेकर लोग विशेष रूप से चिंतित नजर आ रहे हैं।
धरना स्थल पर स्थानीय युवाओं और सिख समुदाय के लोगों की ओर से बड़ी मात्रा में बादाम-केसर और ड्राई फ्रूट्स मिश्रित दूध वितरित किया गया। दूध में बादाम, काजू, किशमिश और छुहारा जैसी सामग्री शामिल थी। प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे लोगों ने छात्रों को भोजन उपलब्ध कराने के साथ उनके संघर्ष में नैतिक समर्थन भी दिया। इसके अलावा रांची के विभिन्न धार्मिक स्थलों की ओर से भी छात्रों के लिए भोजन की व्यवस्था की जा रही है। पहाड़ी मंदिर, शनि मंदिर, स्थानीय मस्जिदों और गुरुद्वारों की ओर से नाश्ते और गर्म भोजन की व्यवस्था किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस पहल को आंदोलन के बीच सामाजिक सहयोग और सामुदायिक एकजुटता के उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है।
छात्रों के लिए केवल मुख्य भोजन ही नहीं, बल्कि नाश्ते और फल की भी व्यवस्था की जा रही है। धरना स्थल पर केले, तरबूज, ब्रेड के साथ जलेबी-कचौड़ी जैसे पारंपरिक खाद्य पदार्थ भी पहुंचाए जा रहे हैं। लंबे समय से आंदोलन कर रहे छात्रों को शारीरिक कमजोरी से बचाने के लिए लोग अपनी क्षमता के अनुसार खाद्य सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं। इस आंदोलन की एक खास बात यह भी सामने आई है कि केवल रांची के स्थानीय लोग ही छात्रों की मदद नहीं कर रहे हैं। झारखंड के अलग-अलग जिलों में रहने वाले परिवार भी आंदोलनकारी छात्रों के लिए अपने घरों से खाना बनाकर भेज रहे हैं। कई लोग व्यक्तिगत स्तर पर भोजन और अन्य जरूरी सामग्री धरनास्थल तक पहुंचा रहे हैं।
छात्रों के आंदोलन के बीच इस तरह की सामाजिक भागीदारी ने प्रदर्शनकारियों का मनोबल बढ़ाया है। आंदोलन में शामिल छात्रों का कहना है कि उनकी मांगों को लेकर संघर्ष जारी है और समाज के विभिन्न वर्गों से मिल रहा समर्थन उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दे रहा है। भोजन और अन्य जरूरी सामग्री मिलने से लंबे समय तक धरने पर बैठे छात्रों को राहत भी मिल रही है। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम में धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारों से जुड़े लोगों द्वारा छात्रों के लिए भोजन की व्यवस्था किए जाने से आंदोलन के दौरान सामाजिक एकता का संदेश सामने आया है। अलग-अलग समुदायों के लोग छात्रों की मदद के लिए एक साथ आगे आते दिखाई दे रहे हैं।
JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों की मुख्य मांगें और आंदोलन की आगे की दिशा प्रशासन और संबंधित संस्थाओं के निर्णयों पर निर्भर करेगी। फिलहाल जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों का प्रदर्शन जारी है। एक ओर छात्र अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके स्वास्थ्य और भोजन की जरूरतों को पूरा करने के लिए समाज के विभिन्न वर्ग लगातार सहयोग कर रहे हैं। छात्र आंदोलन के बीच पहुंच रहा यह सहयोग केवल भोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदर्शनकारियों के प्रति सामाजिक समर्थन और एकजुटता को भी दर्शाता है। काजू-किशमिश, छुहारा, बादाम-केसर दूध, फल और गर्म भोजन उपलब्ध कराने की पहल ने आंदोलन स्थल पर छात्रों को राहत दी है। आने वाले दिनों में आंदोलन किस दिशा में जाता है, इस पर छात्रों के साथ-साथ उनके समर्थन में खड़े विभिन्न सामाजिक संगठनों और आम लोगों की भी नजर बनी हुई है।