BREAKING: कोर्ट रूम में मजिस्ट्रेट की कुर्सी पर बैठकर बनाई रील, तीन आरोपी गिरफ्तार

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Update: 2026-03-07 13:52 GMT
Bikaner. बीकानेर। राजस्थान के Bikaner से न्यायपालिका की गरिमा से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां कोर्ट रूम जैसी गंभीर और संवेदनशील जगह को सोशल मीडिया रील बनाने का मंच बना दिया गया। आरोप है कि कोर्ट परिसर में कार्यरत एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर मजिस्ट्रेट की कुर्सी पर बैठकर वीडियो रील बनाई और उसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। वीडियो वायरल होते ही मामला तूल पकड़ गया और पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। जानकारी के अनुसार घटना बीकानेर के न्यायालय परिसर की है, जहां कोर्ट में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पुष्पेंद्र भाटी ने अपने दो साथियों मनीष डूडी और भूपेंद्र के साथ मिलकर कोर्ट रूम में प्रवेश किया। इसके बाद पुष्पेंद्र भाटी मजिस्ट्रेट की कुर्सी पर बैठ गया और वहीं से सोशल मीडिया के लिए रील बनाई गई। बताया जा रहा है कि इस दौरान उसके साथियों ने वीडियो रिकॉर्ड किया और बाद में इसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर दिया।
वीडियो सामने आने के बाद यह तेजी से वायरल हो गया। जैसे ही यह वीडियो लोगों और प्रशासन की नजर में आया, पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। न्यायालय जैसी गरिमामय संस्था के अंदर इस तरह की हरकत को लेकर लोगों ने कड़ी आपत्ति जताई। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं और न्यायपालिका की गरिमा को लेकर सवाल उठने लगे। मामले की गंभीरता को देखते हुए Sadar Police Station Bikaner पुलिस ने तुरंत संज्ञान लिया और जांच शुरू कर दी। जांच के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी पुष्पेंद्र भाटी, मनीष डूडी और भूपेंद्र को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि तीनों आरोपियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जा रही है और मामले की विस्तृत जांच जारी है।


पुलिस अधिकारियों के अनुसार कोर्ट रूम जैसी जगह पर अनुशासन और मर्यादा का पालन करना अनिवार्य होता है। न्यायालय वह स्थान है जहां लोगों को न्याय मिलता है और वहां की गरिमा सर्वोपरि मानी जाती है। ऐसे में मजिस्ट्रेट की कुर्सी पर बैठकर वीडियो बनाना और उसे सोशल मीडिया पर वायरल करना गंभीर अनुशासनहीनता और न्यायपालिका की गरिमा के साथ खिलवाड़ माना जा रहा है। घटना के बाद न्यायालय परिसर में भी इस विषय को लेकर चर्चा का माहौल है। कई लोगों का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने की होड़ में लोग अब संवेदनशील और गरिमामय स्थानों की मर्यादा तक भूलने लगे हैं। यह घटना इसी मानसिकता को दर्शाती है, जहां कुछ लोग लाइक्स और व्यूज के लिए कानून और मर्यादा की सीमाओं को भी पार कर जाते हैं।
कानूनी जानकारों का मानना है कि न्यायालय परिसर में इस तरह का कृत्य केवल अनुशासनहीनता ही नहीं बल्कि न्याय व्यवस्था के प्रति अनादर भी माना जा सकता है। ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई जरूरी है ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस तरह की हरकत करने से पहले कई बार सोचे। पुलिस ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और यह भी जांच की जा रही है कि घटना के दौरान कोर्ट रूम में प्रवेश कैसे हुआ और क्या इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका थी। यदि जांच में किसी और की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सोशल मीडिया की बढ़ती लोकप्रियता के बीच लोग किस हद तक जाने को तैयार हैं। जहां एक ओर सोशल मीडिया अभिव्यक्ति का माध्यम है, वहीं दूसरी ओर इसका जिम्मेदारी से उपयोग करना भी उतना ही जरूरी है। बीकानेर कोर्ट की इस घटना ने न्यायपालिका की गरिमा और अनुशासन को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। हालांकि पुलिस की त्वरित कार्रवाई से यह संदेश जरूर गया है कि कानून और न्याय व्यवस्था की मर्यादा से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
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