BIG BREAKING: अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले में ₹24 करोड़ के सोने-चांदी जब्त
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Bengaluru. बेंगलुरु। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), बेंगलुरु ने अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए जनता को धोखा देने से संबंधित के. सी. वीरेंद्र और अन्य आरोपियों के खिलाफ छापेमारी की है। यह कार्रवाई पीएमएलए, 2002 (धन शोधन निवारण अधिनियम) के प्रावधानों के तहत की गई। 6 सितंबर 2025 को कर्नाटक के चल्लेकेरे क्षेत्र में की गई तलाशी में भारी मात्रा में सोने और चांदी की बरामदगी हुई, जो इस पूरे मामले की गंभीरता को दर्शाती है। तलाशी के दौरान अधिकारियों ने 21.43 किलोग्राम वजन के 24 कैरेट सोने के बुलियन जब्त किए। इसके अलावा, 10.985 किलोग्राम वजन के सोने से मढ़े चांदी के 11 ब्लॉक और लगभग 1 किलोग्राम वजन के सोने के आभूषण भी बरामद किए गए। प्रारंभिक मूल्यांकन के अनुसार जब्त किए गए सोने-चांदी की कुल कीमत लगभग 24 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह सामग्री अवैध लेनदेन और काले धन के निवेश का प्रमुख हिस्सा मानी जा रही है।
ईडी के अधिकारियों ने बताया कि इस जब्ती को ध्यान में रखते हुए अब तक इस मामले में अपराध से प्राप्त आय (Proceeds of Crime – POC) की संचयी जब्ती 100 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। यह रकम अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क से जुड़ी आपराधिक गतिविधियों की विशालता को उजागर करती है। जांच एजेंसियां अब इस मामले में और भी गहराई से जांच कर रही हैं ताकि धन शोधन, फर्जी निवेश योजनाओं और काले धन के नेटवर्क का पूरा पर्दाफाश किया जा सके। ईडी की यह कार्रवाई उन संगठित गिरोहों के खिलाफ है जो डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से अवैध सट्टेबाजी का संचालन कर आम जनता को आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे हैं। आरोप है कि के. सी. वीरेंद्र और उसके सहयोगियों ने निवेश के नाम पर लोगों से भारी रकम जुटाई और फिर उसे सोने-चांदी जैसी परिसंपत्तियों में छिपाकर रखा। यह नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ है और इसमें फर्जी कंपनियों व हवाला चैनलों का इस्तेमाल कर अवैध लेनदेन को अंजाम दिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में और भी कई ठिकानों पर छापेमारी की योजना है। साथ ही, वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों, फर्जी कंपनियों और निवेशकों से प्राप्त धन की ट्रैकिंग की जा रही है। जांच में डिजिटल रिकॉर्ड, ईमेल, वॉलेट ट्रांजैक्शन और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के माध्यम से की गई धोखाधड़ी के सबूत जुटाए जा रहे हैं। कानून विशेषज्ञों का कहना है कि यह कार्रवाई अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी और डिजिटल आर्थिक अपराधों के खिलाफ एक बड़ा कदम है। ऐसे मामलों में पारंपरिक अपराधों से अलग तरीके अपनाए जाते हैं, जिसमें तकनीकी और वित्तीय नेटवर्क का सहारा लिया जाता है। ईडी की इस कार्रवाई से न सिर्फ अवैध कारोबार को रोकने में मदद मिलेगी, बल्कि आम लोगों में जागरूकता भी बढ़ेगी कि डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से निवेश के नाम पर किस तरह ठगी की जाती है।
राज्य और केंद्र सरकार ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय कर अन्य संबंधित मामलों की भी जांच शुरू कर दी गई है। वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए तकनीकी उपकरणों और साइबर सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है। कुल मिलाकर यह मामला आर्थिक अपराध, धन शोधन और अवैध निवेश की बड़ी साजिश से जुड़ा है। ईडी की कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि कानून की पहुंच अब उन अपराधियों तक भी है जो डिजिटल प्लेटफार्मों का दुरुपयोग कर जनता को नुकसान पहुंचाते हैं। आगामी दिनों में इस मामले से जुड़ी और बड़ी जानकारियां सामने आने की उम्मीद है, जिससे आर्थिक अपराधों पर प्रभावी रोकथाम की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकेंगे।