BIG BREAKING: एंटी पेपर लीक बिल राज्यसभा में पेश, 7 घंटे होगी चर्चा
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New Delhi. नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान गुरुवार को राज्यसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026, जिसे आमतौर पर एंटी पेपर लीक बिल कहा जा रहा है, पर विस्तृत चर्चा शुरू हो गई। सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने सदन को जानकारी दी कि इस महत्वपूर्ण विधेयक पर लगभग सात घंटे चर्चा का समय निर्धारित किया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आवश्यक हुआ तो चर्चा का समय बढ़ाया भी जा सकता है ताकि सभी दलों के सदस्यों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिले। इससे पहले लोकसभा में इस विधेयक पर लगभग दस घंटे तक लंबी बहस हुई थी।
राज्यसभा में चर्चा की शुरुआत विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने की। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत एक शायरी के साथ करते हुए पेपर लीक की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की और कहा कि देश के युवाओं का भविष्य बार-बार ऐसी घटनाओं से प्रभावित हुआ है। खड़गे ने आरोप लगाया कि विपक्ष ने वर्ष 2024 में ही एक मजबूत और प्रभावी कानून बनाने की मांग की थी, लेकिन उस समय सरकार ने उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया।
खड़गे ने कहा कि उस समय सरकार जल्दबाजी में कानून लेकर आई क्योंकि आम चुनाव निकट थे और राजनीतिक परिस्थितियां अलग थीं। उन्होंने दावा किया कि उस समय विपक्ष की मांगों को स्वीकार नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि वर्तमान संशोधन विधेयक का उनकी पार्टी स्वागत करती है, लेकिन इसमें अभी भी कई महत्वपूर्ण कमियां हैं। उनके अनुसार सरकार का उद्देश्य समस्या का स्थायी समाधान निकालना नहीं बल्कि मौजूदा माहौल को शांत करना अधिक प्रतीत होता है।
विपक्ष के नेता ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं ने लाखों युवाओं की मेहनत और भविष्य को प्रभावित किया है। ऐसे में केवल सख्त सजा का प्रावधान पर्याप्त नहीं है, बल्कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रभावी निगरानी व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने सरकार से कानून को और अधिक व्यापक तथा प्रभावी बनाने की मांग की। विधेयक पर चर्चा शुरू होने से पहले सदन में समय आवंटन को लेकर भी संक्षिप्त बहस देखने को मिली। कांग्रेस के मुख्य सचेतक जयराम रमेश ने मांग की कि नेता सदन और नेता प्रतिपक्ष जैसे संवैधानिक पदों पर बैठे नेताओं को विशेष समय दिया जाना चाहिए और उनके भाषण का समय संबंधित राजनीतिक दल के निर्धारित कोटे में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
जयराम रमेश ने कहा कि दोनों पदों की संवैधानिक और संसदीय गरिमा को देखते हुए उनके लिए अलग समय निर्धारित किया जाना चाहिए ताकि वे स्वतंत्र रूप से अपने विचार रख सकें। इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि जब नेता सदन या नेता प्रतिपक्ष अपनी पार्टी की ओर से बोलते हैं तो उनका समय संबंधित दल के हिस्से में ही गिना जाता है। उन्होंने कहा कि संसदीय परंपराओं के तहत उन्हें कुछ विशेष अधिकार और सुविधाएं पहले से प्राप्त हैं, लेकिन भाषण का समय पार्टी के कोटे का ही हिस्सा होता है। इस संक्षिप्त बहस के बाद सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा शुरू करने के लिए मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम पुकारा और सदन की कार्यवाही आगे बढ़ाई।
इससे पहले प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में एंटी पेपर लीक बिल पेश किया। विधेयक प्रस्तुत करते हुए उन्होंने विभिन्न राज्यों में वर्षों से सामने आए पेपर लीक मामलों का उल्लेख किया। उन्होंने कांग्रेस और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के कार्यकाल के दौरान हुई घटनाओं के साथ-साथ विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों में सामने आए पेपर लीक मामलों का भी जिक्र किया। डॉ. जितेंद्र सिंह के वक्तव्य के दौरान विपक्षी सांसदों ने बीच-बीच में टिप्पणियां करनी शुरू कर दीं। इस पर सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने कई बार सदस्यों को टोका और कहा कि लगातार टिप्पणी करने से चर्चा की गरिमा प्रभावित होती है। उन्होंने सदस्यों से कहा, "नो रनिंग कमेंट्री प्लीज", ताकि विधेयक पर गंभीर और व्यवस्थित चर्चा हो सके। इस दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने भी टिप्पणी करते हुए कहा कि "सुई सही जगह चुभी है", जिसके बाद सदन में कुछ देर हल्की नोकझोंक का माहौल बना।
विपक्ष की ओर से इस विधेयक पर कई प्रमुख नेता अपनी बात रखेंगे। कांग्रेस की ओर से मल्लिकार्जुन खड़गे के अलावा मुकुल वासनिक चर्चा में भाग लेंगे। समाजवादी पार्टी की ओर से प्रोफेसर रामगोपाल यादव, आम आदमी पार्टी की ओर से संजय सिंह तथा तृणमूल कांग्रेस की ओर से सागरिका घोष या राजीव कुमार अपनी पार्टी का पक्ष रखेंगे। सूत्रों के अनुसार विपक्ष की रणनीति इस बार विधेयक पर गंभीर चर्चा करने की है और अनावश्यक हंगामे से बचने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि विपक्षी दल अपने भाषणों में हाल के लाठीचार्ज की घटनाओं का मुद्दा भी उठाएंगे और गृह मंत्री से इस विषय पर सदन में विस्तृत बयान देने की मांग करेंगे।
सरकार का कहना है कि एंटी पेपर लीक बिल का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और पेपर लीक जैसे संगठित अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाना है। विधेयक में कठोर दंड, भारी आर्थिक जुर्माना, विशेष जांच तंत्र और मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं। अब राज्यसभा में विस्तृत चर्चा के बाद इस महत्वपूर्ण विधेयक पर सदन का फैसला सामने आएगा। यदि विधेयक पारित हो जाता है तो देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा।