गुवाहाटी। असम में भ्रष्टाचार के एक मामले की जांच के दौरान चौंकाने वाला दावा सामने आया है। भ्रष्टाचार, पद के कथित दुरुपयोग और अवैध संपत्ति अर्जित करने के आरोप में गिरफ्तार एक वरिष्ठ अधिकारी के बारे में जांच में पता चला है कि वह कथित तौर पर एक मिमिक्री कलाकार की मदद से मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और वरिष्ठ नौकरशाहों की आवाज की नकल करवाता था। आरोप है कि इन नकली आवाजों का इस्तेमाल अधिकारियों और अन्य लोगों को प्रभावित करने तथा कथित अनियमितताओं को अंजाम देने के लिए किया जाता था।

मामले की जांच अभी जारी है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित फर्जी कॉल के जरिए कितने लोगों से संपर्क किया गया, किन मामलों में मुख्यमंत्री या वरिष्ठ अधिकारियों की आवाज की नकल की गई और इससे किसी तरह का आर्थिक लाभ हासिल किया गया या नहीं।

भ्रष्टाचार के आरोप में हुई थी गिरफ्तारी

जानकारी के मुताबिक, वरिष्ठ अधिकारी को पहले भ्रष्टाचार, अपने पद का गलत इस्तेमाल करने और आय के ज्ञात स्रोतों से इतर संपत्ति रखने जैसे आरोपों में गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उसके संपर्कों, वित्तीय लेन-देन और अन्य गतिविधियों की जांच शुरू की गई।

इसी जांच के दौरान कथित तौर पर मिमिक्री कलाकार की भूमिका सामने आई। जांच एजेंसियों को संदेह है कि अधिकारी ने अपने प्रभाव को और अधिक मजबूत दिखाने के लिए मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नौकरशाहों की आवाज का सहारा लिया।

मिमिक्री कलाकार की मदद लेने का आरोप

जांच में सामने आए दावों के अनुसार, आरोपी अधिकारी कथित रूप से एक ऐसे कलाकार के संपर्क में था जो अलग-अलग लोगों की आवाज की नकल करने में सक्षम था। आरोप है कि उससे मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की आवाज की नकल कराई जाती थी।

अब जांच एजेंसी दोनों के बीच संपर्क और कथित बातचीत से जुड़े साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि मिमिक्री कलाकार को इन कॉल के वास्तविक उद्देश्य की जानकारी थी या नहीं।

मुख्यमंत्री के नाम का प्रभाव इस्तेमाल करने की आशंका

जांच एजेंसियों के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि मुख्यमंत्री की आवाज की कथित नकल का इस्तेमाल किन उद्देश्यों के लिए किया गया। आशंका जताई जा रही है कि फर्जी कॉल के माध्यम से सामने वाले व्यक्ति को यह विश्वास दिलाने की कोशिश की जाती थी कि उसे सीधे मुख्यमंत्री या किसी वरिष्ठ नौकरशाह से निर्देश मिल रहे हैं।

यदि जांच में यह आरोप सही पाया जाता है तो यह मामला भ्रष्टाचार के साथ पहचान और अधिकार के कथित दुरुपयोग से भी जुड़ सकता है।

कॉल और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच

मामले की तह तक पहुंचने के लिए जांच एजेंसियां आरोपी अधिकारी से जुड़े मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल उपकरण और वित्तीय दस्तावेजों की जांच कर सकती हैं। इनसे यह पता लगाने की कोशिश होगी कि संदिग्ध कॉल कब और किन लोगों को किए गए थे।

इसके अलावा यह भी जांचा जा रहा है कि क्या कथित फर्जी कॉल के बाद किसी सरकारी निर्णय, ठेके, भुगतान या अन्य प्रक्रिया पर प्रभाव पड़ा था।

अवैध संपत्ति की भी जांच

अधिकारी पर अवैध संपत्ति अर्जित करने के आरोप भी हैं। ऐसे में जांच एजेंसियां उसकी चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों, निवेश और अन्य वित्तीय लेन-देन को खंगाल रही हैं।

जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि अधिकारी ने अपनी वैध आय के मुकाबले कितनी संपत्ति अर्जित की और यदि अतिरिक्त संपत्ति मिली है तो उसके लिए धन कहां से आया।

अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में

इस मामले में अब जांच का दायरा आरोपी अधिकारी तक सीमित नहीं है। मिमिक्री कलाकार के अलावा अधिकारी के संपर्क में रहे अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा सकती है।

जांच एजेंसी यह जानने का प्रयास कर रही है कि कथित योजना में कितने लोग शामिल थे और क्या किसी अन्य व्यक्ति ने फर्जी कॉल के जरिए फायदा उठाया।

जांच पूरी होने पर सामने आएगी तस्वीर

फिलहाल मामले में जांच जारी है और मिमिक्री के जरिए मुख्यमंत्री तथा नौकरशाहों की आवाज का इस्तेमाल करने से जुड़े दावे जांच का हिस्सा हैं। इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

वरिष्ठ अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद सामने आए इस नए पहलू ने मामले को और गंभीर बना दिया है। अब जांच एजेंसियों के सामने चुनौती यह पता लगाने की है कि कथित फर्जी आवाजों का इस्तेमाल कितने मामलों में हुआ और इससे सरकार या अन्य लोगों को कितना नुकसान पहुंचा।

मामले में आगे की जांच के साथ और भी खुलासे होने की संभावना है।

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