नई दिल्ली: केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने मंगलवार को कहा कि सरकार एयरलाइंस और तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के साथ एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की बढ़ती कीमतों पर बातचीत कर रही है। पश्चिम एशिया में संकट के कारण ये कीमतें और बढ़ गई हैं, और इंडिगो ने अपना फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने का फैसला किया है।
मंत्री ने यहां IFQM संगोष्ठी 2026 के दौरान पत्रकारों से कहा, "सबसे अहम बात पश्चिम एशिया का संकट है और यह कैसे ATF की कीमतों पर भारी बोझ डाल रहा है। लेकिन हम अभी भी एयरलाइंस और OMCs दोनों के साथ बातचीत कर रहे हैं। देखते हैं कि बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है।"
मंत्री ने आगे कहा कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय इस मुद्दे पर कोई भी फैसला लेने से पहले सभी संबंधित पक्षों (स्टेकहोल्डर्स) के साथ बातचीत करेगा।
उन्होंने कहा, "मंत्रालय संबंधित पक्षों के साथ बैठक करने जा रहा है। और जब हम सभी संबंधित पक्षों का नजरिया समझ लेंगे, तब हम कोई फैसला लेंगे।"
सम्मेलन में बोलते हुए, नायडू ने एविएशन सेक्टर के लिए सरकार के लॉन्ग-टर्म विजन के बारे में बताया। इसमें सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) को बढ़ावा देना, कई एयरपोर्ट हब बनाना और घरेलू एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को मजबूत करना शामिल है।
उन्होंने कहा कि भारत ने नियम बनाया है कि 2027 तक इंटरनेशनल उड़ानों में इस्तेमाल होने वाले फ्यूल का 1 प्रतिशत हिस्सा SAF से आना चाहिए, जो 2028 तक बढ़कर 2 प्रतिशत और 2030 तक 5 प्रतिशत हो जाएगा।
इसके अलावा, सरकार ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के मुताबिक SAF बनाने के लिए सरकारी रिफाइनरियों - इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) - के साथ बातचीत कर रही है।
उनके अनुसार, भारत का लक्ष्य देश भर में कई एयरपोर्ट हब बनाकर ग्लोबल एविएशन हब बनना है। साथ ही, 'हब-एंड-स्पोक' मॉडल के जरिए छोटे शहरों के यात्री घरेलू गेटवे से लंबी दूरी की इंटरनेशनल उड़ानों से जुड़ सकेंगे।
एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग पर मंत्री ने कार्यक्रम में कहा कि भारत इंजन बनाने को एक अहम क्षमता मानता है और इसके लिए चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रहा है, जिसकी शुरुआत मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल (MRO) गतिविधियों और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग से होगी। उन्होंने स्वदेशी हेलीकॉप्टर इंजन के विकास में हुई प्रगति का ज़िक्र किया और कहा कि रक्षा क्षेत्र में हासिल हुई जानकारी और तकनीक आगे चलकर सिविल एविएशन मैन्युफैक्चरिंग के लक्ष्यों को पूरा करने में मदद कर सकती है।