बेंगलुरु। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मंगलवार को मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR को लेकर INDIA ब्लॉक के सांसदों द्वारा चुनाव आयोग तक निकाले गए विरोध मार्च का समर्थन किया। शिवकुमार ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी देश के लोगों और मतदाताओं के अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और नाम हटाए जाने के मुद्दे को लेकर 6 अक्टूबर को नई दिल्ली में चुनाव आयोग की ओर मार्च किया।
मीडिया से बातचीत के दौरान डीके शिवकुमार ने मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर उठ रहे विवाद पर बीजेपी नेताओं पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं की ओर से इस मुद्दे पर आरोप लगाए जा रहे हैं, उन्हें पहले यह साबित करना चाहिए कि संबंधित प्रक्रिया के तहत जरूरी फॉर्म जमा किए गए थे। शिवकुमार ने पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा, बसवराज बोम्मई, एचडी कुमारस्वामी, शोभा करंदलाजे, बीवाई विजयेंद्र और आर अशोक समेत कई नेताओं का नाम लेते हुए कहा कि वे यह स्पष्ट करें कि उन्होंने जरूरी फॉर्म जमा किए थे या नहीं।
शिवकुमार ने कहा कि जिस व्यक्ति को लगता है कि उसका वोट गलत तरीके से मतदाता सूची से हटाया गया है, उसकी जिम्मेदारी है कि वह इसकी शिकायत दर्ज कराए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को चुनाव आयोग के सामने उठा चुकी है और आगे की कार्रवाई कानून के अनुसार होनी चाहिए।
उन्होंने Form 7 की प्रक्रिया का भी जिक्र किया। Form 7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में किसी नाम के शामिल किए जाने पर आपत्ति या किसी नाम को हटाने के अनुरोध के लिए किया जाता है। कर्नाटक में हाल के दिनों में बड़ी संख्या में Form 7 आवेदन जमा किए जाने को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ा है। बीजेपी के प्रतिनिधिमंडल ने भी हाल में राज्य के पुलिस महानिदेशक से मुलाकात कर Form 7 आवेदनकर्ताओं के खिलाफ दर्ज मामलों की समीक्षा की मांग की थी।
डीके शिवकुमार ने कहा कि Form 7 की अपनी विस्तृत प्रक्रिया है और संबंधित संस्थाएं कानून के अनुसार कार्रवाई करेंगी। उन्होंने सवाल किया कि यदि विपक्ष की जगह बीजेपी होती और उसे भी मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका होती, तो वह क्या करती। शिवकुमार ने इस मुद्दे को मतदाताओं के अधिकार से जोड़ते हुए राहुल गांधी और विपक्ष के विरोध का समर्थन किया।
इधर नई दिल्ली में INDIA ब्लॉक के सांसदों ने मंगलवार को चुनाव आयोग की ओर मार्च किया। विपक्षी दल SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मामलों को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध कर रहे हैं। मार्च के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और पुलिस ने कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी नेता प्रदर्शन में शामिल हुए। पुलिस ने मार्च को चुनाव आयोग कार्यालय पहुंचने से पहले रोक दिया और कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया।
विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनावी फॉर्म से संबंधित प्रक्रियाओं में ऐसी गड़बड़ियां हुई हैं, जिनसे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। चुनाव आयोग ने इससे जुड़े आरोपों को खारिज करते हुए अपनी प्रक्रियाओं को कानून के अनुरूप बताया है।
राहुल गांधी पिछले कुछ समय से मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। मंगलवार के प्रदर्शन में भी उन्होंने चुनाव आयोग पर जवाबदेही तय करने की मांग की। विपक्षी दल इस मुद्दे को व्यापक राजनीतिक अभियान के रूप में आगे बढ़ा रहे हैं और इसे चुनावी पारदर्शिता से जोड़ रहे हैं।
कर्नाटक में भी SIR और Form 7 को लेकर सत्तारूढ़ कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया है कि बड़ी संख्या में Form 7 आवेदन देकर कुछ मतदाताओं के नाम सूची से हटाने की कोशिश की जा रही है। दूसरी ओर बीजेपी का कहना है कि Form 7 चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है और केवल आवेदन जमा करने के आधार पर लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
डीके शिवकुमार के बयान के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। उन्होंने साफ किया कि अगर किसी मतदाता को लगता है कि उसका नाम गलत तरीके से हटाया गया है तो उसे आधिकारिक शिकायत प्रक्रिया का इस्तेमाल करना चाहिए। साथ ही उन्होंने राहुल गांधी के अभियान का समर्थन करते हुए कहा कि यह लड़ाई देश के मतदाताओं के अधिकारों को लेकर है।
फिलहाल मतदाता सूची के SIR और Form 7 को लेकर राजनीतिक विवाद केंद्र और कर्नाटक दोनों स्तरों पर जारी है। एक ओर विपक्ष इसे मतदाताओं के अधिकार और चुनावी पारदर्शिता से जुड़ा मुद्दा बता रहा है, वहीं दूसरी ओर बीजेपी और चुनाव आयोग की ओर से प्रक्रिया को कानून के दायरे में होने की बात कही जा रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर चुनाव आयोग की कार्रवाई और राजनीतिक दलों के अगले कदम पर नजर रहेगी।