कर्नाटक

विजयपुरा में SIR पर विवाद, आठ जीवित वोटरों को मृत बताकर नाम हटाने के आवेदन

Kavita2
6 Oct 2026 3:53 PM IST
विजयपुरा में SIR पर विवाद, आठ जीवित वोटरों को मृत बताकर नाम हटाने के आवेदन
x

कर्नाटक : विजयपुरा में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया को लेकर नया विवाद सामने आया है। यहां आठ ऐसे मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाने के लिए आवेदन दिए गए, जो जीवित हैं। हैरानी की बात यह है कि इन आवेदनों में संबंधित मतदाताओं की मौत का हवाला दिया गया था।

मामला सामने आने के बाद चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। अधिकारियों ने इन आवेदनों की जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि जीवित मतदाताओं को मृत बताकर उनके नाम हटाने का प्रयास किसने और किस आधार पर किया।

इन आठ मतदाताओं में एक सरकारी स्कूल की शिक्षिका अल्लामा भगवान भी शामिल हैं। उन्हें इस पूरे मामले की जानकारी तब मिली जब एक बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO ने उनसे संपर्क किया।

BLO ने उन्हें बताया कि मतदाता सूची से उनका नाम हटाने के लिए आवेदन दिया गया है और उसमें उनकी मौत होने का दावा किया गया है। यह सुनकर अल्लामा भगवान हैरान रह गईं।

जीवित होने के बावजूद खुद को मृत बताए जाने और वोटर लिस्ट से नाम हटाने का आवेदन सामने आने के बाद उन्होंने इस पर सवाल उठाए। मामला सामने आते ही स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई।

SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची में दर्ज जानकारी को अपडेट करना और गलत, डुप्लीकेट या अपात्र नामों को हटाना होता है। इस प्रक्रिया में ऐसे मतदाताओं के नाम भी सूची से हटाए जाते हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी है।

लेकिन विजयपुरा में सामने आया मामला अलग है। यहां कथित तौर पर ऐसे लोगों के नाम हटाने की कोशिश की गई, जो पूरी तरह जीवित हैं और अपने क्षेत्र में रह रहे हैं।

आठ जीवित मतदाताओं को मृत बताने की बात सामने आने के बाद इस बात की जांच जरूरी हो गई है कि आवेदनों के साथ कौन से दस्तावेज जमा किए गए और उनकी सत्यता की जांच किस स्तर पर हुई।

चुनावी प्रक्रिया में किसी मतदाता का नाम सूची से हटाना एक संवेदनशील मामला होता है। इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया और सत्यापन जरूरी होता है।

इसी वजह से बूथ लेवल ऑफिसर की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। BLO स्थानीय स्तर पर मतदाता की वास्तविक स्थिति की पुष्टि करता है और उसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाती है।

अल्लामा भगवान के मामले में भी BLO द्वारा सीधे संपर्क किए जाने से गड़बड़ी सामने आ सकी। यदि सत्यापन के बिना आवेदन स्वीकार कर लिया जाता तो उनका नाम मतदाता सूची से हट सकता था।

अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिर किस व्यक्ति ने उनकी मौत का दावा करते हुए आवेदन जमा किया और उसका मकसद क्या था।

इसी तरह बाकी सात जीवित मतदाताओं के मामलों की भी जांच की जा रही है। यह देखा जा रहा है कि क्या सभी आवेदन एक ही तरीके से जमा किए गए थे या अलग-अलग लोगों ने उन्हें दाखिल किया।

अधिकारियों के सामने एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि क्या इन आवेदनों के साथ किसी तरह के मृत्यु प्रमाणपत्र या अन्य दस्तावेज लगाए गए थे। यदि ऐसा हुआ है तो उन दस्तावेजों की वैधता और स्रोत की जांच भी जरूरी होगी।

मामले ने चुनावी व्यवस्था में दस्तावेजों के सत्यापन की अहमियत को एक बार फिर सामने ला दिया है। मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम जुड़ना या हटना सीधे उसके मतदान के अधिकार से जुड़ा होता है।

ऐसे में गलत जानकारी के आधार पर किसी का नाम हटाने की कोशिश गंभीर मामला माना जा सकता है।

SIR प्रक्रिया के दौरान आमतौर पर मतदाता सूची में मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट नामों की पहचान की जाती है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर जांच और सत्यापन की व्यवस्था होती है।

लेकिन विजयपुरा के इस मामले ने दिखाया है कि यदि आवेदन के स्तर पर गलत जानकारी दी जाए तो सत्यापन की प्रक्रिया और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

सरकारी स्कूल की शिक्षिका अल्लामा भगवान का मामला सामने आने के बाद चुनाव अधिकारियों की सतर्कता बढ़ने की उम्मीद है। अन्य संदिग्ध आवेदनों की भी दोबारा जांच की जा सकती है।

इस पूरे विवाद का असर राजनीतिक स्तर पर भी दिखाई दे सकता है, क्योंकि वोटर लिस्ट से नाम हटाने और जोड़ने का मुद्दा पहले से ही संवेदनशील बना हुआ है।

किसी जीवित मतदाता को मृत घोषित करके उसका नाम हटाने की कोशिश केवल प्रशासनिक गलती नहीं बल्कि मतदान के अधिकार पर सीधा असर डाल सकती है।

इसलिए संबंधित अधिकारियों से यह अपेक्षा की जा रही है कि सभी आठ मामलों की बारीकी से जांच की जाए और यह पता लगाया जाए कि आवेदन किसने दाखिल किए।

यदि किसी ने जानबूझकर गलत जानकारी देकर नाम हटाने की कोशिश की है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई भी की जा सकती है।

फिलहाल सबसे बड़ी राहत यह है कि BLO द्वारा संपर्क और सत्यापन के दौरान गड़बड़ी पकड़ में आ गई। इससे संबंधित मतदाताओं को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का मौका मिल गया।

अब चुनाव विभाग के सामने चुनौती है कि ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो और SIR प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी रहे।

विजयपुरा का यह मामला इस बात का उदाहरण बन गया है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान हर आवेदन का जमीनी स्तर पर सत्यापन कितना जरूरी है।

फिलहाल आठ जीवित मतदाताओं को मृत बताकर नाम हटाने के आवेदन का मामला जांच के दायरे में है और आगे की कार्रवाई सत्यापन के आधार पर तय होगी।

Next Story