नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में बेहतर तालमेल, रिसर्च, योजना, परियोजनाओं के मूल्यांकन और निगरानी को मजबूत करने के लिए **इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट एंड लॉजिस्टिक्स अथॉरिटी (ITLA)** के गठन को मंजूरी दे दी। यह संस्था एक स्पेशल पर्पस व्हीकल यानी SPV के रूप में काम करेगी। सरकार का कहना है कि इसके जरिए अलग-अलग परिवहन मंत्रालयों और एजेंसियों के बीच बिखरी हुई योजना और क्रियान्वयन की समस्या को दूर करने का प्रयास किया जाएगा।
सरकार के अनुसार, देश में सड़क, रेलवे, बंदरगाह, विमानन, जलमार्ग, शहरी परिवहन और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी परियोजनाएं अलग-अलग मंत्रालयों और संस्थाओं द्वारा संचालित की जाती हैं। कई बार इनके बीच पर्याप्त समन्वय नहीं होने के कारण परियोजनाओं की योजना और कार्यान्वयन में कठिनाइयां सामने आती हैं। ITLA का उद्देश्य इन सभी परिवहन माध्यमों को एक समन्वित ढांचे के तहत लाना और मल्टी-मॉडल इंटीग्रेशन को बढ़ावा देना होगा।
ITLA देश में इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स प्लानिंग के लिए शीर्ष संस्था के रूप में काम करेगी। इसकी जिम्मेदारियों में रिसर्च, परियोजनाओं का तकनीकी मूल्यांकन, मॉनिटरिंग, नीति निर्माण में सहयोग और डेटा एनालिटिक्स शामिल होंगे। इसके अलावा यह केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाने में भी भूमिका निभाएगी।
नई अथॉरिटी देश के लिए एक दीर्घकालिक ट्रांसपोर्ट प्लान तैयार करने में भी अहम भूमिका निभाएगी। इस योजना में सड़क, रेलवे, बंदरगाह और शिपिंग, नागरिक उड्डयन, अंतर्देशीय जलमार्ग, तटीय शिपिंग, शहरी परिवहन और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा। सरकार की कोशिश होगी कि अलग-अलग परिवहन साधनों की योजनाएं एक-दूसरे से जुड़ी हों और बुनियादी ढांचे के विकास में दोहराव या संसाधनों की बर्बादी कम हो।
ITLA की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बड़े परिवहन और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की निगरानी करना भी होगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 500 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परिवहन और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की प्रगति पर यह संस्था नजर रखेगी। इसके साथ ही परियोजनाओं के दौरान सामने आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए विभिन्न मंत्रालयों और एजेंसियों के बीच समन्वित व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी।
सरकार परियोजनाओं के पूरा होने के बाद उनके प्रभाव का आकलन करने की व्यवस्था भी मजबूत करना चाहती है। ITLA इस बात का मूल्यांकन कर सकेगी कि किसी परियोजना से परिवहन क्षमता, माल ढुलाई, यात्रियों की सुविधा, आर्थिक गतिविधियों और लॉजिस्टिक्स की दक्षता पर कितना असर पड़ा है। इससे भविष्य की परियोजनाओं की योजना तैयार करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
ITLA के तहत **नेशनल ट्रांसपोर्ट डेटा रिपॉजिटरी (NTDR)** तैयार करने की भी योजना है। इसमें परिवहन और लॉजिस्टिक्स से संबंधित अलग-अलग स्रोतों का डेटा एक प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा। इसमें GSTN ई-वे बिल, FASTag, वाहन डेटाबेस, GPS आधारित प्रणालियों और शहरी यातायात प्रबंधन प्रणालियों से मिलने वाले डेटा को शामिल किया जा सकता है। इस डेटा का इस्तेमाल माल की आवाजाही, ओरिजिन-डेस्टिनेशन पैटर्न, परियोजनाओं की निगरानी और भविष्य की परिवहन जरूरतों के आकलन में किया जाएगा।
नई संस्था राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति 2022 की समीक्षा और उसे अपडेट करने में भी सरकार को सलाह और सहयोग देगी। इसके साथ ही ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में रिसर्च, नई तकनीकों और इनोवेशन को बढ़ावा देने का काम किया जाएगा। लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में ट्रेनिंग, स्किल डेवलपमेंट और अंतरराष्ट्रीय स्तर की बेहतर व्यवस्थाओं को अपनाने पर भी जोर रहेगा।
सरकार का मानना है कि ITLA बनने से देश में मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी। सड़क, रेल, बंदरगाह, हवाई और जलमार्ग नेटवर्क को एक-दूसरे से बेहतर तरीके से जोड़ने से सामान की आवाजाही आसान और तेज हो सकती है। इससे लॉजिस्टिक्स लागत कम करने और भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
यह अथॉरिटी उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग यानी DPIIT और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत काम करेगी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इसका उद्देश्य सभी परिवहन माध्यमों में समन्वित योजना तैयार करना है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्यों के साथ तालमेल बनाते हुए इंटीग्रेटेड मास्टर प्लान तैयार किए जाएंगे।
केंद्र सरकार के इस कदम को देश के परिवहन और लॉजिस्टिक्स ढांचे में बड़े संस्थागत बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। अब अलग-अलग परिवहन साधनों से जुड़ी योजनाओं को एक व्यापक रणनीति के तहत जोड़ने, परियोजनाओं की निगरानी मजबूत करने और डेटा आधारित फैसलों को बढ़ावा देने पर जोर रहेगा।
सरकार को उम्मीद है कि ITLA से इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की योजना अधिक प्रभावी होगी, परियोजनाओं में होने वाली देरी और समन्वय से जुड़ी समस्याएं कम होंगी और परिवहन नेटवर्क का बेहतर इस्तेमाल संभव हो सकेगा। इसके साथ ही यह पहल भारत के दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों और **विजन 2047** के तहत देश को अधिक कुशल और प्रतिस्पर्धी लॉजिस्टिक्स सिस्टम उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।