अधीर रंजन चौधरी ने सीएम ममता बैनर्जी को लिखा पत्र

रमजान-ईद पर विशेष व्यवस्थाओं की मांग की

Update: 2026-02-17 09:43 GMT
Kolkata. कोलकाता। अधीर रंजन चौधरी ने मंगलवार को ममता बनर्जी को पत्र लिखकर रमजान और ईद के मौके पर राज्य सरकार से विशेष सार्वजनिक व्यवस्थाएं करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि रमजान और ईद का मुस्लिम समुदाय के लिए गहरा धार्मिक और सामाजिक महत्व है, इसलिए प्रशासन को पहले से तैयारी करनी चाहिए। पत्र में चौधरी ने राशन दुकानों पर चावल, दाल, चीनी, खजूर और अन्य जरूरी वस्तुओं की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि त्योहार के दौरान इन वस्तुओं की मांग बढ़ जाती है, इसलिए जरूरत पड़ने पर रियायती दर पर उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाए। साथ ही बाजार में फलों और आवश्यक सामान की कीमतों में असामान्य बढ़ोतरी रोकने के लिए निगरानी बढ़ाने और एक विशेष टास्क फोर्स गठित करने की मांग की।

उन्होंने इफ्तार और सेहरी के समय निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया। खासतौर पर तड़के सुबह सेहरी के दौरान स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था करने का भी सुझाव दिया गया। चौधरी ने कहा कि इन मूलभूत सेवाओं की उपलब्धता से लोगों को राहत मिलेगी। यातायात व्यवस्था को लेकर उन्होंने प्रस्ताव रखा कि ईद से कम से कम दो सप्ताह पहले अतिरिक्त ट्रेन और सरकारी बसें चलाई जाएं, ताकि दूर-दराज में काम करने वाले लोग अपने घर पहुंच सकें। उनका कहना है कि हर साल त्योहार के समय यात्रा का दबाव बढ़ जाता है, जिससे लोगों को कठिनाई होती है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि जिस सप्ताह ईद की नमाज हो, उस दौरान महत्वपूर्ण परीक्षाएं निर्धारित न की जाएं।

उनका तर्क है कि दूर-दराज से आने वाले विद्यार्थियों को त्योहार और परीक्षा के बीच संतुलन बनाने में परेशानी हो सकती है। इसके अलावा रोजा रखने वाले कर्मचारियों की सुविधा के लिए कार्यालय समय में अस्थायी बदलाव पर भी विचार करने का आग्रह किया गया। अधीर रंजन चौधरी ने ईद के अवसर पर न्यूनतम तीन दिन का सरकारी अवकाश घोषित करने की मांग की। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि यदि ईद से एक दिन पहले और एक दिन बाद भी छुट्टी दी जाए तो बाहर काम करने वाले लोग अपने परिवार के साथ त्योहार मना सकेंगे। उनके अनुसार इससे पारिवारिक संबंध मजबूत होंगे और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा मिलेगा। पत्र में उन्होंने कहा कि रमजान केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि संयम, करुणा और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। इस दौरान सरकार की जिम्मेदारी है कि नागरिकों की दैनिक जरूरतों और धार्मिक आस्थाओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कदम उठाए जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये प्रस्ताव किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं हैं, बल्कि त्योहार के समय प्रशासनिक संवेदनशीलता और सहयोग का संकेत हैं।
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