चंडीगढ़: चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने की प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। शिक्षा विभाग के सामने चुनौती यह है कि खाली पदों को भरने के लिए न तो कोई रिक्रूटमेंट एजेंसी उपलब्ध है और न ही डेपुटेशन कोटे के लिए पर्याप्त पैनल तैयार हो पाया है। ऐसे में स्कूलों में शिक्षकों की व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। शिक्षा विभाग लंबे समय से शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने की कोशिश कर रहा है। स्थायी भर्ती में समय लगने के कारण विभाग कई बार डेपुटेशन और अन्य वैकल्पिक व्यवस्थाओं के जरिए शिक्षकों की कमी पूरी करता रहा है। लेकिन इस बार दोनों रास्तों में अड़चनें सामने आ रही हैं।

डेपुटेशन कोटे में भी नहीं बन पाया पैनल
चंडीगढ़ प्रशासन के स्कूलों में शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए दूसरे राज्यों और विभागों से डेपुटेशन पर शिक्षक बुलाए जाते हैं। इसके लिए योग्य शिक्षकों का पैनल तैयार किया जाता है, लेकिन इस प्रक्रिया में देरी के कारण पद खाली बने हुए हैं। डेपुटेशन के जरिए आने वाले शिक्षकों की संख्या सीमित होने के कारण सभी स्कूलों की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है। विभाग को विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
भर्ती एजेंसी को लेकर भी स्थिति साफ नहीं
शिक्षकों की नियमित भर्ती के लिए किसी नई रिक्रूटमेंट एजेंसी की व्यवस्था नहीं होने से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। इससे शिक्षकों के खाली पदों को भरने में देरी हो रही है।
शिक्षा विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि नए सत्र में छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो। इसके लिए अस्थायी उपायों पर भी विचार किया जा सकता है।
छात्रों की पढ़ाई पर पड़ सकता है असर
सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी का सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ सकता है। खासकर गणित, विज्ञान और अन्य महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षकों की कमी होने से विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
अभिभावक और शिक्षक संगठन भी समय पर नियुक्तियां करने की मांग करते रहे हैं। उनका कहना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की मौजूदगी जरूरी है।
विभाग के सामने दोहरी चुनौती
चंडीगढ़ शिक्षा विभाग के सामने एक तरफ खाली पद भरने की चुनौती है, वहीं दूसरी तरफ नियुक्ति प्रक्रिया को नियमों के अनुसार पूरा करना भी जरूरी है। विभाग को जल्द कोई समाधान निकालना होगा ताकि स्कूलों में शिक्षकों की कमी को कम किया जा सके। फिलहाल सभी की नजर शिक्षा विभाग की अगली कार्रवाई पर है कि क्या स्थायी भर्ती प्रक्रिया तेज की जाती है या फिर डेपुटेशन और अन्य विकल्पों के जरिए व्यवस्था संभाली जाती है।
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