नई दिल्ली: तमिलनाडु विधानसभा में गुरुवार को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने अपनी निर्धारित सीट छोड़कर मंत्रियों के बीच बैठकर कार्यवाही में हिस्सा लिया। रिपोर्ट के मुताबिक, विधानसभा के इतिहास में किसी मुख्यमंत्री का इस तरह मंत्री की सीट पर बैठना पहली बार हुआ है। इसी दौरान विपक्ष ने सदन में अधिकारियों की मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए।
तय सीट छोड़कर मंत्रियों के बीच बैठे मुख्यमंत्री विजय
तमिलनाडु विधानसभा की गुरुवार की कार्यवाही के दौरान उस समय अलग नजारा देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय अपनी निर्धारित सीट छोड़कर मंत्रियों के बीच जाकर बैठ गए। वह सदन के नेता और मंत्री केए सेंगोट्टैयन तथा मंत्री आधव अर्जुन के बीच बैठे और वहीं से विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा लिया।
रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु विधानसभा के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी मुख्यमंत्री ने अपनी तय सीट छोड़कर मंत्री के लिए निर्धारित सीट पर बैठकर सदन की कार्यवाही में भाग लिया है। मुख्यमंत्री की सीट आम तौर पर विधानसभा अध्यक्ष की सीट के पास अलग से निर्धारित होती है।
वहीं, मंत्री सदन की सामने वाली कतार में बैठते हैं। उनकी सीटें सामान्य तौर पर वरिष्ठता और अन्य व्यवस्थाओं के आधार पर तय की जाती हैं। विधायक और मंत्री आपसी बातचीत या दूसरे कारणों से कभी-कभी अपनी सीट बदल लेते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री का अपनी निर्धारित जगह छोड़कर मंत्री की सीट पर बैठना सामान्य प्रक्रिया नहीं माना जाता।
अधिकारियों की गैरमौजूदगी पर विपक्ष ने उठाए सवाल
मुख्यमंत्री के सीट बदलकर मंत्रियों के बीच बैठने से पहले विधानसभा में महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए।
विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने पूछा कि विभागीय सचिव महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के समय विधानसभा में मौजूद क्यों नहीं हैं। उन्होंने करूर भगदड़ का भी जिक्र किया और कहा कि पिछली डीएमके सरकार के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के साथ मुख्य सचिव और संबंधित विभागों के सचिव महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के दौरान सदन में मौजूद रहते थे। उदयनिधि ने मौजूदा विधानसभा सत्र में अधिकारियों की मौजूदगी को लेकर सवाल खड़े किए। उनके सवाल का जवाब देते हुए मंत्री आधव अर्जुन ने कहा कि विभागीय सचिव विधानसभा के पास बनाए गए ‘वार रूम’ में मौजूद थे।
मंत्री के मुताबिक, अधिकारी सदन में विधायकों की ओर से उठाए जा रहे मुद्दों और उनके भाषणों पर नोट्स तैयार करने का काम कर रहे थे।
CM विजय के फैसलों और कार्यशैली पर पहले भी हुई चर्चा
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय अपने अलग फैसलों और कार्यशैली को लेकर पहले भी चर्चा में रहे हैं। 10 मई 2026 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते समय उन्होंने ब्लैक सूट पहना था। तमिलनाडु की राजनीति में आम तौर पर नेता सफेद शर्ट और वेष्टी में शपथ लेते रहे हैं, इसलिए उनका पहनावा भी चर्चा का विषय बना था।
इसके बाद 12 मई को उन्होंने अपने निजी ज्योतिषी रिक्की राधन पंडित को ऑफिसर ऑफ स्पेशल ड्यूटी नियुक्त किया था। इस नियुक्ति को लेकर विवाद हुआ और बाद में इसे वापस ले लिया गया। 13 मई को संबंधित अधिकारी ने इस्तीफा दे दिया। इसी दिन मुख्यमंत्री विजय ने विधानसभा में विश्वास मत पेश किया था। TVK की ओर से दावा किया गया था कि फ्लोर टेस्ट के दौरान विधानसभा की कार्यवाही पूरी तरह लाइव प्रसारित की गई, जिसे विधानसभा के इतिहास में पहली बार बताया गया।
सचिवालय में भी अलग नजर आती है विजय की कार्यशैली
मुख्यमंत्री विजय की सचिवालय में कार्यशैली को लेकर भी रिपोर्ट में कई बातें सामने आई हैं। बताया गया है कि वह सचिवालय में तय समय पर पहुंचते हैं और करीब सात घंटे अपने डेस्क पर रहते हैं।
अधिकारियों के लिए भी समय की पाबंदी को महत्व देने की बात कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री अपना खाना खुद लेकर आते हैं और सचिवालय में अपने केबिन में ही भोजन करते हैं। अब विधानसभा में अपनी निर्धारित सीट छोड़कर मंत्रियों के बीच बैठने का उनका फैसला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इस दौरान सदन में विपक्ष की ओर से अधिकारियों की मौजूदगी को लेकर सवाल भी उठाए गए।
तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री का मंत्री की सीट पर बैठना भले ही एक असामान्य घटनाक्रम रहा, लेकिन इससे सदन की कार्यवाही के दौरान उनकी अलग कार्यशैली एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई।
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