गणेश चतुर्थी पर मनमाना बस किराया वसूलने पर शिकंजा, 3,756 मामले दर्ज और 33 वाहन जब्त
बेंगलुरु। गणेश चतुर्थी के दौरान यात्रियों की बढ़ी हुई भीड़ का फायदा उठाकर कथित रूप से ज्यादा किराया वसूलने वाले निजी बस ऑपरेटरों के खिलाफ कर्नाटक परिवहन विभाग ने बड़ा अभियान चलाया। पांच दिनों तक चले विशेष अभियान में राज्यभर में परिवहन नियमों के उल्लंघन से जुड़े कुल 3,756 मामले दर्ज किए गए, जबकि 33 वाहनों को जब्त किया गया। अधिकारियों के मुताबिक यह कार्रवाई यात्रियों से लगातार मिल रही अधिक किराया वसूली और अन्य नियम उल्लंघन की शिकायतों के बाद की गई।
त्योहारी सीजन के दौरान बेंगलुरु से राज्य के विभिन्न जिलों और दूसरे शहरों की ओर जाने वाले यात्रियों की संख्या अचानक बढ़ गई थी। इसी दौरान कई निजी बसों के किराए में असामान्य बढ़ोतरी की शिकायतें सामने आईं। यात्रियों ने आरोप लगाया कि सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक किराया मांगा जा रहा था।
सबसे ज्यादा चर्चा बेंगलुरु-सिरसी मार्ग को लेकर सामने आई शिकायत की हुई। कुछ यात्रियों ने आरोप लगाया कि इस रूट पर यात्रा के लिए उनसे 7,000 रुपये तक मांगे गए। शिकायतें सामने आने के बाद परिवहन विभाग ने क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों यानी RTO को विशेष जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए।
इसके बाद RTO अधिकारियों की अलग-अलग टीमों ने राज्यभर में बसों की जांच शुरू की। पांच दिवसीय अभियान के दौरान बस स्टैंड, प्रमुख राजमार्गों, शहरों के प्रवेश और निकास मार्गों तथा निजी बसों के प्रमुख संचालन क्षेत्रों में वाहनों को रोककर दस्तावेज और किराए से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की गई।
परिवहन विभाग के मुताबिक अभियान केवल अधिक किराया वसूलने की शिकायतों तक सीमित नहीं था। जांच के दौरान परमिट नियमों का उल्लंघन, टैक्स से जुड़े मामले, फिटनेस सर्टिफिकेट, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र और वाहन संचालन से संबंधित अन्य नियमों की भी जांच की गई।
अभियान के दौरान कुल 3,756 मामले दर्ज किए गए। नियमों का गंभीर उल्लंघन पाए जाने पर 33 वाहनों को जब्त किया गया। विभाग ने विभिन्न उल्लंघनों के आधार पर वाहन मालिकों और ऑपरेटरों के खिलाफ जुर्माना तथा अन्य वैधानिक कार्रवाई भी शुरू की है।
त्योहारों के समय निजी बसों के किराए में तेज बढ़ोतरी लंबे समय से यात्रियों की शिकायत का विषय रही है। गणेश चतुर्थी, दीपावली, दशहरा और अन्य बड़े त्योहारों के दौरान बेंगलुरु में काम या पढ़ाई करने वाले बड़ी संख्या में लोग अपने गृह जिलों की ओर जाते हैं। इससे एक साथ बस टिकटों की मांग बढ़ जाती है।
इसी मांग का फायदा उठाकर कुछ निजी ऑपरेटरों पर अत्यधिक किराया वसूलने के आरोप लगते रहे हैं। ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म पर भी मांग के आधार पर टिकट की कीमतों में तेज बदलाव देखने को मिलता है। हालांकि किसी टिकट का किराया अधिक होना अपने आप में हर मामले में कानून उल्लंघन साबित नहीं करता। कार्रवाई संबंधित परमिट की शर्तों, स्वीकृत किराया व्यवस्था और लागू परिवहन नियमों के आधार पर तय होती है।
परिवहन विभाग के अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि अगर कोई निजी बस ऑपरेटर निर्धारित नियमों के विपरीत ज्यादा किराया वसूलता है तो इसकी शिकायत संबंधित RTO या विभाग से करें। टिकट, भुगतान की रसीद और ऑनलाइन बुकिंग का स्क्रीनशॉट जैसे रिकॉर्ड शिकायत की जांच में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
अधिकारियों ने बस ऑपरेटरों को भी चेतावनी दी है कि त्योहार या यात्रियों की अधिक मांग को नियमों के उल्लंघन का आधार नहीं बनाया जा सकता। वाहन संचालकों को परमिट की शर्तों और परिवहन विभाग के नियमों का पालन करना होगा।
विशेष अभियान में RTO अधिकारियों ने कई बसों के परमिट और अन्य दस्तावेजों की जांच की। जिन मामलों में आवश्यक दस्तावेज नहीं मिले या गंभीर उल्लंघन सामने आए, उनमें वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की गई। 33 वाहनों की जब्ती इसी व्यापक जांच अभियान का हिस्सा बताई गई है।
कर्नाटक में बेंगलुरु से मंगलुरु, उडुपी, शिवमोग्गा, सिरसी, हुबली, धारवाड़, बेलगावी और राज्य के अन्य हिस्सों के लिए निजी बस सेवाओं की बड़ी मांग रहती है। विशेषकर तटीय और उत्तर कर्नाटक की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए निजी बसें परिवहन का प्रमुख विकल्प हैं।
त्योहारों के दौरान नियमित बसों और ट्रेनों में सीटें जल्दी भर जाने के कारण यात्रियों की निजी बसों पर निर्भरता बढ़ जाती है। आखिरी समय में यात्रा करने वाले लोगों के पास विकल्प कम होने से उन्हें महंगे टिकट खरीदने पड़ सकते हैं। यही वजह है कि मांग बढ़ने के समय किराया व्यवस्था की निगरानी को लेकर परिवहन विभाग पर भी दबाव बढ़ जाता है।
बेंगलुरु-सिरसी के लिए 7,000 रुपये तक किराया मांगे जाने के आरोप ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया। हालांकि यह यात्रियों द्वारा की गई शिकायत है और प्रत्येक ऐसे मामले में वास्तविक टिकट राशि, बस की श्रेणी, बुकिंग प्लेटफॉर्म और लागू नियमों की जांच के बाद ही उल्लंघन की प्रकृति तय की जा सकती है।
परिवहन विभाग की कार्रवाई का उद्देश्य केवल जुर्माना लगाना नहीं बल्कि यात्रियों को त्योहारी भीड़ के दौरान मनमानी वसूली से बचाना भी बताया गया है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि यात्रियों की भारी आवाजाही वाले मौकों पर इस तरह के निरीक्षण आगे भी किए जा सकते हैं।
विभाग के लिए ऑनलाइन टिकटिंग भी निगरानी का महत्वपूर्ण क्षेत्र बन गया है। कई निजी बसों के टिकट ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से बेचे जाते हैं, जहां मांग बढ़ने पर किराए में तेजी से बदलाव हो सकता है। ऐसे मामलों में यह देखना जरूरी होता है कि किराया संबंधित नियमों और परमिट की शर्तों के अनुरूप है या नहीं।
त्योहारी सीजन में सार्वजनिक परिवहन पर दबाव कम करने के लिए राज्य परिवहन निगम भी आमतौर पर अतिरिक्त बस सेवाएं संचालित करते हैं। इसके बावजूद कई लोकप्रिय मार्गों पर टिकट की मांग उपलब्ध सीटों से काफी अधिक हो जाती है। इसका असर निजी बसों की मांग पर भी पड़ता है।
परिवहन विभाग के पांच दिवसीय अभियान में सामने आए 3,756 मामले यह दिखाते हैं कि जांच केवल कुछ चुनिंदा बसों तक सीमित नहीं रही। राज्य के विभिन्न हिस्सों में RTO अधिकारियों ने नियमों के अनुपालन की जांच की और उल्लंघन मिलने पर मामले दर्ज किए।
33 वाहनों की जब्ती के बाद विभाग ने ऑपरेटरों को नियमों का पालन करने की चेतावनी दी है। वहीं यात्रियों को सलाह दी गई है कि टिकट बुक करते समय किराए और भुगतान का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें, ताकि विवाद या शिकायत की स्थिति में प्रमाण उपलब्ध कराया जा सके।
गणेश चतुर्थी के दौरान हुई इस कार्रवाई ने निजी बसों की ‘सर्ज प्राइसिंग’ को लेकर चल रही बहस को एक बार फिर सामने ला दिया है। एक तरफ त्योहार के दौरान यात्रियों की मांग तेजी से बढ़ती है, वहीं दूसरी तरफ परिवहन सेवाओं में पारदर्शी और नियमों के अनुरूप किराया सुनिश्चित करना जरूरी है।
फिलहाल परिवहन विभाग की कार्रवाई में 3,756 मामले दर्ज किए जा चुके हैं और 33 वाहन जब्त किए गए हैं। अब विभाग संबंधित मामलों में दस्तावेजों और उल्लंघनों की प्रकृति के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगा। साथ ही आने वाले बड़े त्योहारों में भी निजी बसों के किराए और परिवहन नियमों के अनुपालन पर निगरानी बढ़ाए जाने की संभावना है।