अब तक 270 शव मिला, 288 भारतीय अब भी लापता, नेपाल में आया 'महाप्रलय'
देखें वीडियो.
नई दिल्ली: पड़ोसी देश नेपाल में आई भयानक बाढ़ और उसमें फंसे और लापता भारतीयों पर विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को विस्तार से जानकारी दी है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने बताया कि नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के बाद 288 भारतीय नागरिकों से अब तक संपर्क नहीं हो पाया है। MEA ने बताया कि इनमें से करीब 200 लोग चीनी नियंत्रण वाले तिब्बत में फंसे हैं, जिन्हें वहाँ से निकालने की जरूरत है। चीन की तरफ से आई बाढ़ के मामले में MEA ने बताया कि तिब्बत में मौजूद लगभग 200 भारतीयों ने सरकार से मदद मांगी है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि संपर्क से बाहर इन 288 भारतीय नागरिकों में त्रिशूली-I पावर प्रोजेक्ट पर काम करने वाले लोग, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के कई ग्रुप, केरल का एक ग्रुप और अलग-अलग टूर ऑपरेटरों के ज़रिए यात्रा करने वाले भारतीय शामिल हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि नेपाल में बाढ़ से बचाए गए 21 भारतीय तमिलनाडु के रहने वाले हैं। उन्होंने कहा कि भारत नेपाल के अनुरोध पर राहत सामग्री भेज रहा है और आगे भी मदद देना जारी रखेगा। जायसवाल ने कहा कि नेपाल में अचानक आई बाढ़ की स्थिति में भारत नेपाल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "हमने तमिलनाडु के 21 भारतीय नागरिकों को बचाया है... हमें जानकारी मिली है कि मानसरोवर यात्रा पर गए कई भारतीय नागरिक चीन की तरफ फंसे हुए हैं... वहां लगभग 200 भारतीय नागरिक हैं, जिन्होंने वहां से निकलने के लिए हमसे मदद मांगी है। इनमें से 95 गारचन में हैं और अभी नेपाल में दाखिल होने के लिए बिल्सा की ओर बढ़ रहे हैं। चार लोग जीलोंग शहर में हैं, 13 ज़ुटुलपो में हैं, और वे सागा शहर के रास्ते पर हैं... स्थिति लगातार बदल रही है..."
जायसवाल ने कहा कि नेपाल को हमने जो मदद दी है उसके तहत काठमांडू के लिए मानवीय सहायता लेकर दो विमान भेजे गए हैं। उन्होंने कहा कि हवाई मार्ग से भेजी गई इन दो खेपों में कुल मिलाकर आठ टन दवाएं और एक टन खाद्य सामग्री शामिल है। उन्होंने बताया कि भारत ने नेपाल में चल रहे बचाव और राहत कार्यों में मदद के लिए अब तक कुल 47.5 टन आपातकालीन सामग्री भेजी है।
बता दें कि बुधवार की सुबह तिब्बत में हिमनद के ढहने से चीन और नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र में अचानक भीषण बाढ़ आई जिसमें अब तक 290 लोगों की मौत हो चुकी है और 1,300 से अधिक लोग लापता हैं। लापता लोगों में बड़ी संख्या उन विदेशियों की है, जो ट्रैकिंग या पवित्र हिंदू धार्मिक स्थल की तीर्थयात्रा के लिए इस क्षेत्र में पहुंचे थे। अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़ों में लापता लोगों की संख्या अलग हो सकती है। इसकी वजह आंकड़े जुटाने के तरीकों, रिपोर्ट किए जाने के समय और उनके सत्यापन में अंतर के साथ-साथ आंकड़े जुटाने वाले अधिकारियों और प्रभावित क्षेत्रों में बचाव अभियान चला रहे दलों के बीच समन्वय की कमी भी है।