गंगटोक। देश की राजधानी दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में बढ़ता वायु प्रदूषण लोगों के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। वहीं, हिमालय की गोद में बसे सिक्किम ने स्वच्छ हवा के मामले में एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एसपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से अगस्त 2026 के बीच सिक्किम के सभी आठ वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों पर एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 100 से नीचे दर्ज किया गया। इस अवधि में राज्य के सभी निगरानी केंद्रों पर हवा की गुणवत्ता अच्छी या संतोषजनक श्रेणी में रही। ये आंकड़े ऐसे समय सामने आए हैं, जब दिल्ली सहित कई महानगरों में प्रदूषण का स्तर लगातार चिंता बढ़ा रहा है।
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, आठ महीने की निगरानी अवधि में सबसे अधिक एक्यूआई 81 पूर्वी सिक्किम के रंगपो में फरवरी में दर्ज किया गया। वहीं, पश्चिम सिक्किम के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पेलिंग में जुलाई के दौरान एक्यूआई केवल 19 रहा। अगस्त में भी पेलिंग का सूचकांक 20 दर्ज किया गया। ये आंकड़े पर्वतीय राज्य की अपेक्षाकृत बेहतर वायु गुणवत्ता को दर्शाते हैं।
आठों निगरानी केंद्रों पर हवा की गुणवत्ता बेहतर
सिक्किम में वायु गुणवत्ता की निगरानी के लिए आठ केंद्र स्थापित किए गए हैं। इनमें रंगपो, सिंगताम, देवराली, रावंगला, नामची, पेलिंग, चुंगथांग और मंगन शामिल हैं।इन केंद्रों के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों में वायु प्रदूषण की स्थिति पर नजर रखी जाती है। जनवरी से अगस्त 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, किसी भी निगरानी केंद्र पर एक्यूआई 100 से अधिक नहीं पहुंचा।राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, सिक्किम के अधिकांश क्षेत्रों में हवा की गुणवत्ता अच्छी श्रेणी में बनी हुई है। हालांकि, रंगपो, सिंगताम और देवराली जैसे क्षेत्रों में अन्य स्थानों की तुलना में प्रदूषण का स्तर कुछ अधिक पाया गया है। इसके पीछे राष्ट्रीय राजमार्ग-10 पर वाहनों की अधिक आवाजाही को एक संभावित कारण बताया गया है।
पेलिंग में दर्ज हुआ सबसे कम AQI
पश्चिम सिक्किम का पेलिंग प्राकृतिक सुंदरता और पर्वतीय पर्यटन के लिए जाना जाता है। यहां जुलाई में एक्यूआई 19 दर्ज किया गया, जो जनवरी से अगस्त तक की अवधि में सामने आया सबसे कम स्तर था।इसके अलावा अगस्त में भी पेलिंग का एक्यूआई 20 रहा। दोनों आंकड़े अच्छी वायु गुणवत्ता की श्रेणी में आते हैं।उत्तर सिक्किम के चुंगथांग में भी हवा की गुणवत्ता बेहतर रही। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र में आठ महीने के दौरान एक्यूआई 28 से 31 के बीच रहा।रावंगला, नामची और मंगन जैसे क्षेत्रों में भी हवा की गुणवत्ता अच्छी श्रेणी में बनी रही। विशेष रूप से मानसून के महीनों में कई स्थानों पर प्रदूषण का स्तर अपेक्षाकृत कम दर्ज किया गया।
रंगपो में सबसे अधिक 81 एक्यूआई दर्ज
हालांकि सिक्किम के सभी निगरानी केंद्रों पर हवा की गुणवत्ता अच्छी या संतोषजनक रही, लेकिन कुछ क्षेत्रों में अन्य स्थानों के मुकाबले प्रदूषण का स्तर अधिक था।पूर्वी सिक्किम के रंगपो में फरवरी के दौरान एक्यूआई 81 दर्ज किया गया। यह आठ महीने की अवधि में सामने आया सबसे अधिक स्तर था।इसके बावजूद यह आंकड़ा संतोषजनक श्रेणी में ही रहा।
सिंगताम और देवराली जैसे क्षेत्रों में भी एक्यूआई आमतौर पर 40 से 60 के आसपास दर्ज किया गया। हालांकि इन क्षेत्रों की हवा ऊंचाई वाले कुछ स्थानों की तुलना में कम स्वच्छ रही, लेकिन प्रदूषण का स्तर मध्यम श्रेणी तक नहीं पहुंचा।
विशेषज्ञों के अनुसार, वाहनों की संख्या, सड़क परिवहन, स्थानीय व्यावसायिक गतिविधियां और मौसम संबंधी परिस्थितियां किसी भी क्षेत्र की वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती हैं।
दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने से चिंता
एक तरफ सिक्किम में वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है, वहीं राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सर्दियों की शुरुआत के साथ प्रदूषण की स्थिति गंभीर होती दिखाई दे रही है।दो नवंबर 2026 को दिल्ली का एक्यूआई बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गया। रिपोर्ट के अनुसार, राजधानी में एक्यूआई 373 तक दर्ज किया गया।स्थिति को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान यानी ग्रैप के दूसरे चरण को लागू किया।आठ नवंबर को दीपावली का त्योहार होने के कारण राजधानी में प्रदूषण का स्तर और बढ़ने की आशंका को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।
क्या होता है AQI और इसकी श्रेणियां?
वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स एक ऐसा पैमाना है, जिसके माध्यम से हवा में प्रदूषण की स्थिति को समझा जाता है।भारत के राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक के अनुसार, शून्य से 50 तक का एक्यूआई अच्छी श्रेणी में माना जाता है। वहीं 51 से 100 तक का स्तर संतोषजनक होता है।101 से 200 के बीच एक्यूआई मध्यम, 201 से 300 के बीच खराब और 301 से 400 के बीच बेहद खराब श्रेणी में आता है।यदि सूचकांक 400 से अधिक हो जाए तो हवा की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में पहुंच जाती है।
वायु प्रदूषण विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
पहाड़ी क्षेत्रों में स्वच्छ हवा के पीछे कई कारण
सिक्किम में बेहतर वायु गुणवत्ता के पीछे प्राकृतिक और भौगोलिक परिस्थितियों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।राज्य का बड़ा हिस्सा पहाड़ी और वन क्षेत्रों से घिरा हुआ है। कई इलाकों में बड़े महानगरों जैसी औद्योगिक गतिविधियां और अत्यधिक वाहन दबाव नहीं है।इसके अलावा वर्षा और मौसम संबंधी परिस्थितियां भी हवा में मौजूद प्रदूषणकारी कणों के स्तर को प्रभावित करती हैं।हालांकि, केवल प्राकृतिक वातावरण के आधार पर प्रदूषण की स्थिति का आकलन नहीं किया जा सकता। इसलिए नियमित निगरानी और प्रदूषण नियंत्रण संबंधी उपाय भी आवश्यक हैं।
पर्यटन बढ़ने के साथ पर्यावरण संरक्षण की चुनौती
सिक्किम देश के प्रमुख पर्यटन राज्यों में शामिल है। यहां हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक प्राकृतिक सुंदरता, पर्वतीय क्षेत्रों और धार्मिक स्थलों का भ्रमण करने पहुंचते हैं।पर्यटन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ होता है, लेकिन वाहनों की बढ़ती संख्या, निर्माण गतिविधियां और कचरे का उचित प्रबंधन नहीं होने जैसी समस्याएं पर्यावरण पर दबाव बढ़ा सकती हैं।ऐसे में राज्य के लिए स्वच्छ हवा की मौजूदा स्थिति को बनाए रखना एक महत्वपूर्ण चुनौती होगी।पर्यावरण संरक्षण के साथ पर्यटन और विकास गतिविधियों के बीच संतुलन स्थापित करना आवश्यक है।
दूसरे राज्यों के लिए सकारात्मक उदाहरण
सिक्किम के आठों निगरानी केंद्रों पर जनवरी से अगस्त 2026 के दौरान एक्यूआई 100 से नीचे रहना एक सकारात्मक संकेत है।हालांकि, इन आंकड़ों के आधार पर पूरे राज्य के हर स्थान और हर समय की वायु गुणवत्ता एक जैसी होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। निगरानी केंद्रों से प्राप्त आंकड़े संबंधित स्थानों की स्थिति दर्शाते हैं।इसके बावजूद सिक्किम का प्रदर्शन यह बताता है कि स्वच्छ हवा को बनाए रखने के लिए पर्यावरण संरक्षण, नियमित निगरानी और प्रदूषण के स्रोतों पर नियंत्रण महत्वपूर्ण हैं।