कोलकाता। पश्चिम बंगाल में ग्रामीण रोजगार के अवसर बढ़ाने और गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार ने अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने ग्रामीण रोजगार योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। सरकार का लक्ष्य विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण), यानी VB-G RAM-G योजना के तहत 22 करोड़ मानव-दिवस रोजगार सृजन के केंद्रीय लक्ष्य को हासिल करना है। इसके माध्यम से ग्रामीण परिवारों को अधिक रोजगार उपलब्ध कराने और दूसरे राज्यों में काम की तलाश में जाने वाले मजदूरों को स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने राज्य से बाहर काम करने वाले प्रवासी श्रमिकों से पश्चिम बंगाल लौटने की अपील करते हुए कहा कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने बताया कि VB-G RAM-G योजना के माध्यम से पात्र ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों के रोजगार की गारंटी का प्रावधान किया गया है।राज्य सरकार के अनुसार, ग्रामीण रोजगार योजनाओं के लिए केंद्र और राज्य की ओर से संयुक्त रूप से लगभग 12 हजार करोड़ रुपये के कार्य आवंटित किए गए हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से गांवों में विकास कार्यों को गति देने के साथ बड़ी संख्या में मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि योजनाओं के संचालन में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। ग्रामीण विकास से जुड़े विभागों को कार्यों की नियमित निगरानी करने और रोजगार की मांग के अनुरूप परियोजनाएं शुरू करने को कहा गया है।जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल में VB-G RAM-G योजना की शुरुआत अपेक्षित गति से नहीं हो सकी थी। ऐसे में सरकार अब मिशन मोड में काम कर रही है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को रोजगार सृजन बढ़ाने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है।मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम केवल मजदूरी उपलब्ध कराने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि गांवों के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने का भी महत्वपूर्ण अवसर हैं। इन योजनाओं के तहत जल संरक्षण, ग्रामीण सड़क निर्माण, भूमि विकास और अन्य सार्वजनिक उपयोग के कार्यों को आगे बढ़ाया जा सकता है।सरकार का मानना है कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त रोजगार उपलब्ध होगा, तो लोगों को आजीविका के लिए दूसरे राज्यों पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। इससे परिवारों को आर्थिक और सामाजिक स्तर पर भी लाभ मिल सकता है।पश्चिम बंगाल से बड़ी संख्या में श्रमिक रोजगार की तलाश में विभिन्न राज्यों में जाते हैं। निर्माण कार्य, उद्योग, सेवा क्षेत्र और अन्य असंगठित गतिविधियों में काम करने वाले इन श्रमिकों के लिए अपने गृह राज्य में रोजगार उपलब्ध होना महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
मुख्यमंत्री ने प्रवासी श्रमिकों से राज्य की योजनाओं का लाभ उठाने का आग्रह किया है। सरकार का उद्देश्य ऐसे श्रमिकों को ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों से जोड़ना है, जो अपने गांवों में रहकर काम करना चाहते हैं।VB-G RAM-G योजना देश में ग्रामीण रोजगार की नई व्यवस्था के रूप में लागू की गई है। यह योजना 1 जुलाई 2026 से प्रभावी हुई है। इसके अंतर्गत पात्र ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों तक मजदूरी आधारित रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।इसका उद्देश्य रोजगार के साथ ग्रामीण परिसंपत्तियों का विकास करना भी है। गांवों में जल संरक्षण, सिंचाई सुविधाओं, संपर्क मार्गों और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के निर्माण से स्थानीय विकास को बढ़ावा मिल सकता है।राज्य सरकार ने योजना के प्रचार-प्रसार पर भी विशेष ध्यान देने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि ग्रामीण विकास से संबंधित 375 प्रकार के कार्यों की जानकारी देने वाली एक पुस्तिका तैयार की गई है। इसे ग्रामीण आबादी तक पहुंचाने की योजना है, ताकि लोगों को उपलब्ध रोजगार अवसरों और विकास कार्यों के बारे में जानकारी मिल सके।योजना के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए पारंपरिक लोकसंगीत और अन्य जनसंपर्क माध्यमों का भी उपयोग किया जाएगा। सरकार का मानना है कि स्थानीय भाषा और सांस्कृतिक माध्यमों से जानकारी देने पर अधिक ग्रामीण परिवार योजनाओं से जुड़ सकेंगे।
ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों में पंचायतों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। स्थानीय स्तर पर कार्यों की पहचान, श्रमिकों का पंजीकरण, रोजगार की मांग का आकलन और परियोजनाओं का संचालन पंचायत संस्थाओं के सहयोग से किया जाता है।मुख्यमंत्री ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने पर जोर दिया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले दो वर्षों में यह विभाग राज्य के अन्य विभागों के लिए एक आदर्श बन सकता है।रोजगार सृजन बढ़ाने के साथ सरकार के सामने कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने की भी चुनौती होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, योजनाओं की सफलता के लिए समय पर मजदूरी भुगतान, पारदर्शी चयन प्रक्रिया और परियोजनाओं की नियमित निगरानी आवश्यक है।ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों का एक प्रमुख लाभ स्थानीय बाजारों को भी मिल सकता है। जब गांवों में मजदूरों की आय बढ़ती है, तो दैनिक उपभोग की वस्तुओं और सेवाओं की मांग में वृद्धि होती है। इससे छोटे दुकानदारों, परिवहन सेवाओं और स्थानीय कारोबार को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा मिल सकता है।राज्य सरकार ग्रामीण रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर लगातार समीक्षा कर रही है। अधिकारियों को रोजगार सृजन के निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप काम करने और परियोजनाओं की प्रगति पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।फिलहाल पश्चिम बंगाल सरकार का जोर VB-G RAM-G योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने, ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने और प्रवासी श्रमिकों के लिए स्थानीय स्तर पर बेहतर अवसर तैयार करने पर है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार 22 करोड़ मानव-दिवस के केंद्रीय लक्ष्य को किस हद तक हासिल कर पाती है और इसका लाभ ग्रामीण परिवारों तक कितनी तेजी से पहुंचता है।
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