पश्चिम बंगाल:टीएमसी में बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद आई बड़ी टूट के बीच असनसोल से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने बगावत करने से इंकार कर दिया है। पार्टी के कई विधायकों और सांसदों ने हार के बाद बगावत की है, लेकिन सिन्हा ने स्पष्ट किया कि वह ममता बनर्जी और टीएमसी के साथ ही रहेंगे। उन्होंने कहा कि मुसीबत के समय ममता बनर्जी ने उनका साथ दिया था, इसलिए वह दुख की घड़ी में उनका साथ नहीं छोड़ेंगे।
टीएमसी ने बंगाल में करारी हार का सामना किया। इस हार के बाद पार्टी में 64 विधायकों ने नए गुट का गठन किया, जिसके नेतृत्व में ऋतब्रत बनर्जी नेता विपक्ष बने। लोकसभा और राज्यसभा में भी पार्टी में बड़े पैमाने पर टूट देखने को मिली। बगावत करने वाले सांसदों की लिस्ट में काकोली घोष के नेतृत्व में करीब 19 सांसद शामिल हुए। इनमें भाजपा की कट्टर आलोचक सायोनी घोष और यूसुफ पठान जैसे नाम भी हैं। हालांकि, इन खबरों में शत्रुघ्न सिन्हा का नाम भी आया था, लेकिन गुरुवार को उन्होंने साफ कर दिया कि वह बागी नहीं बनेंगे।
सिन्हा ने पीटीआई से बातचीत में कहा, "मुश्किल समय में टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी मेरे साथ खड़ी रहीं। मुश्किल समय में मैं ममता बनर्जी का साथ नहीं छोड़ूंगा। ममता बनर्जी और टीएमसी के साथ खड़ा रहना मेरा कर्तव्य है।" उन्होंने बताया कि 2019 के संसदीय चुनाव में पटना साहिब लोकसभा सीट हारने के बाद ममता ही ऐसी नेता थीं जिन्होंने उनका साथ दिया।
सिन्हा ने कहा कि कुछ दावे किए जा रहे हैं कि उन्होंने बागी सांसदों की सूची पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन यह सभी दावे झूठे हैं। उन्होंने बताया कि 2019 के आसपास मुश्किल दौर में ममता बनर्जी ने ही उन्हें आसनसोल से उम्मीदवार बनाया और लोकसभा चुनाव जीतने में मदद की। यही कारण है कि वह पार्टी और ममता के प्रति निष्ठावान बने हुए हैं।
शत्रुघ्न सिन्हा की इस बयानबाजी ने टीएमसी के भीतर स्थिरता बनाए रखने में मदद की है। पार्टी में बगावत के बावजूद सिन्हा का यह कदम अन्य नेताओं और सांसदों के लिए संदेश है कि मुसीबत के समय वफादारी और समर्थन अहम होते हैं। इससे टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी की स्थिति भी मजबूत हुई है।
सिन्हा ने यह भी स्पष्ट किया कि वह पार्टी की नीतियों और ममता के नेतृत्व का सम्मान करते हैं और उनके साथ खड़े रहेंगे। बगावत करने वाले अन्य नेताओं के विपरीत, सिन्हा ने अपनी निष्ठा और भरोसे का परिचय देते हुए कहा कि राजनीतिक परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, वह अपने निर्णय में अडिग रहेंगे।
टीएमसी में हार के बाद आने वाली ये घटनाएं बंगाल की राजनीति में नए समीकरण बना रही हैं। ऐसे में सिन्हा का कदम पार्टी के लिए मजबूती का संकेत माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह न केवल पार्टी की छवि को बेहतर बनाएगा बल्कि भविष्य के चुनावों में भी टीएमसी के लिए मददगार साबित होगा