कोलकाता : करीब दो दशक बाद कोलकाता लौटीं बांग्लादेशी लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता तस्लीमा नसरीन ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को लेकर बड़ा बयान दिया है। तस्लीमा नसरीन ने मांग की है कि शेख हसीना को वापस बांग्लादेश जाने का मौका मिलना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने हसीना की पार्टी अवामी लीग पर लगे प्रतिबंध को हटाने की भी अपील की है। तस्लीमा ने कहा कि शेख हसीना को अपनी पार्टी का नेतृत्व करने और चुनाव लड़ने का अधिकार मिलना चाहिए।
कोलकाता में मीडिया से बातचीत के दौरान तस्लीमा नसरीन ने कहा कि शेख हसीना को जिस तरह से सत्ता से हटाया गया, वह सही नहीं था। उन्होंने अवामी लीग पर लगाए गए प्रतिबंध को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से बाहर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हसीना को बांग्लादेश लौटने और चुनावी राजनीति में हिस्सा लेने का अवसर मिलना चाहिए।
बता दें कि बांग्लादेश में जुलाई 2024 में हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना की सरकार गिर गई थी। इसके बाद उन्हें देश छोड़ना पड़ा और वह लंबे समय से भारत में रह रही हैं। वहीं उनकी पार्टी बांग्लादेश अवामी लीग पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था। हाल ही में शेख हसीना ने संकेत दिए थे कि वह इस साल के अंत तक बांग्लादेश लौट सकती हैं।
तस्लीमा नसरीन ने इस दौरान बांग्लादेश में बढ़ते धार्मिक कट्टरपंथ को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देश में अभिव्यक्ति की आजादी पर खतरा बढ़ रहा है और महिलाओं व अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह हमेशा से हर तरह के कट्टरपंथ के खिलाफ रही हैं, लेकिन इस्लामी कट्टरपंथ के खिलाफ उन्होंने इसलिए आवाज उठाई क्योंकि उन्होंने इसे बचपन से करीब से देखा है।
लेखिका ने मदरसों को लेकर भी विवादित टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को धर्म से अलग रखते हुए आधुनिक और धर्मनिरपेक्ष बनाया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर मदरसों का इस्तेमाल कट्टर विचारधारा फैलाने के लिए किया जाता है। उन्होंने सभी धार्मिक संस्थानों को आधुनिक शिक्षा के केंद्रों में बदलने की बात कही।
अपने लंबे निर्वासन को याद करते हुए तस्लीमा नसरीन भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा कि कोलकाता लौटना उनके लिए बेहद भावनात्मक पल है। उन्होंने कहा कि यह शहर उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है और यहां लौटकर उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है जैसे वह अपनी जिंदगी के पुराने दौर में वापस आ गई हैं।
तस्लीमा नसरीन ने कहा कि उनकी वापसी यह साबित करती है कि अन्याय लंबे समय तक चल सकता है, लेकिन हमेशा के लिए नहीं रहता। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में किसी लेखक या कलाकार को अपनी अभिव्यक्ति की आजादी के लिए अपना देश छोड़ने को मजबूर नहीं होना पड़ेगा।
गौरतलब है कि तस्लीमा नसरीन वर्ष 1994 में अपनी लेखनी और धार्मिक विचारों को लेकर विवादों में आई थीं। कट्टरपंथी संगठनों से मिली धमकियों के बाद उन्हें बांग्लादेश छोड़ना पड़ा था। इसके बाद वह कई देशों में रहीं। वर्ष 2007 में कोलकाता में भी उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए, जिसके बाद उन्हें शहर छोड़ना पड़ा था।
कोलकाता वापसी के दौरान तस्लीमा ने कहा कि वह किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विरोध में बोलने नहीं आई हैं। उनका मुख्य उद्देश्य महिलाओं के अधिकार, स्वतंत्र विचार और अभिव्यक्ति की आजादी के मुद्दों को उठाना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बांग्लादेश में ऐसा माहौल बनेगा जहां हर व्यक्ति बिना डर के अपनी बात रख सकेगा।