ममता सरकार वोट बैंक की राजनीति के लिए आरक्षण का दुरुपयोग: Suvendu Adhikari
West Bengal पश्चिम बंगाल: पश्चिम बंगाल West Bengal विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने बुधवार को आरोप लगाया कि ममता बनर्जी सरकार वोट बैंक की राजनीति के लिए आरक्षण का दुरुपयोग कर रही है।उन्होंने दावा किया कि ऊंची जाति के लोगों में 'आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों' के लिए आरक्षण नीतियों का तृणमूल कांग्रेस सरकार मुसलमानों को खुश करने के लिए दुरुपयोग कर रही है।साल्ट लेक में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) संघ की एक सभा में बोलते हुए अधिकारी ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार नंदीग्राम भूमि आंदोलन के बाद वाम मोर्चे द्वारा शुरू की गई "वोट बैंक की राजनीति" को जारी रख रही है, जिसका उद्देश्य मुस्लिम समर्थन हासिल करना है।
उन्होंने कहा, "नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के बाद मुसलमानों का समर्थन हासिल करने के लिए वाम दलों द्वारा बंगाल में वोट बैंक की राजनीति शुरू की गई थी और अब इसे टीएमसी द्वारा आगे बढ़ाया जा रहा है।"उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए धन आवंटित किया है, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो।उन्होंने कहा, "यह आरक्षण (ईडब्ल्यूएस के लिए) वोट बैंक की राजनीति के लिए नहीं किया जा सकता है।" कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मई 2024 में पश्चिम बंगाल में 2010 से कई वर्गों को दिए गए ओबीसी दर्जे को रद्द कर दिया था।
अदालत ने राज्य सेवाओं और पदों में रिक्तियों के लिए इन आरक्षणों को अवैध पाया। अदालत ने अप्रैल और सितंबर 2010 के बीच 77 वर्गों को दिए गए आरक्षण और 2012 के राज्य आरक्षण अधिनियम के तहत पेश किए गए 37 और आरक्षणों को रद्द कर दिया।मई 2011 तक पश्चिम बंगाल में माकपा के नेतृत्व वाला वाम मोर्चा सत्ता में था और उसके बाद तृणमूल कांग्रेस की सरकार ने सत्ता संभाली।अधिकारी ने दावा किया कि लगातार सत्ताधारी दलों की वोट बैंक की राजनीति के कारण राज्य में लोकतंत्र कम होता जा रहा है।उन्होंने टीएमसी सरकार पर पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा पर 500 किलोमीटर से अधिक की बाड़ लगाने के लिए जमीन उपलब्ध कराने में केंद्र के साथ सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया।
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मंगलवार को ओबीसी-ए और ओबीसी-बी श्रेणियों के तहत 140 उपवर्गों को आरक्षण के संबंध में पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा जारी अधिसूचनाओं पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया। 31 जुलाई तक अंतरिम रोक लगाते हुए न्यायालय ने निर्देश दिया कि 8 मई से 13 जून के बीच राज्य सरकार द्वारा ओबीसी श्रेणियों के संबंध में जारी की गई कार्यकारी अधिसूचनाएं उस तिथि तक प्रभावी नहीं होंगी। न्यायालय ने निर्देश दिया कि इसके परिणामस्वरूप होने वाले सभी कार्य भी 31 जुलाई तक स्थगित रहेंगे।