नई दिल्ली/कोलकाता। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) की एक शाखा से जुड़ी कथित आतंकी साजिश के मामले में अपनी कार्रवाई आगे बढ़ाते हुए रविवार को पश्चिम बंगाल से एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। एजेंसी की ओर से जारी बयान के अनुसार, यह गिरफ्तारी पहले से चल रही जांच के सिलसिले में की गई है। गिरफ्तारी के दौरान आरोपी के कब्जे से मोबाइल फोन और मेमोरी कार्ड सहित कई डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं। जांच एजेंसी इन उपकरणों के जरिए मामले से जुड़ी जानकारियां जुटाने का प्रयास कर रही है।इससे पहले इसी मामले में 29 सितंबर को असम, पश्चिम बंगाल और केरल में कुल 16 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया था। इस कार्रवाई के बाद 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। अब एक और गिरफ्तारी के साथ इस मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों की संख्या 14 हो गई है।
पश्चिम बंगाल से एक और आरोपी गिरफ्तार
एनआईए की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, रविवार को पश्चिम बंगाल में कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया। यह गिरफ्तारी प्रतिबंधित संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश की एक शाखा से संबंधित कथित आतंकी साजिश के सिलसिले में की गई है।एजेंसी ने बताया कि आरोपी के पास से कई डिजिटल उपकरण बरामद किए गए हैं। इनमें मोबाइल फोन और मेमोरी कार्ड भी शामिल हैं। इन उपकरणों को जांच के लिए जब्त किया गया है।हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक विवरण में गिरफ्तार आरोपी का नाम, उम्र और पश्चिम बंगाल के उस स्थान की जानकारी नहीं दी गई है, जहां से उसे पकड़ा गया। इसके अलावा आरोपी की कथित भूमिका के संबंध में भी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
मोबाइल फोन और मेमोरी कार्ड जब्त
गिरफ्तारी के दौरान एनआईए ने आरोपी के कब्जे से डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं। एजेंसी के अनुसार, इनमें मोबाइल फोन, मेमोरी कार्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस शामिल हैं।आतंकवाद से जुड़े मामलों की जांच में डिजिटल उपकरण महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकते हैं। मोबाइल फोन और मेमोरी कार्ड में मौजूद संदेश, संपर्क विवरण, दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड से जांच एजेंसियों को किसी मामले से संबंधित जानकारी प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।हालांकि, इस मामले में जब्त उपकरणों से अब तक क्या जानकारी मिली है, इसके बारे में कोई आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है। इन उपकरणों की जांच के निष्कर्ष भी फिलहाल स्पष्ट नहीं हैं।डिजिटल साक्ष्यों की जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जा सकता है कि उपकरणों में मौजूद जानकारी का कथित साजिश से कोई संबंध है या नहीं। किसी भी बरामद सामग्री की प्रासंगिकता और प्रमाणिकता जांच के बाद ही निर्धारित की जा सकती है।
29 सितंबर को तीन राज्यों में हुई थी कार्रवाई
इस मामले में एनआईए इससे पहले भी व्यापक तलाशी अभियान चला चुकी है। एजेंसी के बयान के अनुसार, 29 सितंबर को असम, पश्चिम बंगाल और केरल में कुल 16 स्थानों पर तलाशी ली गई थी।इस अभियान के बाद 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। अब रविवार को पश्चिम बंगाल से हुई नई गिरफ्तारी उसी जांच की अगली कार्रवाई है।तीन राज्यों में की गई तलाशी से स्पष्ट है कि जांच का दायरा केवल एक स्थान तक सीमित नहीं रहा है। हालांकि, तलाशी लिए गए सभी 16 स्थानों के नाम और प्रत्येक स्थान से हुई बरामदगी का विस्तृत विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।एनआईए की ओर से यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि रविवार को गिरफ्तार आरोपी का पहले पकड़े गए 13 आरोपियों से किस प्रकार का कथित संबंध है।
क्या है जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश?
जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश, जिसे जेएमबी के नाम से जाना जाता है, एक प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन है। यह संगठन आतंकवाद से संबंधित गतिविधियों के कारण सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में रहा है।भारत में भी इस संगठन से जुड़े कथित नेटवर्क और गतिविधियों को लेकर पहले जांच की जा चुकी है। आतंकवाद से संबंधित मामलों में एनआईए जैसी केंद्रीय एजेंसियां संबंधित कानूनों के तहत जांच और कार्रवाई करती हैं।ताजा मामला जेएमबी की एक शाखा द्वारा कथित रूप से रची गई आतंकी साजिश से संबंधित बताया गया है। हालांकि, उपलब्ध बयान में इस शाखा का अलग नाम या कथित साजिश के सभी उद्देश्यों का विस्तृत उल्लेख नहीं किया गया है।जांच एजेंसी की ओर से लगाए गए आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया में पुष्टि होना बाकी है।
एनआईए की जांच में डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका
आतंकवाद से संबंधित मामलों में जांच एजेंसियां भौतिक साक्ष्यों के साथ डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच करती हैं। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में मौजूद डेटा से घटनाओं के क्रम, संभावित संपर्कों और अन्य परिस्थितियों को समझने में मदद मिल सकती है।एनआईए ने ताजा गिरफ्तारी के दौरान मोबाइल फोन और मेमोरी कार्ड सहित कई उपकरण जब्त किए हैं। ऐसे उपकरणों की फॉरेंसिक जांच से संबंधित जानकारी प्राप्त की जा सकती है।हालांकि, इस मामले में जब्त उपकरणों से किसी आतंकी गतिविधि या साजिश का प्रमाण मिलने की पुष्टि अभी नहीं की गई है। इसलिए इन उपकरणों की बरामदगी को अपने आप में आरोप सिद्ध होने का आधार नहीं माना जा सकता।
अब तक 14 आरोपियों की गिरफ्तारी
एनआईए की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इस कथित आतंकी साजिश के मामले में अब तक कुल 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें 13 आरोपियों को 29 सितंबर की कार्रवाई के बाद पकड़ा गया था, जबकि एक अन्य आरोपी को रविवार को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया गया।गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया और जांच के संबंध में विस्तृत जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है।इस मामले में यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि जांच एजेंसी ने रविवार को गिरफ्तार आरोपी को किस अदालत में पेश किया है या उसकी हिरासत के संबंध में क्या आदेश जारी हुए हैं।एनआईए की ताजा कार्रवाई के बाद इस मामले में आगे की जांच और जब्त डिजिटल उपकरणों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल एजेंसी ने पश्चिम बंगाल से एक और गिरफ्तारी तथा डिजिटल उपकरणों की जब्ती की पुष्टि की है। मामले में आरोपियों की कथित भूमिका और साजिश से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच जारी है।