कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पूजा का उत्साह शुरू हो गया है। रविवार को भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने शहर के प्रसिद्ध संतोष मित्रा स्क्वायर दुर्गा पूजा समारोह का उद्घाटन किया। इस वर्ष यह आयोजन अपने 91वें साल में प्रवेश कर रहा है। खास बात यह है कि इस बार दुर्गा पूजा की थीम 'वंदे मातरम' रखी गई है। राष्ट्रीय गीत की 150वीं वर्षगांठ को समर्पित इस आयोजन में भारतीय संस्कृति, देशभक्ति और धार्मिक परंपराओं का विशेष महत्व रहेगा। इससे पहले सुवेंदु अधिकारी ने महालया के अवसर पर कोलकाता के ईडन गार्डन्स में आयोजित एक भव्य समारोह में भी हिस्सा लिया, जहां ड्रोन शो, थ्रीडी प्रोजेक्शन मैपिंग, लेजर शो, लाइट डिस्प्ले और पारंपरिक आतिशबाजी के माध्यम से दुर्गा पूजा उत्सव की शुरुआत की गई।कोलकाता में दुर्गा पूजा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हर साल विभिन्न पूजा समितियां अलग-अलग विषयों पर आधारित पंडाल तैयार करती हैं। इन आयोजनों में धार्मिक आस्था के साथ कला, संस्कृति और सामाजिक संदेशों को भी प्रमुखता दी जाती है। इसी परंपरा के तहत संतोष मित्रा स्क्वायर दुर्गा पूजा समिति ने इस वर्ष 'वंदे मातरम' को अपनी थीम बनाया है।
संतोष मित्रा स्क्वायर में दुर्गा पूजा का उद्घाटन
रविवार को कोलकाता के बोबाजार इलाके में आयोजित संतोष मित्रा स्क्वायर दुर्गा पूजा समारोह का उद्घाटन सुवेंदु अधिकारी ने किया। यह आयोजन इस वर्ष अपने 91वें साल का जश्न मना रहा है।संतोष मित्रा स्क्वायर दुर्गा पूजा कोलकाता के प्रमुख पूजा आयोजनों में शामिल है। हर वर्ष यहां विशेष थीम के आधार पर पंडाल तैयार किया जाता है। इस बार आयोजन समिति ने राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ को केंद्र में रखते हुए थीम निर्धारित की है।इस थीम के माध्यम से राष्ट्रीय गीत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है। 'वंदे मातरम' भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण गीत है, जिसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था।इस वर्ष की दुर्गा पूजा में राष्ट्रीय गीत की ऐतिहासिक विरासत को याद करने के साथ धार्मिक उत्सव की परंपरा को भी आगे बढ़ाया जा रहा है।
'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ पर खास थीम
संतोष मित्रा स्क्वायर दुर्गा पूजा की इस वर्ष की थीम 'वंदे मातरम' है। आयोजन समिति ने राष्ट्रीय गीत की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर इस विषय का चयन किया है।'वंदे मातरम' भारतीय इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह गीत देशभक्ति और मातृभूमि के प्रति सम्मान की भावना से जुड़ा हुआ है।दुर्गा पूजा जैसे बड़े सांस्कृतिक आयोजन में इस विषय को शामिल करने का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत की ऐतिहासिक विरासत को सामने लाना है।कोलकाता में थीम आधारित दुर्गा पूजा पंडालों की विशेष पहचान रही है। यहां धार्मिक आयोजनों के माध्यम से इतिहास, कला और सांस्कृतिक विषयों को प्रस्तुत करने की परंपरा है।इस बार संतोष मित्रा स्क्वायर का आयोजन भी इसी परंपरा का हिस्सा है, जिसमें राष्ट्रीय गीत की वर्षगांठ को विशेष महत्व दिया गया है।
महालया पर ईडन गार्डन्स में भव्य कार्यक्रम
संतोष मित्रा स्क्वायर दुर्गा पूजा के उद्घाटन से पहले सुवेंदु अधिकारी ने रविवार को महालया के अवसर पर कोलकाता के ईडन गार्डन्स में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में हिस्सा लिया।इस आयोजन के माध्यम से दुर्गा पूजा उत्सव की शुरुआत का उत्साह प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम में आधुनिक तकनीक और पारंपरिक उत्सव के विभिन्न स्वरूप देखने को मिले।ईडन गार्डन्स में आयोजित समारोह में ड्रोन शो, थ्रीडी प्रोजेक्शन मैपिंग, लेजर और लाइट डिस्प्ले के साथ पारंपरिक आतिशबाजी भी शामिल थी।इन प्रस्तुतियों के माध्यम से दुर्गा पूजा के स्वागत को विशेष रूप दिया गया। महालया बंगाल की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। यह देवी दुर्गा के आगमन और दुर्गा पूजा की तैयारियों से जुड़ा पर्व है।
ड्रोन शो और लेजर लाइट ने बनाया आयोजन खास
ईडन गार्डन्स में महालया के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया। ड्रोन शो और थ्रीडी प्रोजेक्शन मैपिंग जैसी प्रस्तुतियां आयोजन का प्रमुख हिस्सा रहीं।इसके अलावा लेजर और लाइट डिस्प्ले के माध्यम से उत्सव को आकर्षक स्वरूप दिया गया। पारंपरिक आतिशबाजी भी कार्यक्रम में शामिल रही।ड्रोन शो में तकनीक की मदद से आसमान में विभिन्न प्रकार की दृश्य प्रस्तुतियां तैयार की जाती हैं, जबकि थ्रीडी प्रोजेक्शन मैपिंग के जरिए किसी सतह पर विशेष प्रकाश प्रभाव उत्पन्न किए जाते हैं।इस तरह के कार्यक्रम धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में आधुनिक तकनीक के बढ़ते उपयोग को दर्शाते हैं।ईडन गार्डन्स में आयोजित कार्यक्रम ने दुर्गा पूजा की शुरुआत को विशेष स्वरूप दिया।
बंगाल की सांस्कृतिक पहचान है दुर्गा पूजा
पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। विशेष रूप से कोलकाता में इस पर्व को बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।शहर के विभिन्न इलाकों में पूजा समितियां आकर्षक पंडाल तैयार करती हैं। इन पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमाओं की स्थापना के साथ पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जाता है।दुर्गा पूजा के दौरान धार्मिक आस्था के साथ कला और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलता है। अलग-अलग थीम पर आधारित पंडाल इस उत्सव की प्रमुख विशेषता हैं।संतोष मित्रा स्क्वायर में आयोजित दुर्गा पूजा का 91वां वर्ष इस आयोजन की लंबी परंपरा को दर्शाता है। इस बार 'वंदे मातरम' थीम के जरिए राष्ट्रीय गीत की ऐतिहासिक विरासत को उत्सव से जोड़ा गया है।
सुवेंदु अधिकारी ने की दुर्गा पूजा उत्सव की शुरुआत
रविवार को सुवेंदु अधिकारी की मौजूदगी में संतोष मित्रा स्क्वायर दुर्गा पूजा का उद्घाटन किया गया। इससे पहले उन्होंने महालया के अवसर पर ईडन गार्डन्स में आयोजित समारोह में भाग लिया।दोनों कार्यक्रम कोलकाता में दुर्गा पूजा की तैयारियों और उत्सव की शुरुआत से जुड़े रहे। एक ओर संतोष मित्रा स्क्वायर में राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ को थीम बनाया गया, वहीं दूसरी ओर ईडन गार्डन्स में आधुनिक तकनीक और पारंपरिक आतिशबाजी के साथ उत्सव का स्वागत किया गया।कोलकाता में दुर्गा पूजा का यह आयोजन धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और ऐतिहासिक विरासत के मेल को सामने लाता है।
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