महान चित्रकार जोगेन चौधरी का निधन, विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
कोलकाता: भारत के महान समकालीन चित्रकार और आधुनिक कला जगत के शिखर पुरुष जोगेन चौधरी के निधन से कला और संस्कृति की दुनिया में गहरा शोक व्याप्त है। उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।सुवेंदु अधिकारी ने अपने शोक संदेश में जोगेन चौधरी के अद्वितीय योगदान को याद करते हुए कहा, *"वे एक ऐसे उस्ताद थे, जिनकी अनूठी कला-शैली और रेखाचित्रों ने भारतीय आधुनिक कला को एक नई परिभाषा दी।"* उन्होंने कला जगत और दिवंगत कलाकार के शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
1. आधुनिक भारतीय कला के युग का अंत
जोगेन चौधरी का जाना भारतीय समकालीन कला (Contemporary Indian Art) के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत माना जा रहा है। उन्होंने अपनी विशिष्ट शैली—विशेष रूप से उनकी स्याही, वॉटरकलर और पेस्टल माध्यमों में बनाई गई उलझी हुई और प्रभावशाली रेखाओं (Sinuous Lines)—के ज़रिए भारतीय चित्रकला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दिलाई। उनकी कलाकृतियों ने न केवल भारतीय लोक कला की जड़ों को छुआ, बल्कि आधुनिकतावादी दृष्टिकोण को भी अत्यंत सहजता से आत्मसात किया।
2. सुवेंदु अधिकारी का भावुक श्रद्धांजलि संदेश
विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया और मीडिया बयानों के माध्यम से जोगेन चौधरी को याद किया। अधिकारी ने कहा कि जोगेन दा केवल बंगाल के नहीं, बल्कि पूरे देश के सांस्कृतिक गौरव थे। उन्होंने भारतीय कला को पारंपरिक सीमाओं से बाहर निकालकर अंतरराष्ट्रीय पटल पर स्थापित किया। अधिकारी ने कहा, "जोगेन चौधरी की बनाई हर एक रेखा में संवेदना, समाज और जीवन का गहरा दर्शन झलकता था। उनका निधन देश की कलात्मक धरोहर के लिए एक अपूरणीय क्षति है।"
3. 'जोगेन शैली' और कला में उनका अनूठा योगदान
1939 में जन्मे जोगेन चौधरी ने गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स, कोलकाता और बाद में पेरिस के प्रसिद्ध 'इकोल दे ब Beaux-Arts' से शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने कला की एक ऐसी शैली विकसित की जिसे कला समीक्षकों द्वारा 'जोगेन शैली' कहा गया।रेखाओं का जादू उनकी आकृतियों में मानव शरीर की भाव-भंगिमाएं, अवचेतन मन के विचार और सामाजिक यथार्थवाद स्पष्ट दिखाई देता था।रंगों और स्याही का अनूठा मेल काले रंग की स्याही के साथ पेस्टल रंगों के सीमित और सटीक उपयोग ने उनकी कला को एक विशिष्ट पहचान दी।
4. राष्ट्रपति भवन से लेकर अंतरराष्ट्रीय दीर्घाओं तक का सफर
जोगेन चौधरी ने अपने करियर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वे राष्ट्रपति भवन में 'कीपर ऑफ आर्ट ' (Keeper of Art) के पद पर भी कार्यरत रहे, जहाँ उन्होंने राष्ट्रपति भवन के कला संग्रह के संरक्षण में अमूल्य योगदान दिया। इसके अलावा, शांतिनिकेतन के विश्वभारती विश्वविद्यालय में कला भवन के प्रोफेसर के रूप में उन्होंने कला की कई पीढ़ियों का मार्गदर्शन किया और अनगिनत युवा कलाकारों को प्रेरित किया।
5. एक युगद्रष्टा कलाकार की अमिट छाप
जोगेन चौधरी को उनके अतुलनीय योगदान के लिए पद्म भूषण सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा गया। उनका निधन भारतीय और वैश्विक कला जगत में एक खालीपन छोड़ गया है। सुवेंदु अधिकारी ने अपने संदेश के अंत में कहा कि भले ही जोगेन चौधरी अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी अनूठी कला-कृतियां और रेखाएं आने वाली कई पीढ़ियों तक कलाकारों और कला-प्रेमियों को प्रेरित करती रहेंगी।