कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मालदा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक महीने के भीतर 89 नवजात शिशुओं की मौत के मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए अस्पताल के दो वरिष्ठ अधिकारियों को पद से हटा दिया है। स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के बाद अस्पताल प्रशासन में भी बदलाव किया गया है।
सरकार के इस फैसले के बाद मालदा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के **मेडिकल सुपरिंटेंडेंट सह वाइस प्रिंसिपल (MSVP) प्रसेनजीत बार** और **बाल रोग विभाग की प्रमुख सुश्मा शॉ** को उनके पदों से हटाया गया है। उनकी जगह नए अधिकारियों की नियुक्ति की गई है।
89 नवजातों की मौत से मचा हड़कंप
मालदा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में अगस्त महीने के दौरान 89 नवजात शिशुओं की मौत की खबर सामने आने के बाद राज्य स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया था।
रिपोर्ट के अनुसार, कई नवजातों की हालत बेहद गंभीर होने के बाद उन्हें दूसरे अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों से मालदा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था। इनमें कई बच्चे कम वजन, सांस लेने में परेशानी और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे।
एक दिन में 10 नवजातों की मौत की खबर सामने आने के बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया था। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी।
जांच के लिए बनाई गई थी विशेषज्ञ समिति
मामले की गंभीरता को देखते हुए पश्चिम बंगाल सरकार ने विशेषज्ञों की एक जांच समिति गठित की थी।
इस टीम ने मालदा मेडिकल कॉलेज पहुंचकर नवजात देखभाल इकाई, प्रसूति विभाग और अस्पताल की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया।
जांच टीम ने मौतों के कारणों की समीक्षा की और अस्पताल प्रशासन से कई सवाल पूछे। समिति ने स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और नवजातों की देखभाल व्यवस्था मजबूत करने को लेकर सुझाव भी दिए।
कुपोषण और गंभीर बीमारियां बनीं वजह
प्रारंभिक जांच में विशेषज्ञों ने कई कारणों की ओर इशारा किया है।
जांच टीम के अनुसार, कई नवजातों की मौत के पीछे **कुपोषण, जन्म के समय सांस लेने में परेशानी, कम वजन, पीलिया और हृदय संबंधी समस्याएं** जैसी वजहें सामने आईं।
हालांकि अधिकारियों ने यह भी कहा कि हर मौत के मामले की अलग-अलग समीक्षा की जा रही है, ताकि वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।
अस्पताल में व्यवस्था पर उठे सवाल
89 नवजातों की मौत के बाद अस्पताल की व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सवाल उठने लगे।
जांच में विभागों के बीच बेहतर तालमेल की कमी, संसाधनों और प्रबंधन से जुड़ी कुछ खामियों की बात भी सामने आई।
स्वास्थ्य विभाग अब नवजात देखभाल व्यवस्था को मजबूत करने और रेफरल सिस्टम की समीक्षा करने पर जोर दे रहा है।
नए अधिकारियों की नियुक्ति
राज्य स्वास्थ्य विभाग के आदेश के बाद अस्पताल प्रशासन में बदलाव किया गया है।
मालदा मेडिकल कॉलेज के नए अधीक्षक के रूप में **गणेश चंद्र गेन** को नियुक्त किया गया है। वहीं बाल रोग विभाग की जिम्मेदारी **विश्वनाथ बसु** को दी गई है।
नए अधिकारी जल्द ही अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे और नवजात देखभाल व्यवस्था को बेहतर करने की दिशा में काम करेंगे।
NHRC ने भी लिया था संज्ञान
मालदा अस्पताल में नवजातों की मौत के मामले पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी स्वत: संज्ञान लिया था।
आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव से इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। NHRC ने कहा था कि यदि रिपोर्ट में दी गई जानकारी सही है तो यह गंभीर मानवाधिकार मुद्दा हो सकता है।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
मामले को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गए हैं।
विपक्ष ने राज्य सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए और जवाबदेही तय करने की मांग की।
वहीं राज्य सरकार का कहना है कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और दोषियों या लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।
आगे क्या होगा?
अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है। विशेषज्ञ समिति की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि इतनी बड़ी संख्या में नवजातों की मौत के पीछे मुख्य कारण क्या रहे।
सरकार की ओर से अस्पतालों में नवजात देखभाल सुविधाओं को बेहतर करने और रेफरल व्यवस्था में सुधार की बात कही जा रही है।
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