कोलकाता : पश्चिम बंगाल में नेताजी सुभाष चंद्र बोस को लेकर दिए गए कथित आपत्तिजनक बयान के बाद भाजपा के राज्यसभा सांसद नागेंद्र राय उर्फ अनंत महाराज की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने सांसद को दिया गया ‘बंगा विभूषण’ सम्मान वापस लेने का फैसला किया है। उन्हें यह राजकीय सम्मान इसी वर्ष फरवरी में तत्कालीन ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल में प्रदान किया गया था।राज्य सरकार का यह निर्णय नेताजी और आजाद हिंद फौज की भूमिका पर अनंत महाराज की विवादित टिप्पणी के बाद सामने आया है। आरोप है कि भाजपा सांसद ने एक मीडिया बयान में नेताजी को ‘युद्ध अपराधी’ बताया था। इसके साथ ही उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में नेताजी के नेतृत्व और आजाद हिंद फौज के योगदान पर भी सवाल उठाए थे। उनके बयान के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नेताजी के कथित अपमान को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए पुलिस को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि बंगाल की धरती पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस का अपमान किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। राज्य सरकार इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाएगी। खुले मंच या सोशल मीडिया के माध्यम से नेताजी की छवि धूमिल करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
 कानून के सामने सभी बराबर: मुख्यमंत्री
पत्रकारों ने मुख्यमंत्री से पूछा कि क्या अनंत महाराज के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। इस पर शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि कानून के सामने सभी लोग समान हैं। कोई सामान्य नागरिक हो, विधायक, सांसद अथवा किसी राजनीतिक दल का पदाधिकारी, पुलिस को निष्पक्षता से अपना काम करना चाहिए।मुख्यमंत्री ने कहा कि वह किसी व्यक्ति का नाम लेकर उसे अनावश्यक प्रसिद्धि नहीं देना चाहते, लेकिन कानून अपना काम करेगा। उन्होंने विवादित टिप्पणी करने वालों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को भी कहा। अब पुलिस कथित बयान और सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री की जांच कर सकती है।अनंत महाराज उत्तर बंगाल के कूचबिहार क्षेत्र से आते हैं और राजबंशी समुदाय के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। नेताजी पर उनकी कथित टिप्पणी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी विवाद बढ़ गया। नेताजी से जुड़ी कुछ कथित रूप से विकृत तस्वीरें और आपत्तिजनक पोस्ट साझा किए जाने की शिकायतें सामने आईं।
 विधायकों के प्रतिनिधिमंडल ने की थी कार्रवाई की मांग
मामले को लेकर उत्तर बंगाल के विधायक दीपक बर्मन और निसिथ प्रामाणिक के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। प्रतिनिधिमंडल ने नेताजी की गरिमा की रक्षा करने तथा उनके खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की मांग रखी थी। इसके बाद सरकार ने मामले में सख्त कदम उठाने का संकेत दिया।विपक्ष की ओर से भाजपा पर नेताजी का अपमान करने के लगाए जा रहे आरोपों को मुख्यमंत्री ने खारिज किया। उन्होंने कहा कि भाजपा और उनकी सरकार के मन में नेताजी के प्रति गहरा सम्मान है। किसी व्यक्ति के बयान को पार्टी और सरकार की विचारधारा से जोड़ना उचित नहीं है।मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि पश्चिम बंगाल के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में ‘नेताजी सुभाष सेवा केंद्र’ स्थापित किया जाएगा। इन केंद्रों की स्थापना के लिए राज्य सरकार वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगी। इनका उद्देश्य नेताजी के विचारों, राष्ट्रवाद और स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना होगा।शुभेंदु अधिकारी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने दिल्ली के कर्तव्य पथ पर नेताजी की भव्य प्रतिमा स्थापित कर उन्हें सम्मान दिया है। फिलहाल सबकी नजर इस बात पर है कि सम्मान वापस लिए जाने के बाद भाजपा सांसद के विरुद्ध पुलिस कोई मामला दर्ज करती है या नहीं।
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