Kolkata कोलकाता। CPI-M नेता मोहम्मद सलीम ने चुनावी SIR (Summary Revision of Electoral Roll) को लेकर बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर तीखे आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव में वोटर लिस्ट को सही करने के बजाय इसमें धर्म, क्षेत्र, गरीबी और लिंग के आधार पर लोगों को परेशान किया जा रहा है। मोहम्मद सलीम ने बताया कि जब वोटर लिस्ट जारी की गई तो उनका पार्टी को यह अंदेशा था कि इसमें गलत तरीके से लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, “जिन लोगों की मृत्यु हो गई है, उनका नाम इस लिस्ट से हटा दिया जाना चाहिए। इसके बावजूद कई लोगों को उनके नाम, उम्र और वर्तनी को लेकर नोटिस दिए जा रहे हैं।”
सलीम ने आरोप लगाया कि नोटिस देने में विधानसभा क्षेत्र और बूथ का चयन किया जा रहा है, जिससे जनता को जानबूझकर परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस कारण वे जल्द ही चुनाव आयोग (ECI) और सीईओ (CEO) के पास जाएंगे और इस मामले को लेकर शिकायत करेंगे। CPI-M नेता ने कहा, “यह स्पष्ट है कि भाजपा और TMC लोगों की परेशानी बढ़ाने की राजनीति कर रही हैं, जबकि उन्हें राहत देने की बजाय परेशान किया जा रहा है। हम जनता के अधिकारों की रक्षा करेंगे और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करेंगे।”
उन्होंने यह भी कहा कि SIR के माध्यम से नोटिस दिए जाने से हजारों मतदाता प्रभावित हो रहे हैं, और इससे चुनावी प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है। सलीम ने कहा कि यह सिर्फ प्रशासनिक मुद्दा नहीं है, बल्कि जनता के मताधिकार और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सीधा हमला है। सलीम के अनुसार, वोटर लिस्ट में सुधार करना जरूरी है, लेकिन इसका दुरुपयोग मतदाताओं को डराने या परेशान करने के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने भाजपा और TMC से अपील की कि वे जनता के साथ सहयोग करें और मतदाता सूची में सुधार के दौरान किसी को हानि न पहुँचाए।
विशेषज्ञों का कहना है कि SIR या वोटर लिस्ट में सुधार प्रक्रिया के दौरान अक्सर नाम, उम्र या वर्तनी में त्रुटियों के कारण मतदाता नोटिस प्राप्त करते हैं, लेकिन अगर इसमें जानबूझकर किसी वर्ग या क्षेत्र को निशाना बनाया जा रहा है तो यह सत्ता और प्रशासन के दुरुपयोग का मामला बन सकता है। कुल मिलाकर, मोहम्मद सलीम ने SIR को लेकर जनता के मताधिकार की सुरक्षा और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि पार्टी और लोकतांत्रिक संस्थान इस मामले में कड़ा रुख अपनाएं ताकि किसी भी मतदाता को चुनाव में भाग लेने से रोका न जा सके और सभी को सुरक्षित रूप से मतदान का अधिकार मिले।