कोलकाता: पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध तारापीठ मंदिर में कौशिकी अमावस्या को लेकर सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। लाखों श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर से लेकर आसपास के इलाकों तक करीब 4,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा ड्रोन CCTV कैमरे वॉच टावर और सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों के जरिए भी निगरानी रखी जा रही है। कौशिकी अमावस्या तारापीठ के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है। इस मौके पर देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां तारा के दर्शन और विशेष पूजा के लिए पहुंचते हैं। 2026 में मुख्य धार्मिक आयोजन 10 सितंबर की रात को हो रहा है। भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और मंदिर समिति ने कई स्तरों पर तैयारियां की हैं।
4000 पुलिसकर्मी संभालेंगे सुरक्षा
सुरक्षा व्यवस्था के लिए करीब चार हजार पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। इनमें महिला पुलिसकर्मी और सादे कपड़ों में तैनात जवान भी शामिल हैं। भीड़ के बीच चोरी और दूसरी आपराधिक गतिविधियों को रोकने के लिए सादे कपड़ों में पुलिस विशेष नजर रखेगी। महिला पुलिसकर्मी स्कूटी से पेट्रोलिंग करेंगी। महत्वपूर्ण स्थानों पर वॉच टावर बनाए गए हैं जबकि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेड और ड्रॉप गेट की व्यवस्था की गई है।
8 किलोमीटर तक ड्रोन की नजर
इस बार तारापीठ की सुरक्षा को हाईटेक बनाया गया है। रामपुरहाट के मुनसुबा मोड़ से तारापीठ तक करीब आठ किलोमीटर के रास्ते पर ड्रोन से निगरानी की जाएगी। मंदिर परिसर और आसपास के श्मशान क्षेत्र में CCTV कैमरों से भी नजर रखी जा रही है। ड्रोन के जरिए भीड़ और यातायात की स्थिति की रियल टाइम जानकारी सुरक्षा अधिकारियों तक पहुंचेगी। इससे किसी स्थान पर अचानक ज्यादा भीड़ होने की स्थिति में तुरंत अतिरिक्त पुलिसबल भेजने में मदद मिलेगी।
200 दमकलकर्मी भी तैनात
आग से जुड़ी किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए करीब 200 दमकलकर्मियों को तैनात किया गया है। पहली बार अत्याधुनिक रोबोटिक फायर टेंडर का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। भीड़भाड़ वाले स्थान पर आग लगने की स्थिति में ये उपकरण तेजी से कार्रवाई करने में मदद करेंगे। द्वारका नदी में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए नदी किनारे लोहे की फेंसिंग की व्यवस्था भी की गई है।
गर्भगृह में प्रवेश पर रोक
भारी भीड़ को देखते हुए इस बार सामान्य श्रद्धालुओं के मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश और मां तारा की प्रतिमा को छूने पर रोक लगाई गई है। श्रद्धालु निर्धारित दूरी से ही दर्शन और पूजा कर सकेंगे। करीब 10 महीने बाद द्वारका नदी के तट पर शाम की आरती भी दोबारा शुरू की जा रही है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष ट्रेनों और अतिरिक्त रेल कोच की व्यवस्था भी की गई है। प्रशासन का पूरा फोकस कौशिकी अमावस्या के दौरान भारी भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं को सुरक्षित दर्शन कराने पर है।
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